- शारजाह से कराची जा रहे जहाज को ईरानी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट पार नहीं करने दिया और वापस लौटा दिया
- ईरानी कमांडर ने बताया कि जहाज ने कानूनी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया. उसके पास दस्तावेज भी नहीं थे
- ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पाकिस्तान ईरान से दोस्ती का हवाला देकर मध्यस्थता के लिए सक्रिय है
पश्चिम एशिया की जंग रुकवाने में खुद को कथित शांतिदूत की तरह पेश करने वाले पाकिस्तान को ईरान ने ही तगड़ा झटका दिया है. पाकिस्तान एक तरफ मध्यस्थता की गोटियां फिट कर रहा था, वहीं ईरानी सेना ने कराची जा रहे जहाज को होर्मुज पार करने नहीं दिया और उलटा लौटा दिया. बताया जा रहा है कि इस जहाज में खाने का सामान भरा हुआ था.
UAE से खाने का सामान ला रहा था जहाज
SELEN नाम का ये जहाज संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह से आया था. इस पर सेंट किट्स और नेविस का झंडा लगा था. ये फारस की खाड़ी से होर्मुज स्ट्रेट पार करके पाकिस्तान के कराची की तरफ बढ़ रहा था. इसमें फूड आइटम्स थे. लेकिन ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने उसे रास्ते में ही रोक लिया. सिर्फ रोका ही नहीं, अनुमति न होने की बात कहकर उसे वापस लौटने पर भी मजबूर कर दिया.
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IRGC कमांडर ने बताई रोकने की वजह
IRGC के नेवी कमांडर अलीरेजा तंगसीरी ने सोशल मीडिया पोस्ट में वो वजह भी बताई कि पाकिस्तान जा रहे जहाज को क्यों रोका गया. कमांडर ने कहा कि जहाज ने कानूनी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया था. उसके पास होर्मुज से गुजरने के लिए आवश्यक दस्तावेज भी नहीं थे. ईरानी कमांडर ने साफ कहा कि ईरान की समुद्री अथॉरिटी की मंजूरी के बिना होर्मुज से कोई जहाज नहीं गुजर सकता.
'दुश्मन' देशों को छोड़ सबके लिए खुला है होर्मुज
अमेरिका-इजरायल के हमला शुरू करने के बाद से ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी कर दी है और जहाजों की आवाजाही रोक दी है. दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 20 फीसदी ट्रांसपोर्ट इसी रास्ते से होकर आता-जाता है. ईरान की पाबंदियों की वजह से टैंकरों की आवाजाही काफी हद तक ठप है. हालांकि ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका, इजरायल और उसके समर्थक व शत्रु देशों को छोड़कर बाकी किसी देश के जहाज को नहीं रोक रहा है.
अमेरिका-ईरान में सुलह के लिए सक्रिय
कराची जा रहे जहाज को ईरान द्वारा रोकना इसलिए भी चौंकाता है, क्योंकि पाकिस्तान के ईरान से अच्छे संबंध माने जाते हैं. इन्हीं संबंधों की दुहाई देकर पाकिस्तान खुद को ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में मध्यस्थता बैठक की मेजबानी की पेशकश भी कर दी है. हालांकि पहले ट्रंप और फिर ईरान ने जंग रोकने के लिए बेहद कड़ी शर्तें रख दी हैं.
होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई रुकने से पाकिस्तान की खस्ता हालत और भी खराब हो गई है. उसके लिए यह स्थिति अधिक चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि वह पहले ही ईंधन की कमी और अफगानिस्तान के साथ संघर्ष का खामियाजा भुगत रहा है.
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