- अमेरिका के विदेश मंत्री ने मनीला में ASEAN की बैठक में रूस और चीन के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की
- रुबियो ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे हर आक्रामक कार्रवाई की कड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी
- मार्को रुबियो ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए अमेरिका मध्यस्थता करने को तैयार है
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को मनीला में एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशन्स (ASEAN) के विदेश मंत्रियों की सालाना बैठक में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीन के विदेश मंत्री समेत कई अन्य नेताओं से मुलाकात की. अमेरिका के शीर्ष राजनयिक ने कहा कि अमेरिका एशिया पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, भले ही वह ईरान के साथ संघर्ष बढ़ा रहा हो, यूक्रेन में रूस के युद्ध को खत्म करने का रास्ता तलाश रहा हो और क्यूबा की सरकार पर बदलाव के लिए दबाव डाल रहा हो.
मंगलवार से शुरू हुई बंद दरवाजे की बातचीत मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और साउथ चाइना सी में तनाव पर केंद्रित रही, जहां बृहस्पतिवार को एक नया टकराव हुआ. रुबियो ने पत्रकारों से कहा, "हमेशा यह चिंता बनी रहती है कि अमेरिका एक जगह पर इतना ज्यादा ध्यान दे रहा है कि वह दूसरी जगह पर ध्यान नहीं दे पा रहा है. लेकिन अमेरिका हर दिन एशिया में सक्रिय है. उन्होंने इस क्षेत्र में मजबूत साझेदारियों और आर्थिक संबंधों का जिक्र किया.
'हर आंख के बदले एक सिर'
ईरान युद्ध पर रुबियो ने कहा, "जब तक उन्हें अक्ल नहीं आ जाती, तब तक हर रात कीमत बढ़ती रहेगी." उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान बातचीत के लिए मिन्नतें कर रहा है, लेकिन ट्रंप को इसका कोई फायदा नहीं दिखता क्योंकि साफ है कि ईरान कोई डील करने के लिए तैयार नहीं है, कम से कम ऐसी डील तो नहीं, जिसे वे निभा सकें. ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि जब भी ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर गोली चलाएगा, तो अमेरिका ईरान का एक पुल या पावर प्लांट नष्ट कर देगा. इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनके देश की रक्षा नीति जैसे को तैसा (आंख के बदले आंख) वाली है. इस पर रुबियो ने कहा, "राष्ट्रपति की नीति 'आंख के बदले सिर' वाली है. वे जो हरकतें कर रहे हैं, उसके लिए उन्हें बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी."
बताया- रूस-यूक्रेन में कैसे बनेगी बात
रुबियो ने बृहस्पतिवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सी मुलाकात की. मीटिंग के बाद रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन में बेमतलब की जंग खत्म करने में मदद करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने माना कि किसी समझौते तक पहुंचने का कोई आसान या तेज रास्ता नहीं है. उन्होंने कहा कि कूटनीति के लिए लगातार कोशिशों और नए विचारों की जरूरत होगी. रुबियो ने कहा कि मॉस्को और कीव को उस बेहद खूनी युद्ध को खत्म करने के लिए प्रेरित होना चाहिए, जिसने दोनों पक्षों को बर्बाद कर दिया है. रुबियो ने ये भी बताया कि कुछ समय पहले रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता वाली बातचीत रुक गई है. रुबियो ने पत्रकारों से कहा कि चुनौती यही है कि एक ऐसे समाधान पर पहुंचा जाए, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें. और हमने कोशिश की है और आगे भी कोशिश करते रहेंगे कि कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके. अगर मौका मिला, तो हम वह भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं.
रूस के विदेश मंत्री क्या बोले
रुबियो से मिलने के बाद, लावरोव ने पत्रकारों के सवालों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. मॉस्को में रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने रुबियो से कहा कि यूक्रेन को और हथियार देना मंजूर नहीं है और यूरोपीय देशों पर रूस की रणनीतिक हार चाहने का आरोप लगाया. रूसी मंत्रालय ने कहा कि लावरोव ने टकराव के राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान के लिए रूस की तैयारी और पिछले साल अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ट्रंप के बीच हुए शिखर सम्मेलन में हुए समझौतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया.
तनाव बढ़ाने पर चीन को चेताया
रुबियो ने बुधवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ लंबी बैठक की. रुबियो ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने और वांग ने इस हफ्ते साउथ चाइना सी में एक विवादित इलाके में चीनी और फिलीपींस की सेनाओं के बीच हुई नई झड़प पर चर्चा की. बीजिंग इस पूरे इलाके पर अपना दावा करता है. रुबियो ने इस घटना को तनाव बढ़ाने वाला बताया. रुबियो ने कहा कि इन मामलों को बहुत सावधानी से संभालने की जरूरत है, क्योंकि जाहिर है, अमेरिका और चीन के बीच किसी भी तरह का टकराव — चाहे वह आर्थिक हो या किसी और तरह का — उसका दुनिया भर में बहुत बड़ा असर होगा. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सितंबर में चीनी नेता शी जिनपिंग की प्रस्तावित यात्रा के बारे में काफी बातचीत की और कहा कि उन्हें विश्वास है कि जब शी वाशिंगटन आएंगे तो उनकी यात्रा बहुत सकारात्मक रहेगी.
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