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मिडिल ईस्ट में शांति की कीमत क्या? जंग खत्म करने के लिए ईरान ने रखीं ये 6 शर्तें

Iran-Israel War: ट्रंप ने ईरान के सामने जो भी प्रस्ताव रखा, ईरान ने उसके उलट शर्तें अमेरिका के सामने रख दी हैं. अब ये बड़ा सवाल है कि क्या ट्रंप युद्ध खत्म करने और शांति बहाली के लिए ईरान को ये सब देने के लिए राजी होंगे.

मिडिल ईस्ट में शांति की कीमत क्या? जंग खत्म करने के लिए ईरान ने रखीं ये 6 शर्तें
अमेरिका से ईरान की मांगें.
  • ईरान ने अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने के लिए प्रमुख मांगें रखी हैं जिनमें सैन्य हमलों पर रोक भी शामिल है
  • ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना पूरा अधिकार और नियंत्रण बनाए रखने की शर्त रखी है
  • युद्ध में हुए नुकसान की पूरी भरपाई के साथ अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हटाने की मांग भी ईरान ने की है
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नई दिल्ली:

ईरान-इजरायल युद्ध के बीच बातचीत की राह आसान नहीं दिख रही. ट्रंप ने ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा था. ट्रंप चाहते थे कि ईरान उनकी ये शर्तें मान ले और जंग को खत्म कर दिया जाए. लेकिन ईरान इतनी आसानी से कहां मानने वाला है. ट्रंप की मांगें वह तब मानेगा, जब इसमें उसका भी फायदा होगा. अब ईरान की डिमांड लिस्ट भी सामने आ गई है. उसने भी ट्रंप के सामने अपनी मांगें रख दी हैं. सवाल यही है कि क्या अमेरिका ईरान की मुंहमांगी चीजें उसे देगा. बातचीत वैसे ही डायरेक्ट नहीं हो रही. मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा है. कहीं ईरान की मांगे शांति वार्ता की राह में रोड़ा न बन जाएं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के सामने ये मुख्य मांगें रखी हैं.

ईरान की चार  प्रमुख मांगें

  • भविष्य में कोई सैन्य हमला नहीं
  • युद्ध के नुकसान की पूरी भरपाई
  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा कंट्रोल
  • बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई भी प्रतिबंध नहीं
  • प्रतिबंधों की वापसी
  • खाड़ी क्षेत्रों में अमेरिका के सभी सैन्य बेस बंद हों

ईरान ने अमेरिका से क्या मांग लिया?

28 फरवरी को शुरू हुई जंग के बाद ये तो साफ है कि ईरान ऐसे ही अमेरिका और इजरायल पर यकीन करने की गलती तो नहीं करेगा. तभी उसने दोनों से लिखित गारंटी मांगी है कि वे भविष्य में कभी ईरान पर सैन्य कार्रवाई या हमले नहीं करेंगे. ईरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों और मिलिशियाओं, खासकर लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली हमलों को खत्म करने की मांग कर रहा है.

ईरान की दूसरी मांग भी इतनी आसान नहीं है. इस जंग में ईरान का बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है. जान के नुकसान के साथ ही माल का भी जमकर नुकसान हुआ है. अब ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों से मांग की है कि युद्ध में हुए जान और माल की पूरी भरपाई की जाए. 

जिस होर्मुज स्ट्रेट की वजह से दुनियाभर में हाहाकरा मचा है. तेल और गैस का संकट खड़ा हो गया है. ट्रंप खुद भी इसकी तपिश महसूस कर रहे हैं. उस होर्मुज से ईरान अपना कंट्रोल छोड़ने के बारे में तो सोच भी नहीं सकता. अब ईरान ने मांग रखी है कि होर्मज जलडमरूमध्य पर उसका पूरा ऑफिशियली कंट्रोल रहे. मांग सिर्फ इतनी नहीं है. ईरान ये भी चाहता है कि इस रास्ते पर अमेरिका और इजरायल के जहाजों को लेकर सख्त शर्तें लागू की जाएं. 

ईरान की अमेरिका से मांग ये भी है कि उनके बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई जाएगी. जबकि ट्रंप के शांति प्रस्ताव में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर प्रतिबंध की बात कही गई है. लेकिन ईरान ने इसके उलट शर्तें रखी हैं. 

ईरान ये भी चाहता है कि खाड़ी क्षेत्रों में अमेरिका के सभी सैन्य बेस बंद कर दिए जाएं. बता दें कि ईरान खाड़ी देशों पर इसीलिए हमला कर रहा है क्यों कि वहां पर अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं. ऐसे में ये मांग भी आसान नहीं दिखती. 

ईरानी सरकार की मांग ये भी है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाया जाए. 

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क्या ईरान की शर्तें मानेंगे ट्रंप?

ट्रंप ने ईरान के सामने जो भी प्रस्ताव रखा, ईरान ने उसके उलट शर्तें अमेरिका के सामने शांति बहाली के लिए रख दी हैं. अब ये बड़ा सवाल है कि क्या ट्रंप युद्ध खत्म करने और शांति बहाली के लिए ईरान को ये सब देने के लिए राजी हो जाएंगे. वैसे ये इतना आसान नहीं लगता. कहीं ईरान की ये शर्तें शांति बहाली की कोशिशों के बीच रोड़ा न बन जाएं. 
 

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