- ईरान का विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह वर्तमान में अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं कर रहा है
- ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी प्रस्तावित दक्षिणी रास्ते को समझौते के खिलाफ माना है
- ईरान ने बताया कि पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है जबकि कतर जरूरत पड़ने पर मदद कर रहा है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि आज से ईरान से फिर बातचीत शुरू होगी. ईरान ने अब इससे भी इन्कार कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि वह अभी अमेरिका के साथ बातचीत के लिए किसी प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी नहीं कर रहा है और न ही किसी ऐसी बातचीत में शामिल हो रहा है. हालांकि, प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पत्रकारों को बताया कि पिछले एक हफ्ते में ओमान के साथ 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से जुड़ी व्यवस्थाओं पर बातचीत "गंभीरता से" की गई है. इससे पहले ईरान ने ट्रंप के तुरंत होर्मुज खुलने के दावे से भी इन्कार कर दिया था.
क्या अमेरिका से वार्ता का है इरादा
ईरान-अमेरिका बातचीत शुरू करने के लिए कतरी और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों के आने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर बघाई ने कहा: "इन दिनों, न तो हम बाहर से आने वाले किसी प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी करने जा रहे हैं और न ही हम कहीं मेहमान बनने जा रहे हैं." उन्होंने कहा कि व्यापक स्तर पर राजनयिक संपर्क जारी हैं; ईरान के विदेश मंत्री क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि असुरक्षा को बढ़ने से रोका जा सके और ईरान के राष्ट्रीय हितों व सुरक्षा की रक्षा की जा सके. बघाई ने अलग से कहा कि पिछले सात-आठ दिनों में ओमान के साथ बातचीत "गंभीरता से" की गई है.
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चीन क्या बनने जा रहा मध्यस्थ
यह पूछे जाने पर कि क्या चीन 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के मुद्दे पर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा है, बघाई ने कहा कि ईरान-अमेरिका मामलों में पाकिस्तान ही मध्यस्थ बना हुआ है, और कतर जरूरत पड़ने पर मदद कर रहा है. उन्होंने कहा कि ईरान के चीन के साथ करीबी और दोस्ताना रिश्ते हैं और बीजिंग भी ईरान की उन चिंताओं से सहमत है जिन्हें उन्होंने अमेरिका की विनाशकारी एकतरफा कार्रवाई और इलाके में अस्थिरता कहा; चीनी अधिकारी तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए अपनी कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चीन को मौजूदा मध्यस्थों के साथ एक नए औपचारिक मध्यस्थ के तौर पर शामिल किया जा रहा है.
ओमान से क्या बात हो रही
बघाई ने कहा, "हम होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अस्थायी कॉरिडोर बना रहे हैं, न कि दो या तीन अलग-अलग रास्ते. प्रस्तावित होर्मुज रास्ते को दोनों तटीय देशों के हितों और जरूरतों को पूरा करना होगा. होर्मुज के दक्षिणी रास्ते को खोलने की अमेरिका की कोशिश समझौते की शर्तों के खिलाफ थी. इस दौरान, बातचीत इस बात पर केंद्रित रही है कि दक्षिणी रास्ता (यानी ओमान के समुद्री इलाके से गुजरने वाला रास्ता) और उत्तरी रास्ता (जो ईरान के समुद्री इलाके से गुजरता है) मिलकर एक बीच का रास्ता बनें; ऐसा रास्ता जो दोनों तटीय देशों की जरूरतों और हितों को पूरा करे. इसलिए, अब हम एक ऐसे कॉरिडोर की बात कर रहे हैं जिसमें वापसी का रास्ता भी हो, न कि दो या तीन अलग-अलग रास्ते. इस बीच के रास्ते का इस्तेमाल अस्थायी तौर पर तब तक किया जाएगा जब तक कि 'TSS' (इंटरनेशनल शिपिंग में इस्तेमाल होने वाला शब्द) की जगह लेने वाले किसी पक्के रास्ते पर फैसला नहीं हो जाता. हमें यह देखने के लिए कुछ समय इंतजार करना होगा कि क्या ओमान के साथ बातचीत को किसी दूसरी प्रक्रिया से जोड़ा जा सकता है और क्या इससे इलाके में तनाव कम हो सकता है."

सऊदी-पाकिस्तान-इराक से की बात
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अलग-अलग देशों के अधिकारियों के साथ बातचीत के सिलसिले में सऊदी अरब के अपने समकक्ष और पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ अलग-अलग फोन पर बातचीत की है. रविवार रात सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान के साथ पिछले 24 घंटों में हुई दूसरी फोन कॉल में, अराघची ने पश्चिम एशियाई क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने और उसे मजबूत करने के मकसद से हालिया कूटनीतिक कोशिशों और पहलों की समीक्षा की. इसके अलावा, इस शीर्ष राजनयिक ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ भी आपसी चिंता के मुद्दों पर फिर से विचार-विमर्श किया, खासकर ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजारयल द्वारा रची गई और जारी साजिशों से पैदा हुए हालात पर. इसकी तरह अराघची ने अपने इराकी समकक्ष फुआद हुसैन ने क्षेत्र में हाल की घटनाओं पर चर्चा करने के लिए फोन पर बातचीत की.
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