सुप्रीम कोर्ट बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री के तौर पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को सुनेगा. शीर्ष अदालत ने इस बारे में बिहार सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा.. क्या वो अभी भी मंत्री पद पर हैं? याचिकाकर्ता ने इसके बाद बताया कि हां, अभी भी हैं. इसके बाद सर्वोच्च अदालत ने नोटिस जारी कर दिया.
याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं. याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 164 (4) के तहत गैर-विधायक को मंत्री पद पर बने रहने के लिए मिली 6 महीने की छूट केवल एक बार के लिए होती है. गौरतलब है कि दीपक की पहली नियुक्ति की तारीख 20 नवंबर 2025 थी.
इस लिहाज से दीपक के मंत्री पद बने रहने के लिए विधायक/विधान परिषद सदस्य बनने की 6 महीने की अवधि 20 मई 2026 को समाप्त हो गई है. ऐसे में दोबारा नियुक्ति करके उन्हें अतिरिक्त समय देने की कोशिश की गई है.
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अनुच्छेद 164(4) का प्रावधान संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक जवाबदेही को दरकिनार करने के लिए नहीं है. याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह प्रावधान केवल अस्थायी व्यवस्था है, जिसका दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए.
याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की नियुक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि इससे संवैधानिक शासन, संसदीय लोकतंत्र, मंत्रिपरिषद की जवाबदेही और कार्यपालिका की शक्तियों की संवैधानिक सीमाओं जैसे व्यापक मुद्दे जुड़े हुए हैं. याचिकाकर्ता ने अदालत से इस पर तत्काल सुनवाई करने और अंतरिम आदेश जारी करने की अपील की है.
संविधान के अनुच्छेद 164(4) में प्रावधान है कि कोई व्यक्ति जो विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, उसे मंत्री बनाए जाने के छह महीने के अंदर सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है. यदि वह सदस्य नहीं बन पाता, तो उसे पद छोड़ना पड़ता है. याचिका में दावा किया गया है कि दीपक प्रकाश इस प्रावधान का उल्लंघन कर लगातार मंत्री पद पर बने हुए हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं