- कश्मीर के बडगाम में ईरान की मदद के लिए आर्थिक और कीमती सामानों का व्यापक दान अभियान चलाया जा रहा है
- शिया समुदाय भावनात्मक, राजनीतिक और धार्मिक रूप से ईरान के समर्थन में एकजुट होकर दान कर रहा है
- ईद के बाद दान केंद्रों में लोग नकद, सोना, बाइक, ट्रक और मवेशी तक दान करते हुए नजर आए हैं
ईद की छुट्टियों के बाद सोमवार को जब कश्मीर में स्कूल और कॉलेज खुले, तो आफरीन अपने कॉलेज जाने से पहले बडगाम के एक इमामबाड़े में पहुंची. वह ईरान के लोगों की मदद के लिए कुछ योगदान देना चाहती थी, क्योंकि घाटी में इस समय ईरान के लिए बड़े पैमाने पर चंदा इकट्ठा करने का अभियान चल रहा है. 20 साल की आफरीन बताती हैं कि पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण युद्ध के बीच, उसने और उसके परिवार ने ईरान की मदद के लिए नकद पैसे और कुछ कीमती सामान दिए हैं.
जैसे ही इमामबाड़े का बड़ा सा हॉल ईरान के लिए की जा रही दुआओं से गूंज उठता है, वैसे ही समर्थक नकद पैसे, चेक, सोना, चांदी, तांबे के बर्तन, कश्मीरी शॉल और अन्य कीमती सामान लेकर वहां पहुंचने लगते हैं. यह सिर्फ ईरान के लिए आर्थिक मदद ही नहीं है, बल्कि शिया समुदाय इसके जरिए एक मजबूत संदेश भी दे रहा है. वे भावनात्मक, राजनीतिक और आस्था के तौर पर भी पूरी मजबूती से ईरान के साथ खड़े हैं.
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आफरीन कहती हैं, 'जब हम कहते हैं कि हमारी जान 'रहबर' (आयतुल्लाह खामेनेई) पर कुर्बान है, तो उनके मिशन में योगदान देना हमारे लिए एक बहुत छोटा सा कदम है. मेरे पास कुछ नकद बचत थी, जिसे मैंने आज दान कर दिया. मेरी एक सहेली के पास सोना था, और उसने वह भी दान कर दिया.'
दिल्ली स्थित ईरान दूतावास ने X पर कई पोस्ट करके कश्मीर और भारत के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया है.
With sincere appreciation for the support and solidarity of the esteemed people of India in providing humanitarian assistance through the Embassy's bank account, we wish to inform you that, in response to your requests and in order to facilitate the process of aid delivery, this… pic.twitter.com/bzKAkuGpnI
— Iran in India (@Iran_in_India) March 23, 2026
महिलाएं-बच्चे भी कर रहे दान
बडगाम में बने एक संग्रह केंद्र में एक महिला अपने दिवंगत पति की आखिरी निशानी (सोने के गहने) लेकर पहुंची. उसके पति का निधन 28 साल पहले हो गया था. आंखों में आंसू लिए उस महिला ने कहा कि वह आज खुद को रोक नहीं पाई और उसने ईरान की मदद के लिए अपनी सबसे प्यारी निशानी दान कर दी.
हर संग्रह केंद्र पर छोटे-छोटे बच्चे भी दान करते हुए नजर आ रहे हैं. ईद के दिन बच्चों को 'ईदी' मिलती है, जो पैसे और तोहफों का एक प्यारा-सा रिवाज है. ईद के अगले ही दिन, कई बच्चों को अपनी गुल्लकें और मिली हुई 'ईदी' दान करते हुए देखा गया.
Even Kashmiri children are offering their piggy banks as gifts to Iran.
— Iran in India (@Iran_in_India) March 22, 2026
God bless you. pic.twitter.com/OfI6w4rNUb
पिछले दो दिनों में कितना दान इकट्ठा हुआ है, इसका ठीक-ठीक अंदाज़ा लगाने के लिए कोई डेटा उपलब्ध नहीं है. लेकिन यह साफ है कि यह राशि करोड़ों में है, क्योंकि लोग ईरानियों की मदद के लिए अपनी हैसियत के मुताबिक सब कुछ दान कर रहे हैं.
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खामेनेई के नाम पर लोग कर रहे दान
ईरान में चल रहे युद्ध के अलावा, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर ने भी दुनिया भर में उनके अनुयायियों और समर्थकों को झकझोर कर रख दिया है. कश्मीर में, अमेरिका और इजराइल की बमबारी में उनकी हत्या के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे.

शिया मुसलमानों के लिए, आयतुल्लाह 'इमाम गायब' के प्रतिनिधि माने जाते हैं. उनकी मौत से शियाओं ने इमाम, मरजा तकलीद और वली अल फकीह को खो दिया है. इसलिए, ईद के बाद जब संग्रह केंद्र स्थापित किए गए, तो लोग दान देने के लिए उमड़ पड़े. एक व्यक्ति को अपना ट्रक दान करते देखा गया. कई अन्य लोग अपनी बाइक लेकर आए, और कुछ लोग अपने मवेशियों के साथ आए.
दान केंद्र पर सोने के आभूषणों जैसे झुमके, चूड़ियां, सोने के सिक्के और अलग-अलग डिज़ाइनों वाली अनेक अंगूठियों के साथ-साथ भारी मात्रा में नकद राशि और अनगिनत करेंसी नोट भी रखे हुए थे. उनका कहना है कि वे ये सभी दान इस्लाम और अपने मजहब की रक्षा के लिए कर रहे हैं, और उन्हें इस बात का अफसोस है कि किसी भी मुस्लिम देश से ईरान को कोई समर्थन नहीं मिल रहा है.
एजाज हुसैन ने कहा, 'हम ये दान इस्लाम के लिए कर रहे हैं. हमें अपने उस धर्म की रक्षा करनी है, जिस पर इजरायल और अमेरिका ने हमला किया है. दुर्भाग्य से, जब ईरान अपने 'दीन' (धर्म) को बचाने के लिए लड़ रहा है, तब कोई भी मुस्लिम देश उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया है.'
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