- जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने देश में परमाणु हथियारों की भूमिका पर खुलकर चर्चा करने की अपील की है
- जापान सरकार अपने परमाणु हथियार विरोधी तीन दशकों पुराने सिद्धांतों में बदलाव पर विचार कर रही है
- जापान की जनता में अधिकांश लोग परमाणु हथियारों के विरोधी सिद्धांतों को बनाए रखने के पक्ष में हैं
जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने जापान के लोगों से अपील की है कि वह देश की सुरक्षा में परमाणु हथियारों की भूमिका पर खुलकर बहस करें. कैबिनेट के किसी मौजूदा सदस्य का इस बेहद विवादित मुद्दे पर बात करना एक दुर्लभ घटना है. कोइज़ुमी ने यूरोप की यात्रा से पहले शुक्रवार को रिकॉर्ड किए गए एक ऑनलाइन समाचार कार्यक्रम के दौरान कहा, "हालांकि जापान के लिए इस मुद्दे पर चर्चा करना मुश्किल है, लेकिन एक विषय जिससे हम बच नहीं सकते, वह है परमाणु हथियार."
आम जनता में अब भी हिचक
कोइज़ुमी की ये बातें ऐसे समय में आई हैं जब सरकार जापान की सुरक्षा नीति को बताने वाले अहम दस्तावेजों में बदलाव पर विचार कर रही है, जिसमें परमाणु हथियारों का उत्पादन, कब्जा या उन्हें अपने यहां रखने के दशकों पुराने वादे में संभावित बदलाव भी शामिल हैं. 1967 में तैयार किए गए और औपचारिक रूप से देश के "तीन परमाणु-विरोधी सिद्धांतों" के तौर पर जाने जाने वाले इस वादे को तब से सरकारों ने लगातार बनाए रखा है. सरकार के वरिष्ठ अधिकारी आम तौर पर परमाणु हथियारों से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से बोलने से बचते रहे हैं, क्योंकि जापान एकमात्र ऐसा देश जिस पर परमाणु बमों से हमला हुआ था. 80 साल से ज्यादा होने के बाद भी वहां के लोगों को हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरने के बाद हुए नुकसान की यादें ताजा हैं. यही कारण है कि जापान के 'असाही शिंबुन' नाम के एक दैनिक अखबार के अप्रैल के एक सर्वेक्षण के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 75% लोगों ने कहा कि जापान को अपने सिद्धांतों को बनाए रखा जाना चाहिए, जबकि 21% ने कहा कि उनमें बदलाव किया जाना चाहिए.
प्रधानमंत्री के सलाहकार भी कर चुके हैं जिक्र
दिसंबर में, सुरक्षा मामलों पर प्रधानमंत्री सनाए तकाइची को सलाह देने वाले सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह निजी राय व्यक्त करके विवाद खड़ा कर दिया था कि जापान के पास परमाणु हथियार होने चाहिए. फिर भी, पिछले नवंबर में संसद में तकाइची द्वारा इस वादे को पूरी तरह से बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता के बारे में पूछे गए सवाल का सीधा जवाब न देने के बाद, जापान में अमेरिकी परमाणु हथियारों को लाने की अनुमति देने की चर्चा बढ़ गई है. अपनी टिप्पणी में, रक्षामंत्री कोइज़ुमी ने कहा कि रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले ने फ्रांस को अपनी परमाणु क्षमताएं बढ़ाने और फिनलैंड को अपने क्षेत्र में परमाणु हथियारों की तैनाती को मंज़ूरी देने के लिए प्रेरित किया है; ये बड़े बदलाव हैं जिन्हें उन्होंने "संभावित आपात स्थिति की गंभीर धारणा के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है.
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जापान को क्यों है परमाणु हथियार की जरूरत
कोइज़ुमी ने कहा, "इसे देखते हुए, मेरा मानना है कि हमें यह समझाने के लिए और भी ज्यादा प्रयास करने चाहिए कि जिस सुरक्षा माहौल में जापान है, उसमें हमें संकट की गहरी भावना के साथ हर नीति पर विचार करने और बिना किसी रोक-टोक के उन पर चर्चा करने और उन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है." जापान के बड़े अधिकारियों ने बार-बार यूक्रेन के खिलाफ रूस की जंग को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जोड़ा है. उनका कहना है कि "जो आज यूक्रेन के साथ हो रहा है, वही कल पूर्वी एशिया में भी हो सकता है" — इस तुलना को मुख्य रूप से लोकतांत्रिक ताइवान पर चीन के हमले की संभावना को उजागर करने के तौर पर देखा जा रहा है, जिस पर बीजिंग अपना दावा करता है. कुल मिलाकर देखें तो जापान अब फिर से ताकतवर देश बनने की तैयारी में है और इसमें परमाणु हथियार भी शामिल है. हालांकि, जापान का विपक्षी दल इस पर राजी नहीं है.
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