विज्ञापन

ग्रीनलैंड नहीं छीना तो अमेरिका को रूसी मिसाइलों से कोई नहीं बचा पाएगा? 5 सवालों में ट्रंप की सच्चाई

US Greenland Pursuit: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को लेना चाहते हैं और वो यह काम किसी भी कीमत पर करने का संकेत दे रहे हैं.

ग्रीनलैंड नहीं छीना तो अमेरिका को रूसी मिसाइलों से कोई नहीं बचा पाएगा? 5 सवालों में ट्रंप की सच्चाई
US Greenland Pursuit: 158 साल से अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश कर रहा है.
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के लिए डेनमार्क से विवादित रुख अपना रहे हैं
  • ट्रंप का गोल्डन डोम प्रोजेक्ट अमेरिकी क्षेत्र को मिसाइल हमलों से बचाने के लिए विकसित किया जा रहा है
  • अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा कर बिना डेनमार्क की अनुमति के अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाना चाहता है- एक्सपर्ट
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की जिद्द पकड़ ली है और वो उसके लिए किसी हद तक जाने को तैयार दिख रहे हैं. ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्ध स्वायत्त क्षेत्र है और दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप ने उसपर कब्जा करने की रट लगा रखी है. अमेरिका और डेनमार्क में बढ़ते तनाव के बीच बुधवार को दोनों देशों के प्रतिनिधियों की व्हाइट हाउस में बैठक हुई. इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि अमेरिका को अपनी सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है. ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अपने गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम वाले सपने के प्रोजेक्ट से भी जोड़ा है. सवाल है कि क्या सचमुच ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा किए बिना अपना गोल्डन डोम नहीं बना सकते हैं. इस एक्सप्लेनर में हम आपको 4 सवाल और उनके जवाब के जरिए बताएंगे.

Q- ट्रंप का गोल्डन डोम प्रोजेक्ट क्या है?

ट्रंप ने जब पिछले साल जनवरी में दूसरी बार राष्ट्रपति की कुर्सी संभाली थी, तो उसके तुरंत बाद उन्होंने गोल्डन डोम प्रोजेक्ट की घोषणा की थी. ट्रंप इजरालय के आयरन डोम की तर्ज पर अपना एयर डिफेंस सिस्टम बनाना चाहते हैं. इसका उद्देश्य अमेरिकी क्षेत्र को हर तरह के मिसाइल हमलों से बचाना है. राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रोजेक्ट के लिए 175 अरब डॉलर आवंटित करने की योजना बनाई है. ट्रंप ने तो लक्ष्य बनाया है कि उनके कार्यकाल के खत्म होने से पहले तक इसे पूरा कर लिया जाए लेकिन यह एक ऐसा लक्ष्य है, जिसे कई एक्सपर्ट उस समय सीमा के भीतर संभव नहीं मानते हैं.

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के टॉड हैरिसन का अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट की लागत 20 सालों में लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर हो सकती है. पूरी तरह से सक्षम मिसाइल ढाल बनाने के लिए इस प्रोजेक्ट की लागत 3.6 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ सकती है.

Q- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट कैसे काम करेगा?

आसान शब्दों में आपको बताते हैं कि गोल्डन डोम कैसे काम करेगा. दरअसल अमेरिका की योजना है कि वह पृथ्वी की निचली कक्षा में इंटरसेप्टर सैटेलाइट का एक बेड़ा बनाए. इसे ऐसे डिजाइन किया गया है कि जब भी अमेरिका की ओर कोई मिसाइल आएगी तो ये इंटरसेप्टर सैटेलाइट अपने कक्षा को छोड़ देंगे और उन मिसाइलों से टकरा जाएंगे. एटिने मार्कुज फाउंडेशन फॉर स्ट्रैटेजिक रिसर्च में रिसर्चर हैं. उनका कहना है कि यह एक बहुस्तरीय प्रणाली है. अगर से सैटेलाइट विफल होंगे तो उस स्थिति में आपके पास फायरिंग के अन्य विकल्प होने चाहिए. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन को जमीन और समुद्र पर अपनी मिसाइल क्षमताओं को भी एडवांस करने की आवश्यकता होगी.

Q- ट्रंप को ग्रीनलैंड क्यों चाहिए?

अमेरिका को लक्ष्य बनाकर जब भी कोई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें मारी जाएंगी, तो वे उत्तरी ध्रुव (नॉर्थ पोल) के ऊपर से गुजरेंगी. इसलिए वहां रडार होना और उन मिसाइलों को रोकने की क्षमताओं का होना अमेरिका के लिए फायदेमंद है. अमेरिकी सेना वर्तमान में ग्रीनलैंड में मौजूद अपने पिटफिक सैन्य बेस (पहले थुले नाम था) पर रडार सिस्टम संचालित करती है. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार मार्कुज का कहना है कि अंतरिक्ष में मिसाइलों को ट्रैक करने के लिए "ग्रीनलैंड में रडार का होना हमेशा उपयोगी होता है."

उन्होंने कहा कि अमेरिका वर्तमान में विशेष रूप से मिसाइलों को बाहरी वायुमंडलीय चरण में ही ट्रैक करने के लिए लो ऑर्बिट में इंफ्रारेड वाले सैटेलाइट को तैनात कर रहा है. ग्रीनलैंड पर नजर होने की एक और वजह है. दरअसल अमेरिका, ग्रीनलैंड और डेनमार्क के बीच मौजूदा रक्षा समझौते पहले से ही वाशिंगटन में बैठी सरकार को काफी छूट देते हैं.

Q- तो ट्रंप ग्रीनलैंड पर पूरी तरह कब्जा क्यों करना चाहते हैं?

पोलर क्षेत्रों की भू-राजनीति में विशेषज्ञता रखने वाले रिसर्चर मिका ब्लूजन-मेरेड ने कहा अमेरिका अभी भी जितना चाहे, बिना किसी सीमा के ग्रीनलैंड में तकनीकी, सामग्री और मानव संसाधनों को तैनात कर सकता है. यदि वो चाहे तो वहां परमाणु हथियारों के लोकेशन को भी बदल सकता है. हालांकि मुख्य बात यह है कि ऐसा करते समय उसे डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों को सूचित करना पड़ता है, उनसे परामर्श करना पड़ता है. लगता है कि ट्रंप यह भी नहीं करना चाहते.

Q- क्या ग्रीनलैंड के बिना ट्रंप का काम नहीं चलेगा?

मार्कुज का कहना है कि यदि अमेरिका का लक्ष्य खुद को एशिया की तरफ से आ रहे खतरे से बचाव करना है, तो GBI मिसाइलों को ग्रीनलैंड के बजाय उत्तरपूर्वी अमेरिका में तैनात करना उचित होगा. उन्होंने ग्रीनलैंड में राडार डिश और इंटरसेप्टर लगाने के ट्रंप के विचार को नाटो सहयोगी डेनमार्क से आर्कटिक द्वीप को हड़पने का महज एक "बहाना" बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास "पोलैंड और रोमानिया में पहले से ही कुछ हैं, इसलिए यह कोई तर्क नहीं है."
 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com