US Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त रुख जाहिर करते हुए कहा है कि अमेरिका तेहरान के साथ वही रणनीति अपना रहा है जो उसने वेनेजुएला में अपनाई थी. लास वेगास में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि हालिया सैन्य दबाव के बाद ईरान बातचीत के लिए आगे आया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता समझौता करना है, युद्ध नहीं. ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा. उनके बयान ने एक बार फिर अमेरिका-ईरान संबंधों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
ईरान को लेकर ट्रंप का सख्त संदेश
लास वेगास में अपने संबोधन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए हुए है, लेकिन वह संघर्ष के बजाय समझौते को प्राथमिकता देता है. ट्रंप ने कहा, "हम वही कर रहे हैं जो हमने वेनेजुएला में किया था. हम उन्हें बुरी तरह कमजोर कर रहे हैं. मैं समझौता करना पसंद करूंगा, क्योंकि मैं लोगों को मरते हुए नहीं देखना चाहता." उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका के पास सैन्य विकल्प मौजूद हैं, लेकिन फिलहाल कूटनीतिक रास्ते खुले रखे गए हैं.
#WATCH | On Iran, US President Donald Trump says, "We are knocking them... I would rather make a deal because I do not want to kill people. We were set for the biggest attack of since World War 2... They called me and said please don't do it, let us talk. Then they said we never… pic.twitter.com/57ZV4PSwLT
— ANI (@ANI) August 5, 2026
"द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला होने वाला था"
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका एक बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर चुका था. उनके अनुसार, "हम द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े हमले के लिए तैयार थे. तभी उन्होंने फोन किया और कहा, कृपया ऐसा मत कीजिए, आइए बातचीत करते हैं." हालांकि ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में ईरान ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी बातचीत से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अब दोनों पक्षों के बीच संपर्क जारी है और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.
परमाणु कार्यक्रम पर दोहराया पुराना रुख
ट्रंप ने अपने संबोधन में फिर कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. उन्होंने कहा, "ईरान अब हमारा सम्मान करता है. किसी भी अन्य राष्ट्रपति ने वह नहीं किया जो बहुत पहले किया जाना चाहिए था, क्योंकि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए." ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका लंबे समय से चिंता जताता रहा है. ट्रंप प्रशासन पहले भी तेहरान पर आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव की नीति अपनाता रहा है.
वेनेजुएला का भी किया जिक्र
अपने भाषण में ट्रंप ने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका वहां अपनी रणनीति में सफल रहा है. उन्होंने कहा कि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है और वर्तमान में अमेरिका उसके साथ बेहतर संबंध बनाए हुए है. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका को वेनेजुएला से तेल आपूर्ति का लाभ मिल रहा है और दोनों देशों के रिश्तों में पहले की तुलना में सुधार हुआ है.
ICE की तारीफ
भाषण के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (ICE) की भी सराहना की. उन्होंने वेनेजुएला के आपराधिक गिरोह Tren de Aragua का उल्लेख करते हुए कहा कि ICE अधिकारियों ने संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां देश की आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
"48 घंटों में तस्वीर साफ हो जाएगी"
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में भी दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच संपर्क में "काफी प्रगति" हुई है. उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने संवाद की इच्छा जताई है और अगले 48 घंटों में स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है. ट्रंप के अनुसार, ईरान के लिए समझौते की राह चुनना सबसे समझदारी भरा कदम होगा. उन्होंने संकेत दिया कि यदि बातचीत सफल रहती है तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है, लेकिन यदि कोई समाधान नहीं निकलता तो अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है.
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