- डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बातचीत के संकेत दिए हैं, लेकिन युद्ध रुकने की कोई गारंटी नहीं दी है
- ईरान ने ट्रंप के बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी और मीडिया में उनका मजाक उड़ाया गया है
- ट्रंप ने मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान के माध्यम से बातचीत की जानकारी अचानक सार्वजनिक कर दी है
ईरान युद्ध शुरू करने के बाद से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इतनी बार बयान बदले हैं कि लोग टैरिफ पर उनके बयानों को भी भूल चुके हैं. अभी दो दिन पहले उन्होंने ईरान को धमकी दी थी कि 48 घंटे में होर्मुज नहीं खुला तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को बर्बाद कर देंगे. आज वो बताने लगे कि ईरान से डील को लेकर बात चल रही है और खुद उनकी भी फोन पर ईरान के नेताओं से बात हो चुकी है. हालांकि, वो खुद भी गारंटी नहीं दे सके कि जंग अब रुकने वाली है. हां, उन्होंने खुद से डील के लिए 5 दिनों का समय दे दिया है. उधर, ईरान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हां, ईरान की मीडिया जरूर ट्रंप के बयान का मजाक उड़ाने लगी. यहां तक कह दिया कि कोई बातचीत नहीं चल रही.
ट्रंप ने अचानक क्यों की घोषणा
तो सवाल उठता है कि आखिर ट्रंप अचानक ऐसा क्यों कहने लगे? अगर बातचीत हो भी रही थी तो उन्होंने आज इसे सार्वजनिक क्यों कर दिया? यहां तक की मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान के जरिए बातचीत की बात को भी बता दिया. आखिर ऐसा क्या जल्दी थी? आम तौर पर सभी देश जब युद्ध में होते हैं तो बैक चैनल बात करते ही हैं मगर कोई भी देश तब तक इस बात का खुलासा नहीं करता जब तक कि कोई घोषणा नहीं हो? यूक्रेन युद्ध में भी चूंकि एक पार्टी अमेरिका और यूरोप भी हैं, इसलिए इस युद्ध को रोकने के लिए कई दौर की वार्ताएं हुईं हैं. मगर जब भी दो देश लड़ते हैं तो बैक चैनल बातचीत की कोई जानकारी नहीं देता. ऐसा भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सिंदूर ऑपरेशन के दौरान भी देखा गया था. बैक चैनल जो भी चल रहा था, उसकी घोषणा तभी हुई जब पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना को कह दिया कि वो अब लड़ना नहीं चाहता.
ट्रंप के बयान पर ईरान क्यों चुप
ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका और इजरायल पार्टी हैं. अमेरिका कह रहा है कि ईरान के साथ डील पर बात चल रही है, मगर ईरान चुप है. चुप तो इजरायल भी है. ट्रंप का ये भी दावा है कि ईरान में सत्ता में बदलाव होगा और ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा. यही तो ईरान अब तक कहता आया है कि उसकी सत्ता पर कौन बैठेगा ये कोई बाहरी तय नहीं करेगा. परमाणु हथियार बनाने की बात तो उसने कभी की ही नहीं. ईरान ने युद्ध में अपने सुप्रीम लीडर को खो दिया. कई बड़े नेता और अधिकारी खो दिए. अब ऐसे में ईरान ऐसी डील क्यों करेगा जिसमें उसके लिए कुछ नहीं हो. कहीं ऐसा तो नहीं ट्रंप ये दावे इसलिए कर रहे हों कि तेल की कीमतें स्थिर रहें या फिर इसलिए कि वो ईरान पर हमले वक्त ले रहे हों. या फिर सही में वो युद्ध के खिलाफ बढ़ते घरेलू दबाव और खर्च के कारण खुद ही ये मैसेज देने के लिए बाध्य हो गए हैं? वहीं ईरान की चुप्पी इस बात की ओर इशारा कर रही है कि वो बैक चैनल चल रही बात को ट्रंप को चिढ़ाकर फिलहाल भड़काना नहीं चाहता?
कहीं ये ट्रंप की चाल तो नहीं?
28 फरवरी पर ईरान पर हमले से पहले अमेरिका एक तरफ तो समुद्र में अपने पोत भेज रहा थी, वहीं दूसरी तरफ बात भी कर रहा था. उस समय किसी तरह की डील की संभावना लगातार जताई जा रही थी, मगर अचानक अमेरिका और इजरायल ने बमबारी कर दी. अब फिर जानकारी मिल रही है कि ईरान की तरफ पांच अमेरिकी युद्धपोत- USS बॉक्सर, USS पोर्टलैंड, USS कॉमस्टॉक, USS न्यू ऑर्लियंस और USS त्रिपोली बढ़ रहे हैं. ये सब कोई मामूली युद्धपोत नहीं हैं. इन युद्धपोतों में तैनात मरीन कमांडो विशेष तरह के ऑपरेशन करने सें सक्षम हैं. ये कमांडो होर्मुज को सुरक्षित कर सकते हैं. ईरानी कब्जे वाले द्वीपों को अपने कब्जे में ले सकते हैं ताकि होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही हो सके. कई रिपोर्ट्स में दावे किए गए हैं कि अमेरिका ईरान की धरती पर अपने सैनिकों को उतार सकता है. अब क्या ट्रंप ऐसे बयान देकर ईरान को एक बार चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं? इस बात में दम इसलिए लगता है क्योंकि ईरान की जमीन पर कोई ऑपरेशन चलाना अमेरिका के लिए इतना आसान नहीं है. ट्रंप सरप्राइज एलीमेंट बनाए रखना चाहते हैं.
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