वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने शनिवार को कहा कि तेजस लड़ाकू विमानों को वायुसेना में शामिल करने में हो रही देरी भारतीय वायुसेना के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है. उन्होंने कहा कि लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रन की संख्या लगातार घट रही है और वह भी ऐसे वक्त में जब सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए वायु शक्ति की अहमितयत लगातार बढ़ती जा रही है. वायुसेना दिवस से पहले आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने यह भी कहा कि अगले कुछ साल तक इंडियन एयरफोर्स को हर साल करीब 36-40 लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की जरूरत है. एपी सिंह का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब पाकिस्तान को चीन से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान मिलने की खबरें आई हैं.
एयर चीफ मार्शल ने उम्मीद जताई है कि स्वदेशी रूप से निर्मित तेजस मार्क-1ए विमानों के साथ-साथ बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) प्रोग्राम के तहत खरीदे जाने वाले राफेल लड़ाकू विमानों को शामिल किए जाने से स्थिति में सुधार होगा.
इंडियन एयरफोर्स की युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए इस प्रस्ताव को मूल रूप से करीब दो दशक पहले मंजूरी दी गई थी. प्रोजेक्ट से संबंधित कीमतों पर बातचीत और अन्य अहम मुद्दों पर फिलहाल चर्चा जारी है.
'हमें नुकसान होगा...'
वायुसेना प्रमुख ने अपनी वायुसेना को तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में हो रही देरी को लेकर भी चिंता जताई. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा इन विमानों की आपूर्ति में हो रही देरी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “इससे हमें नुकसान होगा.”
रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2021 में भारतीय वायुसेना के लिए 83 तेजस एमके-1ए विमानों की खरीद के लिए एचएएल के साथ 48 हजार करोड़ रुपये का सौदा किया था. विमानों की पहली खेप मार्च 2024 में सौंपी जानी थी. हालांकि, अब तक भारतीय वायुसेना को एक भी विमान नहीं सौंपा गया है.
वायुसेना इन लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करना चाहती है, क्योंकि उसके लड़ाकू विमान स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 29 रह गई है, जबकि आधिकारिक तौर पर स्वीकृत संख्या 42 है.
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वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना को तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमान, एमआरएफए प्रोग्राम के तहत विमान, तेजस मार्क-2 और एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोग्राम के तहत विकसित किए जा रहे लड़ाकू विमानों के शामिल होने का इंतजार है.
उन्होंने कहा कि अगर एएमसीए कार्यक्रम में देरी होती है, तो वायुसेना को किसी अन्य लड़ाकू विमान की खरीद पर विचार करना पड़ सकता है. रूस ने एसयू-57 लड़ाकू विमानों की पेशकश की है, लेकिन इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है.
(इनपुट- भाषा)
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