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प्रमोशन, अनुकंपा नियुक्ति, UCC बिल... राजस्थान कैबिनेट का बड़ा फैसला; सीएम ने इन प्रस्तावों को दी मंजूरी

कैबिनेट बैठक में सीएम भजनलाल ने कर्मचारियों के प्रमोशन, अनुकंपा नियुक्ति और पानी की सप्लाई से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है. साथ ही यूसीसी बिल को भी मंजूरी मिल गई है.

प्रमोशन, अनुकंपा नियुक्ति, UCC बिल... राजस्थान कैबिनेट का बड़ा फैसला; सीएम ने इन प्रस्तावों को दी मंजूरी
राजस्थान कैबिनेट का बड़ा फैसला

जयपुर में गुरुवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक आयोजित हुई. UCC बिल, पर्यावरण संरक्षण और पानी की सप्लाई, रोजगार और प्रमोशन से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए हैं. कैबिनेट बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री डॉक्टर प्रेमचंद बेरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, उद्योग राज्य मंत्री के के बिश्नोई और जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने फैसले के बारे में जानकारी दी है. मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि कैबिनेट बैठक में यूसीसी बिल को मंजूरी दे दी गई है. इससे एक देश एक कानून की अवधारणा पूरी होती है.

यूसीसी बिल में क्या-क्या प्रावधान?

यूसीसी बिल में विवाह, तलाक, उत्तराधिकारी, भरण पोषण और लिव इन रिलेशनशिप का प्रावधान है. संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल के अनुसार, आदिवासी, अनुसूचित जनजाति पर ये लागू नहीं होगा. बहु विवाह पर प्रतिबंध रहेगा. विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन जरुरी होगा. पिता को भी उत्तराधिकार बनाया जा सकेगा. लिव इन में हुए बच्चे को अधिकार मिलेंगे. 

इस बिल का उद्देश्य राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को एक समान, पारदर्शी और व्यवस्थित रूप देना है. 

यूसीसी कानून लागू होने के बाद होने वाले सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. लिव-इन संबंधों की शुरुआत और उनके खत्म की लिखित सूचना या पंजीकरण का प्रावधान किया गया है, जिससे दोनों पक्षों के अधिकारों की सुरक्षा हो सकेगी. पंजीकरण न कराने पर 10 हजार रुपए तक और नोटिस मिलने के बाद भी अनदेखी करने पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. 

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कर्मचारियों के प्रमोशन पर बड़ा फैसला

राज्य कर्मचारियों को समय पर प्रमोशन के लिए सरकार की तरफ से पदोन्नति के लिए जरूरी अनुभव में 2 साल की छूट दी गई है. फिर भी, किन्हीं कारणों से कुछ विभागों में कार्मिक इस छूट का लाभ लेने से वंचित रह गए थे. ऐसे काडरों में आवश्यकता अनुसार वांछित अनुभव में छूट देने के संबंध में इस वर्ष बजट में घोषणा की गई थी. कैबिनेट बैठक में आज उन कार्मिकों को वर्ष 2026-27 में पदोन्नति के लिए अनुभव में 2 वर्ष की छूट देने का निर्णय किया गया, जिन्हें वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में यह लाभ मिला था. इसके लिए विभिन्न सेवा नियमों में संशोधन कर 2 वर्ष के सशर्त छूट का प्रावधान किया जाएगा. इस संशोधन से वांछित अनुभव की कमी के कारण रिक्त रहने वाले पदों को भरा जा सकेगा, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा.

अब पुत्र वधू भी होंगी अनुकंपा नियुक्ति की पात्र

मृत सरकारी कर्मचारी की पुत्र वधू भी अनुकम्पा नियुक्ति की पात्र होगी. इसके लिए कैबिनेट ने मृत सरकारी कर्मचारियों के अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पात्र आश्रितों की सूची में 'पुत्र वधू' को भी शामिल करने का निर्णय किया है. इस फैसले से मृतक सरकारी कर्मचारी की पुत्र वधू को अनुकम्पा नियुक्ति मिल सकेगी, जिससे वह परिवार का भरण-पोषण भली-भांति कर सकेगी.  

नौकरी छोड़ने पर ट्रेनिंग खर्च की होगी वसूली

इसके अलावा कैबिनेट बैठक में राजस्थान सेवा नियम, 1951 में 3 संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. यह कदम कर्मचारी कल्याण की भावना से लिया गया है. इस फैसले के बाद अब राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद ट्रेनिंग या ट्रेनिंग पूरी होने से 2 साल की अवधि में नौकरी छोड़ने पर कर्मिकों से केवल ट्रेनिंग का खर्चा वसूला जाएगा. उनसे वेतन-भत्तों की वसूली नहीं की जाएगी. वहीं, राज्य या केंद्र सरकार के विभागों या उपक्रमों में नई नियुक्ति के बाद पद त्याग करने पर ट्रेनिंग के दौरान भुगतान किए गए वेतन-भत्तों के साथ-साथ प्रशिक्षण व्यय की भी कोई वसूली नहीं की जाएगी.

चाइल्ड केयर लीव पर फैसला

इसके अलावा, सिंगल महिला राज्य कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव एक कैलेण्डर वर्ष में 3 के स्थान पर 6 चरणों में स्वीकृत की जा सकेगी. सरोगेसी से मां बनने के मामले में सरोगेट मदर को 180 दिन और कमीशनिंग मदर को 90 दिन का मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाएगा. इससे ये महिला कर्मचारी अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकेंगी. 

ग्रामीण इलाकों में पानी की सप्लाई पर निर्णय

ग्रामीण इलाकों में पानी की सप्लाई के प्रभावी बनाने और निगरानी के लिए ग्राम पंचायत, क्लस्टर समिति, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर एक 5-स्तरीय संस्थागत ढांचा गठित किया जाएगा. स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे के दैनिक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) की होगी, जो लघु सेवा प्रदाय निकाय के रूप में कार्य करेंगी. इन समितियों को तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिए प्रत्येक 5 से 6 ग्राम पंचायतों के समूह पर एक 'क्लस्टर समिति' गठित की जाएगी.

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