- महायुति के लगभग 150 नगरसेवकों के रहने का इंतजाम अलग-अलग जगहों पर किया जा रहा है.
- भिवंडी के इस रिसॉर्ट में कमरों का किराया 5,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये प्रति दिन तक है.
- इस चुनाव में कुल 619 मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 450 मतदाताओं के साथ महायुति के पास पहले से ही स्पष्ट बहुमत है.
महाराष्ट्र के नासिक में हो रहे स्थानीय MLC चुनाव को लेकर पूरे सियासी गलियारों में भारी चर्चा है. इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों गोकुल गिते और प्रसाद हीरे के चुनाव प्रचार बंद करने के बाद अब मैदान में तकनीकी रूप से केवल महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार शिवसेना के नरेंद्र दराडे ही बचे हैं. महायुति के पास पूर्ण बहुमत होने के बावजूद किसी भी तरह के उलटफेर या धोखे से बचने के लिए खास सावधानी बरती जा रही है. नगरसेवकों को ठाणे के एक होटल में शिफ्ट कर दिया गया है. ठाणे ज़िला के भिवंडी अंजूर गांव में स्थित इस होटल में नासिक के करीब 20 से 22 नगरसेवक कल पहुंचे हैं.
150 नगरसेवकों के रहने का किया गया इंतजाम
खुद शिवसेना नेता और सांसद नरेश म्हस्के के साथ-साथ ठाणे-पालघर स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के लिए निर्विरोध चुने गए रवींद्र फाटक ने भी इस होटल का दौरा किया है और नगरसेवकों से मुलाकात की है. सूत्रों के मुताबिक, महायुति के लगभग 150 नगरसेवकों के रहने का इंतजाम अलग-अलग जगहों पर किया जा रहा है. भिवंडी के इस रिसॉर्ट में कमरों का किराया 5,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये प्रति दिन तक है. चर्चा है कि ये नगरसेवक यहाँ कम से कम 4 दिन रुकने वाले हैं
बहुमत के बाद भी महायुति में भय क्यों?
नामांकन वापस लेने का समय बीत जाने के बाद दोनों निर्दलीयों ने प्रचार रोका है, इसलिए बैलेट पेपर पर उनका नाम और चुनाव चिह्न कायम रहेगा. निर्दलीय गोकुल गिते ने प्रचार तो रोक दिया है, लेकिन महायुति उम्मीदवार दराडे को आधिकारिक तौर पर अपना समर्थन नहीं दिया है. इस चुनाव में पार्टियों द्वारा आधिकारिक व्हिप जारी करने का प्रावधान नहीं होता है. सभी मतदाता अपनी मर्जी से वोट करने के लिए स्वतंत्र होते हैं. ऐसे में ऐन वक्त पर किसी अंदरूनी नाराजगी का फायदा उठाकर वोट कटने न पाएं, इसीलिए महायुति “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” का सहारा ले रही है.
कुल 619 मतदाता में से महायुति के पास 450 का संख्याबल
इस चुनाव में कुल 619 मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 450 मतदाताओं के साथ महायुति के पास पहले से ही स्पष्ट बहुमत है.शिवसेना के सभी नगरसेवक जो MLC चुनाव में मतदाता होंगे ठाणे के होटल में पहुंच चुके हैं, जबकि एनसीपी और बीजेपी के नगरसेवक भी पहुँचेंगे
इन सभी जनप्रतिनिधियों को सीधे वोटिंग के दिन यानी 18 जून को नाशिक लाया जाएगा.चूंकि विधान परिषद चुनाव में 'पसंद क्रम' के आधार पर जटिल मतदान पद्धति होती है, इसलिए होटल में पार्षदों के लिए वर्कशॉप आयोजित की जा रही है.
होटल में वर्कशॉप क्यों?
