विज्ञापन

ग्रीनलैंड पर ट्रंप की जबरदस्ती NATO को हमेशा के लिए खत्म कर देगी?  

Donald Trump's Greenland Obsession: यदि एक नाटो देश ही दूसरे नाटो देश पर हमला करेगा तो फिर इसका वजूद कैसे बचेगा?

ग्रीनलैंड पर ट्रंप की जबरदस्ती NATO को हमेशा के लिए खत्म कर देगी?  
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर नाटो को कमजोर करने का आरोप

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की ऐसी जिद्द पाल ली है कि वो अपने दोस्तों को ही दुश्मन बनाते जा रहे हैं. जिन पश्चिमी देशों ने रूस से रक्षा के लिए नाटो सैन्य संगठन बनाया था, आज वो गुट ही अंदर से खोखला दिख रहा है. अमेरिका की जिद्द के सामने उसके वजूद पर ही सवालिया निशान लग रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड पर अपनी सनक का विरोध करते नाटो सहयोगियों पर ही टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है. इसे नाटो के लिए उसके इतिहास का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है. चलिए समझते हैं कि ट्रंप ने नाटो के वजूद को चुनौती कैसे दे दी है.

ट्रंप की ग्रीनलैंड वाली जिद्द और नाटो का सबसे बड़ा वादा

पहले तो जान लीजिए की ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्धस्वायत्त क्षेत्र है. ग्रीनलैंड में साल 1979 से व्यापक स्वशासन है, हालांकि रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के हाथों में है. इसीलिए ग्रीनलैंड को डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त हिस्सा माना जाता है. ग्रीनलैंड और डेनमार्क में बैठी दोनों जगह की सरकारों ने साफ-साफ कह दिया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है लेकिन ट्रंप और उनकी सरकार मान नहीं रही है.

अब समझते हैं नाटो को. नाटो (NATO) या 'उत्तर अटलांटिक संधि संगठन' 32 सदस्य देशों का एक सैन्य और राजनीतिक गठबंधन है. इसमें अमेरिका से लेकर यूरोप के तमाम बड़े देश शामिल हैं. इसमें डेनमार्क भी शामिल है, जिसके अंदर ग्रीनलैंड आता है. इस नाटो को बनाने का मुख्य उद्देश्य ही था कि अपने सदस्य देशों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की रक्षा करना. यदि किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है और सभी मिलकर उसका मुकाबला करते हैं. यह इसके अनुच्छेद 5 के तहत आता है.

अब ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ही डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संभप्रुता पर हमला कर रहा है. ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य हमले की संभावना को भी खारिज नहीं किया है. यदि एक नाटो देश ही दूसरे नाटो देश पर हमला करेगा तो फिर इसका वजूद कैसे बचेगा. 

यहां इस बात पर गौर करना भी जरूरी है कि ट्रंप का दावा है कि रूस और चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर सकते हैं और इसलिए अमेरिका अपने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उसे खुद में मिलाना चाहता है. अब सवाल है कि किसी नाटो देश को रूस और चीन के ऐसे हमलों से बचाने के लिए ही तो नाटो बनाया गया था. अब दोस्त पर दूसरे के हमले को रोकने के लिए खुद अपने दोस्त पर हमला कर देना कहां तक जायज है?

नाटो देशों में टैरिफ वॉर शुरू?

ट्रंप ने शनिवार को ग्रीनलैंड के लिए अपनी आक्रामक मांगों को तेज करते हुए पूरे NATO को स्तब्ध कर दिया. उन्होंने विदेश नीति में टैरिफ के उपयोग को चरम सीमा पर पहुंचा दिया. उन्होंने शनिवार को कहा कि वह ग्रीनलैंड पर उनके स्टैंड को विरोध करने वाले देशों पर टैरिफ लगाएंगे. 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड के "किसी भी और सभी सामान" पर 10% टैरिफ लगाएंगे, जो 1 जून को बढ़कर 25% हो जाएगा, जब तक कि कोई समझौता नहीं हो जाता.

अब यूरोपीय देश भी अमेरिका को जवाब देने का मन बना चुके हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर टैरिफ लगाने की धमकी देने के बाद यूरोपीय संघ 93 अरब यूरो तक का शुल्क वॉशिंगटन पर लगा सकता है या अमेरिकी कंपनियों को अपने बाजार में काम करने से रोक सकता है. यह जानकारी फाइनेंशियल टाइम्स ने दी है.

नाटो में ऐसी फूट कभी नहीं थी

नाटो को अपने लगभग 77 वर्षों में कई तनावों का सामना करना पड़ा है लेकिन ऐसी फूट कभी देखने को नहीं मिली.

  • 1956 में स्वेज नहर संकट में, अमेरिका ने मिस्र के कुछ हिस्सों पर ब्रिटिश-फ़्रांसीसी आक्रमण का विरोध किया था.
  • 1990 के दशक में, कुछ यूरोपीय देश उस समय के यूगोस्लाविया में युद्ध को रोकने के लिए नाटो को शामिल करने में अमेरिका की शुरूआती अनिच्छा से निराश थे.
  • नाटो ने 9/11 के हमलों के बाद अमेरिका की रक्षा को लेकर पहली बार अनुच्छेद 5 को लागू किया था. बाद में नाटो ने अफगान अभियान का नेतृत्व किया था. लेकिन इराक को लेकर नाटो में फूट पड़ गई.

लेकिन इस बार का तनाव अलग है. इस बार एक सदस्य देश ही दूसरे पर सैन्य हमले की धमकी दे रहा है.

यह भी पढ़ें: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार अमेरिका और यूरोप में ठनी, ग्रीनलैंड पर ट्रंप को दी तगड़ी चेतावनी

यह भी पढ़ें: ग्रीनलैंड नहीं छीना तो अमेरिका को रूसी मिसाइलों से कोई नहीं बचा पाएगा?

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com