अमेरिका और ईरान के बीच शांति डील होने से पहले ही इजरायल से आए एक बयान ने खतरे की घंटी बजा दी है. इजरायल के रक्षा मंत्री ने सोमवार, 15 जून को कहा कि इजरायल लेबनान में अपने कब्जे वाले इलाकों से पीछे नहीं हटेगा. उनका यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते (MoU) के ऐलान के कुछ घंटों बाद आया है, जिसमें होर्मुज को खोलने और पूरे मिडिल ईस्ट में पहले से लागू नाजुक युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ाने की बात शामिल है.
वैसे तो समझौते की पूरी जानकारी अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन ईरानी मिडिया के अनुसार इसमें पूरे मिडिल ईस्ट में सीजफायर करने की शर्त शामिल है. तेहरान ने भी ने संकेत दिया है कि इस समझौते पर अमल तब तक शुरू नहीं होगा, जब तक इस पर आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते. इस समझौते के सामने पहले से ही कई चुनौतियां दिखाई दे रही हैं और अब इजरायली रक्षा मंत्री के बयान ने स्थिति और गंभीर कर दी है.
इजरायल की तरफ से क्या कहा गया?
समझौते की घोषणा के बाद इजरायल की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि जब तक अंतरिम समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक इजरायल लेबनान में कब्जे वाले इलाकों से पीछे नहीं हटेगा. काट्ज ने साफ-साफ कहा कि इजरायल लेबनान, सीरिया और गाजा पट्टी में अपने कब्जे वाले इलाकों में "अनिश्चित समय" तक बना रहेगा.
वहीं, ईरान पहले ही कह चुका है कि इस अंतरिम समझौते का एक अहम हिस्सा लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायल के हमलों का रुकना है. काट्ज ने ईरान को चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि अगर लेबनान में इजरायली हमलों के जवाब में ईरान इजरायल पर हमला करता है, तो इजरायल "पूरी ताकत" से ईरान पर जवाबी हमला करेगा.
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