विधान परिषद चुनाव में मतदाता किसी एक उम्मीदवार को वोट नहीं देता, बल्कि बैलेट पेपर पर मौजूद सभी उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार रैंक देता है. इसमें जीत के लिए सिर्फ सबसे ज़्यादा वोट पाना काफी नहीं होता. उम्मीदवारों को जीत का एक निश्चित आंकड़ा छूना पड़ता है.
अगर पहली पसंद के वोटों से कोई नहीं जीतता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को रेस से बाहर कर दिया जाता है और उसे मिले वोटों को वोटर्स की 'दूसरी पसंद' के आधार पर बाकी उम्मीदवारों में बांट दिया जाता है. यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई जीत का आंकड़ा पार न कर ले.
इसीलिए महायुति अपने नए नगरसेवकों को होटल में इसकी ट्रेनिंग दे रही है ताकि कोई वोट खराब न हो.शिवसेना नेता विलास शिंदे के मुताबिक, महायुति के कई सदस्य नए हैं, जिन्हें इस वोटिंग सिस्टम को समझाने के लिए स्टडी क्लास की जरूरत है.
महायुति के प्रमुख मंत्री गिरीश महाजन, दादा भुसे और उदय सामंत होटल में लगातार नगरसेवकों की बैठकें ले रहे हैं. वहीं, वोटिंग से ठीक एक दिन पहले 17 जून को मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री खुद इन मतदाताओं को विशेष मार्गदर्शन दे सकते हैं.
उम्मीदवार किस पार्टी का? बगावत किसने की?
महायुति सत्तारूढ़ गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराडे हैं, जो शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट के नेता हैं. महायुति गठबंधन में यह सीट शिवसेना (शिंदे गुट) के खाते में गई और नरेंद्र दराडे को टिकट मिला. इससे नाराज होकर बीजेपी के गोकुल गिते, प्रसाद हीरे इन दोनों नेताओं ने महायुती के खिलाफ ही बगावत कर दी और निर्दलीय नामांकन दाखिल कर मैदान में उतर गए, जिससे आधिकारिक उम्मीदवार की मुश्किलें बढ़ गईं.
यह चुनाव महायुति के लिए साख का सवाल बन गया था. दोनों बागी उम्मीदवार किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं थे. मामला सुलझाने के लिए महायुति के तीन-तीन मंत्रियों—गिरीश महाजन, उदय सामंत और दादा भुसे ने नासिक के कई चक्कर लगाए. यहां तक कि बात मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तक पहुंचीं. आखिरकार, नाम वापसी की आधिकारिक समय-सीमा खत्म होने के बाद मंत्रियों की मध्यस्थता और मान-मनौव्वल के चलते दोनों बागी नेताओं का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने पीछे हटने का फैसला किया.
हालांकि इन्होंने नामांकन वापस न लेकर अचानक प्रचार बंद किया. तकनीकी रूप से नाम वापस लेने की आखिरी तारीख बीत चुकी थी, इसलिए कानूनी तौर पर दोनों के नाम और चुनाव चिह्न बैलेट पेपर पर प्रिंट रहेंगे. उन्होंने केवल प्रचार रोकने का ऐलान किया है.
गोकुल गिते ने प्रचार रोक दिया है, लेकिन उन्होंने अभी तक दराडे को आधिकारिक समर्थन देने की घोषणा नहीं की है. महायुति को डर है कि अगर किसी नगरसेवक के मन में अंदरूनी नाराजगी या असंतोष हुआ, तो वह मतपत्र पर मौजूद गोकुल गिते या प्रसाद हीरे के नाम के आगे अपनी पसंद का नंबर लिख सकता है, जिससे महायुती के आधिकारिक वोट कट सकते हैं. इसी उलटफेर को रोकने के लिए महायुति ने अपने पार्षदों को ठाणे के होटल में सुरक्षित रखा है.
इनपुटः भिवंडी स्ट्रिंगर - भूपेंद्र अम्बावने
नासिक रिपोर्टर - प्रांजल कुलकर्णी
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