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काठमांडु से 8 घंटे का मुश्किल सफर... मौत और मलबे के बीच नेपाल बाढ़ के 'एपिसेंटर' रसुवा से NDTV की पहली ग्राउंड रिपोर्ट

कभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला रसुवा आज तबाही के गहरे जख्म झेल रहा है. बाढ़ और मलबे ने यहां घरों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया है.

रसुवा पहुंचने वाला NDTV पहला टीवी नेटवर्क है.
IANS
रसुवा:

नेपाल में आई विनाशकारी जल-प्रलय और भूस्खलन के बाद हालात बेहद दिल दहला देने वाले हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में एक रसुवा जिला इस पूरी त्रासदी का मुख्य केंद्र रहा है. कभी सैलानियों से गुलजार रहने वाला यह खूबसूरत इलाका आज तबाही के गहरे जख्म झेल रहा है. चारों तरफ सिर्फ मलबे का ढेर, ध्वस्त घर, बह चुकी सड़कें और टूटे हुए पुल दिखाई दे रहे हैं.

तबाही के इस मंजर और जमीनी हकीकत को दुनिया के सामने लाने के लिए NDTV की टीम काठमांडु से 8 घंटे का बेहद खतरनाक और मुश्किल सफर तय करके रसुवा पहुंची है. रसुवा पहुंचने वाला NDTV पहला टीवी नेटवर्क है. काठमांडू से रसुवा को जोड़ने वाली मुख्य पक्की सड़क महाप्रलय की तेज धार में पूरी तरह बह गई है. ऐसे में राहत दलों और हमारी टीम को बेहद मुश्किल भरे, संकरे और कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ा.

एनडीटीवी की टीम टूटे, कच्चे रास्तों के सहारे रसुवा पहुंची है.

एनडीटीवी की टीम टूटे, कच्चे रास्तों के सहारे रसुवा पहुंची है.
Photo Credit: NDTV

हर तरफ सिर्फ मौत की चीख, जहां देखो मलबा ही मलबा

रसुवा के त्रिशूली बाजार और आसपास के इलाकों में नदी का पानी 60 से 70 फीट ऊपर तक उठ गया था. पानी के इस भयंकर उफान ने नदी किनारे बसे पूरे के पूरे बाजार, स्कूल, कॉलेज और रिहायशी बस्तियों को एक ही झटके में निगल लिया. जो इमारतें सैलाब को सह गईं, वे जर्जर खड़ी हैं और जो नहीं सह पाईं, वे मलबे में तब्दील हो चुकी हैं. दो-दो मंजिल ऊंचे मकानों के ऊपर तक गाद भर चुकी है.

लोग अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं. कई ऐसे परिवार हैं जिनके घरों में त्रासदी के बाद से चूल्हा तक नहीं जला है. नेपाली सेना, पुलिस और APF के जवान जान जोखिम में डालकर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं, लेकिन भारी दलदल और मलबे के कारण गाड़ियों और पैदल चलने में भी भारी दिक्कत आ रही है.

धाडिंग और नुवाकोट में भी हाहाकार, जिंदगी की जंग लड़ रहे लोग

तबाही का असर सिर्फ रसुवा तक सीमित नहीं है. धाडिंग जिले के गल्छी इलाके में काठमांडू हाईवे पर जमा सिल्ट को JCB की मदद से हटाया जा रहा है. हाईवे पर जगह-जगह गाड़ियां, पेट्रोल पंप और दुकानें मलबे में धंसी हैं. स्थानीय लोगों के पास न तो पहनने को सूखे कपड़े बचे हैं और न ही खाने-पीने का सामान. बिजली गुल होने की वजह से पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूबा है. 

नुवाकोट के विदुर्ग में स्थित एक स्कूल को अब बेघर हुए परिवारों के लिए राहत शिविर बनाया गया है. यहां बाढ़ से बचाए गए मासूम बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग रहने को मजबूर हैं. स्थानीय लोग अपनी तरफ से कपड़े, सूखा राशन और दवाइयां बांटकर पीड़ितों की मदद कर रहे हैं.

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