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ग्लोबल डिप्लोमेसी में भारत को 'हाथी' और चीन को 'ड्रैगन' क्यों कहते हैं? रूस का नाम भी जान ही लीजिए

कई विदेशी विश्लेषक भारत को Sleeping Elephant या Rising Elephant कहते रहे हैं, जिसका अर्थ है कि उसकी शक्ति बहुत बड़ी है, लेकिन उसका उदय क्रमिक है.

ग्लोबल डिप्लोमेसी में भारत को 'हाथी' और चीन को 'ड्रैगन' क्यों कहते हैं? रूस का नाम भी जान ही लीजिए
भारत को हाथी और चीन को कूटनीति की भाषा में ड्रैगन कहते हैं.
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भारत चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. नई दिल्ली में ग्लोबल लीडर्स का जमावड़ा लगा हुआ है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंचे हुए हैं. इसके साथ ईरान के राष्ट्रपति भी भारत में है. इन नेताओं के अलावा कई सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी दिल्ली में हैं.

अंतरराष्ट्रीय मामलों में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या 'हाथी और ड्रैगन' प्रतिस्पर्धी होंगे या सहयोगी. 'हाथी और ड्रैगन' को भारत-चीन संबंधों, एशिया की शक्ति-संतुलन राजनीति और वैश्विक व्यवस्था को समझाने का एक लोकप्रिय रूपक यानी मेटाफर बन चुका है. 

लेकिन आखिर भारत को हाथी और चीन को ड्रैगन कहा क्यों जाता है? इसके पीछे की वजहें क्या है और रूस का भी कोई नाम है क्या?

भारत को 'हाथी' क्यों कहा जाता है?

भारतीय संस्कृति और परंपरा में हाथी का स्थान हमेशा से पूजनीय और महत्वपूर्ण रहा है. हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश का मस्तक हाथी का है, जिसे बुद्धि, समृद्धि, ज्ञान और धैर्य का प्रतीक माना जाता है.

वैश्विक भू-राजनीति में भारत को हाथी कहे जाने के पीछे कई बड़े कारण हैं. हाथी एक ऐसा जीव है जो बहुत सोच-समझकर और धीरे-धीरे कदम बढ़ाता है, लेकिन उसकी ताकत के आगे कोई टिक नहीं सकता. भारत की नीतियां और फैसले भी इसी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बहसों से होकर गुजरते हैं.

विशाल विविधता और लोकतंत्र के कारण भारत के फैसले तुरंत नहीं, बल्कि क्रमिक रूप से लागू होते हैं. अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक अक्सर भारत को 'स्लीपिंग एलिफेंट' या 'राइजिंग एलिफेंट' कहते हैं. इसका मतलब है कि भारत की शक्ति असीम है.

चीन को 'ड्रैगन' क्यों कहा जाता है?

चीन के इतिहास और लोककथाओं में 'ड्रैगन' सिर्फ एक काल्पनिक जीव नहीं, बल्कि उनकी राष्ट्रीय अस्मिता और सत्ता का सबसे बड़ा प्रतीक है. प्राचीन चीन में ड्रैगन को सम्राट की ताकत, सौभाग्य और सर्वोच्च शक्ति माना जाता था.

पश्चिमी मीडिया और रणनीतिक विशेषज्ञों ने चीन की आर्थिक, तकनीकी और सैन्य बढ़त को देखते हुए इसे 'चाइनीज ड्रैगन' का नाम दिया. कूटनीति में ड्रैगन का मतलब एक ऐसी महाशक्ति से है जो तेजी से अपना विस्तार करती है, आक्रामक निर्णय लेती है और वैश्विक बाजार पर हावी होने की क्षमता रखती है.

रूस यानी 'रशियन बियर'

जिस तरह भारत को हाथी और चीन को ड्रैगन कहा जाता है, उसी तरह रूस की भू-राजनीतिक पहचान 'रूसी भालू' के रूप में दर्ज है.

यूरोपीय कार्टूनिस्टों और राजनीतिक विश्लेषकों ने 16वीं शताब्दी में रूस के विशाल आकार और उसकी भौगोलिक स्थिति को दर्शाने के लिए भालू के प्रतीक का इस्तेमाल शुरू किया था.
 

भालू शांत रहता है, लेकिन जब उसकी सीमा पर खतरा मंडराता है तो वह बेहद खतरनाक हो जाता है. रूस का सैन्य बल, उसकी विशाल भौगोलिक सीमा और कठोर जलवायु में भी डटे रहने की क्षमता इसे 'भालू' का रूपक देती है.

टॉम क्लैंसी के मशहूर उपन्यास के बाद 'द बियर एंड द ड्रैगन' वाक्यांश रूस और चीन के संबंधों को दर्शाने के लिए दुनिया भर में मशहूर हो गया.

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