विज्ञापन

डील पर साइन फिर स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान की कल होने वाली मीटिंग क्यों है बेहद महत्वपूर्ण?

ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिका-ईरान डील के जरिए टिकाऊ शांति तभी संभव है, जब दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान बना रहे.

डील पर साइन फिर स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान की कल होने वाली मीटिंग क्यों है बेहद महत्वपूर्ण?
US और ईरान ने इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर साइन किए हैं. ये एक 14 पॉइंट फ्रेमवर्क है. इसका मकसद मिडिल ईस्ट में 110 दिनों से चल रहे जंग और तनाव को खत्म करना है.

मध्य पूर्व में महीनों से जारी भीषण युद्ध के बीच दुनिया ने राहत की सांस ली है. अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक संघर्ष विराम समझौते पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के दस्तखत होने के ठीक बाद अब सबकी नजरें स्विट्जरलैंड पर टिक गई हैं. दोनों देशों के बीच जंग को पूरी तरह रोकने और इस समझौते को जमीन पर उतारने के लिए शुक्रवार (19 जून 2026) को स्विट्जरलैंड के ब्युर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बैठक होने जा रही है.

इस बैठक को इस सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक मुलाकातों में से एक माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर तय करेगी कि मिडिल ईस्ट में शांति का नया दौर शुरू होगा या युद्ध की चिंगारी फिर भड़क उठेगी.

क्या है बैठक का एजेंडा और कौन होगा शामिल?

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक पुष्टि की है कि ब्युर्गेनस्टॉक के पहाड़ी रिजॉर्ट में होने वाली इस शुरुआती चर्चा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक युद्धविराम समझौते को लागू करने की रूपरेखा तैयार करना है. यह जगह बेहद सुरक्षित है और यहां तक पहुंचना आसान नहीं है, इसी वजह से इसे मध्यस्थों की सहमति से चुना गया है.

इस बेहद हाई-प्रोफाइल बैठक में ईरान की तरफ से मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत कई आला अधिकारियों के शामिल होने की पूरी उम्मीद है. इसके अलावा, इस पूरी डील को पर्दे के पीछे से मुमकिन बनाने वाले मुख्य मध्यस्थ देश पाकिस्तान और कतर भी इस टेबल पर मौजूद रहेंगे.

डील की बड़ी बातें

यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि इसके ठीक पहले अमेरिका और ईरान ने एक ड्राफ्ट पर सहमति जताई है, जिसके तहत अगले 60 दिनों तक पूरी तरह से सीजफायर लागू रहेगा. इस समझौते के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर लगे नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाने की मंजूरी दे दी है. इसने ईरान तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल और ईंधन बेच सकेगा.

बदले में, ईरान ने दुनिया की सबसे संवेदनशील तेल सप्लाई लाइन यानी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बिना किसी टैक्स के व्यापारिक जहाजों के लिए तुरंत खोलने का वादा किया है. इसके साथ ही, ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने पर भी राजी हुआ है. इसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी करेगी.

भले ही दोनों देशों ने रिमोटली इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हों, लेकिन ब्युर्गेनस्टॉक की यह बैठक दूसरे फेज की शुरुआत है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया है कि यह केवल एक अंतरिम समझौता (MoU) है और यदि ईरान ने शर्तों का उल्लंघन किया, तो अमेरिका दोबारा बमबारी शुरू कर सकता है. वहीं दूसरी तरफ, लेबनान में इजरायल के चल रहे सैन्य अभियानों को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है, जिसे ईरान युद्धविराम का उल्लंघन मान रहा है.

यह भी पढ़ें: ओबामा के समझौते को 'घटिया' बताने वाले ट्रंप का ईरान डील कितना अलग है?

लेखक के बारे में
img
चंदन सिंह राजपूत
Senior Sub Editor
चंदन सिंह राजपूत एनडीटीवी हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर कार्यरत हैं. डिजिटल मीडिया में करीब 5 साल का अनुभव है. एनडीटीवी से पहले बीबीसी हिंदी, क्विंट... और पढ़ें
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Iran Deal, US Iran War 2026
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com