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प्रशासन की एक गलती और सॉफ्टवेयर इंजीनियर की चली गई जान, ग्रेटर नोएडा का ये मामला चौंकाने वाला है

पीड़ित परिजनों का आरोप है कि ये हादसा प्रशासन की लापरवाही के कारण हुआ है. अगर समय रहते सड़क पर रिफ्लेक्टर लगवाए जाते और हादसे वाली जगर पर जो खाली प्लॉट है उसमें जमे पानी को निकलवाया गया होता तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता.

प्रशासन की एक गलती और सॉफ्टवेयर इंजीनियर की चली गई जान, ग्रेटर नोएडा का ये मामला चौंकाने वाला है
प्रशासन की लापरवाही से गई युवक की जान
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ग्रेटर नोएडा:

प्रशासन की लापरवाही किसी की जिंदगी पर किस कदर भारी पड़ सकती है इसका एक उदाहरण हमें ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में दिखा है. यहां एक सॉफ्टवेटर इंजीनियर की मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि सड़क पर रिफ्लेक्टर ना होने और पास ही एक खाली प्लॉट में पानी जमा होने के कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियर हादसे का शिकार हुआ है. पुलिस ने मृतक सॉफ्टेवयर इंजीनियर की पहचान युवराज मेहता के रूप में की गई है. पुलिस सूत्रों के अनुसार हादसा शुक्रवार देर रात हुआ है.

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सड़क पर रिफ्लेक्टर ना होने की वजह से अधिक कोहरा पड़ने के कारण युवराज को आगे का रास्ता साफ-साफ नहीं दिखा और उसकी कार पास के खाली प्लॉट में जा गिरी. इस प्लॉट में पहले से ही करीब 70 फीट पानी भरा हुआ था. इस वजह से युवराज समय रहते कार से बाहर नहीं आ सका और उसकी मौत हो गई. पीड़ित परिजनों का आरोप है कि ये हादसा प्रशासन की लापरवाही के कारण हुआ है. अगर समय रहते सड़क पर रिफ्लेक्टर लगवाए जाते और हादसे वाली जगर पर जो खाली प्लॉट है उसमें जमे पानी को निकलवाया गया होता तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता.

पीड़ित परिजनों ने इस मामले में पुलिस को शिकायत भी दी है. इस शिकायत में शिकायत में मृतक के पिता राजकुमार मेहता का कहना है कि सर्विस रोड के किनारे न तो रिफ्लेक्टर लगाए गए थे और न ही नालों को ढका गया था. घने कोहरे के कारण सड़क किनारे रिफ्लेक्टर न होने से यह हादसा हुआ, जिसकी कीमत उनके बेटे को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी.

वहीं मामले की जांच कर रही पुलिस ने बताया कि युवराज मेहता गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और देर रात ऑफिस से घर लौट रहे थे. कोहरे के चलते सड़क किनारे रिफ्लेक्टर न होने के कारण उनकी कार  नाले की बाउंड्री से टकरा गई और पास के खाली प्लॉट में भरे गहरे पानी में जा गिर.हादसे के वक्त आसपास मौजूद लोगों ने आवाज सुनकर मदद की कोशिश की, लेकिन तब तक कार पूरी तरह पानी में डूब चुकी थी. 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी गई. मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस, गोताखोर और एनडीआरएफ की टीम ने करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद कार को बाहर निकाला, लेकिन तब तक युवराज की मौत हो चुकी थी. 

हादसे के बाद सोसायटी के लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला. निवासियों ने प्राधिकरण के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बताया कि वे पहले भी कई बार सर्विस रोड पर रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड लगाने की मांग कर चुके थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. नॉलेज पार्क थाना प्रभारी सर्वेश कुमार ने बताया कि परिजनों की शिकायत प्राप्त हो गई है और मामले में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

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