- होर्मुज के अहम तेल रास्ते को फिर से खोलने के लिए ईरान और ओमान के बीच नया समझौता अंतिम चरण में है
- ईरान ने बुधवार को कहा है कि ओमान के साथ नए होर्मुज रूट पर सहमति बन गई है.
- लेकिन कोई भी फाइन समझौता इस शर्त पर हो सकता है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाए
तेल व्यापार के लिए दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते को लेकर जल्द बड़ा समझौता होने वाला है. हम बात होर्मुज की कर रहे हैं. महीनों से जंग और तनाव के बीच बंद पड़े होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की कोशिश चल रही है. ईरान ने बुधवार को कहा है कि ओमान के साथ नए होर्मुज रूट पर सहमति बन गई है. समझौते का मसौदा अब आखिरी चरण में है. वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस हफ्ते ही इस समझौते का ऐलान हो सकता है. अगर ऐसा होता है, तो दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हो सकता है और जंग खत्म होने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जाएगा.
या तो ट्रंप झुकेंगे या फिर दोनों देश!
लेकिन यह समझौता इस शर्त पर हो सकता है कि अमेरिका, ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नाकेबंदी हटा ले. ट्रंप प्रशासन पहले ही कह चुका है कि वह ऐसे किसी समझौते के पक्ष में नहीं है, जिससे होर्मुज पर ईरान की पकड़ और मजबूत हो जाए. अमेरिका का मानना है कि ऐसा होना उसके लिए बड़ी हार होगी और दुनिया में अब तक चले आ रहे नियमों के खिलाफ होगा.
ईरान का कहना है कि वह होर्मुज पर किसी न किसी तरह का कंट्रोल अपने पास रखना चाहता है. ईरान ने साफ कहा है कि वह इसे फिर से पहले की तरह पूरी तरह खुला अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता नहीं बनने देगा, जैसा कि जंग से पहले था. यानी अगर यह डील होगी तो या तो डोनाल्ड ट्रंप को अपनी जिद्द से पीछे हटना होगा या फिर अमेरिका और ईरान, दोनों ही अड़ियल रवैया छोड़ते हुए पीछे हटें.
दुनिया के कारोबार में इस्तेमाल होने वाले करीब पांचवें हिस्से का तेल और प्राकृतिक गैस कभी इसी रास्ते से गुजरता था. इस जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल-गैस और रोजमर्रा के सामानों की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल गई है. अमेरिका में संसदीय चुनाव भी करीब हैं, इसलिए डोनाल्ड ट्रंप पर इस अलोकप्रिय जंग को खत्म करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ओमान के साथ समझौते का मसौदा "आखिरी चरण" में है. उन्होंने कहा कि अगर "कुछ पक्ष" इस प्रक्रिया में रुकावट नहीं डालते हैं, तो दोनों देशों का साझा बयान जारी किया जाएगा. माना जा रहा है कि उनका इशारा अमेरिका की ओर था.
न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार बातचीत की जानकारी रखने वाले इन अधिकारियों ने कहा कि यह समझौता फिलहाल सिर्फ एक अस्थायी समाधान है. उनका कहना है कि यह उस समझौते से जुड़ा हुआ है, जो जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ था. उस समझौते का मकसद लड़ाई खत्म करना और समुद्री रास्ते को फिर से खोलना था, लेकिन बाद में वह समझौता टूट गया. अधिकारियों ने कहा कि अगर यह नया समझौता हो जाता है, तो अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत फिर से शुरू हो सकती है.
यह भी पढ़ें: सऊदी अरब क्यों चाहता है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर और हमले न करें?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं