बिहार में बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन पानी घटने के साथ नुकसान की असली तस्वीर सामने आने लगी है. करीब 50 लाख लोगों को प्रभावित करने वाली इस बाढ़ ने खेतों से लेकर घरों, सड़कों, पुलों और बांधों तक को नुकसान पहुंचाया है. राज्य सरकार के शुरुआती आकलन के मुताबिक बाढ़ से करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. हालांकि यह अंतिम आंकड़ा नहीं है. पानी पूरी तरह उतरने के बाद अलग-अलग विभाग जमीन पर जाकर नुकसान का सर्वे करेंगे और 15 अक्टूबर के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार होने की उम्मीद है. ऐसे में नुकसान का आंकड़ा 10 हजार करोड़ रुपये से भी ऊपर जा सकता है.
शुरुआती आकलन में 1.5 लाख हेक्टेयर में फसल प्रभावित
बाढ़ से सबसे बड़ा नुकसान खेती को हुआ है. कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के मुताबिक करीब 1.5 लाख हेक्टेयर में फसल प्रभावित हुई है. धान और मक्का के साथ सब्जियों और केले की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है. कई इलाकों में खेत 10 दिन से ज्यादा समय तक पानी में डूबे रहे. खासकर वैशाली, भागलपुर, मुंगेर, नवगछिया और दूसरे बाढ़ प्रभावित इलाकों में किसानों को काफी नुकसान हुआ है.

कृषि मंत्री संग सीएम ने लिया जायजा, मदद मिलेगी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने दौरे के दौरान खेतों में जाकर किसानों से नुकसान की जानकारी ली. खेती के नुकसान का मतलब सिर्फ इस साल की फसल का नुकसान नहीं है. किसानों के सामने अगली फसल की तैयारी की भी चुनौती है. खेतों से पानी निकलने के बाद उन्हें बीज, खाद और दूसरी जरूरतों के लिए पैसे चाहिए होंगे. सरकार ने फसल नुकसान के आधार पर मदद देने की बात कही है.
फसल खराब होने पर कैसे मिलती है मुआवजा?
मौजूदा व्यवस्था के तहत असिंचित जमीन पर फसल खराब होने पर 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित जमीन पर 17 हजार रुपये और गन्ने के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की इनपुट सहायता का प्रावधान है. अधिकतम दो हेक्टेयर तक सहायता दी जाती है. प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक फसल के लिए मटर और सरसों के बीज देने की तैयारी भी की जा रही है.
सड़क सहित बुनियादी सुविधाओं को भी बड़ा नुकसान
नुकसान का दूसरा बड़ा हिस्सा सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का है. बाढ़ के पानी ने कई ग्रामीण सड़कों को नुकसान पहुंचाया और कई जगह संपर्क टूट गया. पानी उतरने के बाद सड़क निर्माण, ग्रामीण कार्य, पंचायती राज और दूसरे विभाग अलग-अलग सर्वे करेंगे. पुल-पुलिया, बिजली, पेयजल और सरकारी भवनों को हुए नुकसान का पूरा हिसाब भी इसी सर्वे के बाद सामने आएगा. अभी इन सभी क्षेत्रों के नुकसान का अलग-अलग रुपये में आंकड़ा जारी नहीं हुआ है, लेकिन इन विभागों का नुकसान 10 हजार करोड़ रुपये के शुरुआती कुल अनुमान में शामिल है.

भागलपुर, पटना, वाल्मिकीनगर में कमजोर हुआ बांध
बांध और तटबंध भी इस बाढ़ में कमजोर हुए हैं. भागलपुर के राघोपुर में मार्जिनल बांध के दोबारा निर्माण की जरूरत बताई गई है. वाल्मीकिनगर बराज के पास बिहार की तरफ का एक बांध भी कमजोर हुआ है. पटना में पुनपुन नदी के किनारे कई जगह छोटे तटबंध टूटे और कुछ जगह पानी तटबंध के ऊपर से बहा. सरकार ने अगले मानसून से पहले ऐसे तटबंधों की मरम्मत और जरूरत के हिसाब से उनकी ऊंचाई बढ़ाने की तैयारी की है. आबादी के करीब वाले कमजोर तटबंधों की विशेष मरम्मत भी की जाएगी.
लोगों के घर और निजी संपत्ति के नुकसान की पूरी तस्वीर आनी अभी बाकी
घर और लोगों की निजी संपत्ति को हुए नुकसान की पूरी तस्वीर भी अभी सामने आनी बाकी है. कई गांवों में घरों में पानी घुसा, कच्चे मकान और दूसरी संरचनाएं प्रभावित हुईं. पानी निकलने के बाद जिला स्तर पर घरों और दूसरी संपत्तियों का सर्वे किया जाएगा. इसी तरह स्वास्थ्य, पशुपालन, मछली पालन, शिक्षा और पेयजल पर पड़े असर का भी अलग-अलग आकलन किया जा रहा है. राज्य सरकार की शुरुआती रिपोर्ट में जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, आपदा प्रबंधन, डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन जैसे विभागों ने अपना प्रारंभिक आकलन केंद्र की टीम के सामने रखा है.
अभी प्रभावित परिवारों को दी जा रही 7-7 हजार रुपए की मदद
शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण और ग्रामीण कार्य विभाग का विस्तृत आकलन पानी उतरने के बाद होगा. राहत के स्तर पर सरकार ने प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद भी शुरू की है. सत्यापित बाढ़ प्रभावित परिवारों को 7-7 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है. लेकिन यह तत्काल राहत है, जबकि आगे की जरूरत कहीं बड़ी है. किसानों को फिर से खेती के लिए मदद चाहिए, जिनके घर टूटे हैं उन्हें मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत होगी और सड़कों व तटबंधों को अगले मानसून से पहले ठीक करना होगा.
10 हजार करोड़ के नुकान का आंकड़ा शुरुआती
यही वजह है कि 10 हजार करोड़ रुपये का शुरुआती नुकसान सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि आने वाले महीनों में बिहार के सामने खड़ी बड़ी आर्थिक चुनौती का संकेत है. अभी इसका कोई ऐसा अंतिम विभागवार ब्रेकअप नहीं है जिसमें बताया गया हो कि खेती में कितने करोड़, सड़कों में कितने करोड़, घरों में कितने करोड़ और बांधों में कितने करोड़ का नुकसान हुआ.

50 लाख प्रभावित लोगों की जीवन पटरी पर लाना असली चुनौती
इसलिए बिहार में बाढ़ की कहानी पानी उतरने के साथ खत्म नहीं हो रही है. अब असली परीक्षा पुनर्वास की है. करीब 50 लाख प्रभावित लोगों को सामान्य जिंदगी में वापस लाना, किसानों को अगली फसल के लिए तैयार करना, टूटे घरों और सड़कों को ठीक करना और कमजोर तटबंधों को मजबूत करना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी.
10 हजार करोड़ रुपये का शुरुआती नुकसान कितना बढ़ता है और केंद्र व राज्य मिलकर इसकी भरपाई कैसे करते हैं, इसकी तस्वीर अगले कुछ हफ्तों में सामने आएगी. अभी इतना साफ है कि इस बार बिहार को सिर्फ राहत नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर पुनर्वास और पुनर्निर्माण की जरूरत है.
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