मध्य पूर्व में महीनों से जारी भीषण युद्ध के बीच दुनिया ने राहत की सांस ली है. अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक संघर्ष विराम समझौते पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के दस्तखत होने के ठीक बाद अब सबकी नजरें स्विट्जरलैंड पर टिक गई हैं. दोनों देशों के बीच जंग को पूरी तरह रोकने और इस समझौते को जमीन पर उतारने के लिए शुक्रवार (19 जून 2026) को स्विट्जरलैंड के ब्युर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बैठक होने जा रही है.
इस बैठक को इस सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक मुलाकातों में से एक माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर तय करेगी कि मिडिल ईस्ट में शांति का नया दौर शुरू होगा या युद्ध की चिंगारी फिर भड़क उठेगी.
क्या है बैठक का एजेंडा और कौन होगा शामिल?
स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक पुष्टि की है कि ब्युर्गेनस्टॉक के पहाड़ी रिजॉर्ट में होने वाली इस शुरुआती चर्चा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक युद्धविराम समझौते को लागू करने की रूपरेखा तैयार करना है. यह जगह बेहद सुरक्षित है और यहां तक पहुंचना आसान नहीं है, इसी वजह से इसे मध्यस्थों की सहमति से चुना गया है.
डील की बड़ी बातें
यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि इसके ठीक पहले अमेरिका और ईरान ने एक ड्राफ्ट पर सहमति जताई है, जिसके तहत अगले 60 दिनों तक पूरी तरह से सीजफायर लागू रहेगा. इस समझौते के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर लगे नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाने की मंजूरी दे दी है. इसने ईरान तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल और ईंधन बेच सकेगा.
बदले में, ईरान ने दुनिया की सबसे संवेदनशील तेल सप्लाई लाइन यानी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बिना किसी टैक्स के व्यापारिक जहाजों के लिए तुरंत खोलने का वादा किया है. इसके साथ ही, ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने पर भी राजी हुआ है. इसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी करेगी.
भले ही दोनों देशों ने रिमोटली इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हों, लेकिन ब्युर्गेनस्टॉक की यह बैठक दूसरे फेज की शुरुआत है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया है कि यह केवल एक अंतरिम समझौता (MoU) है और यदि ईरान ने शर्तों का उल्लंघन किया, तो अमेरिका दोबारा बमबारी शुरू कर सकता है. वहीं दूसरी तरफ, लेबनान में इजरायल के चल रहे सैन्य अभियानों को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है, जिसे ईरान युद्धविराम का उल्लंघन मान रहा है.
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