भारतीय घरों में छोटे से लेकर बड़े तक लंच और डिनर में चावल-दाल, चावल कढ़ी या चावल सब्जी खाना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो कुकर या भगोने में चावल उबालने के बाद बचा हुआ फालतू पानी यानी मांड (Rice Water) नाली में बहा देते हैं? अगर हां, तो आप अनजाने में एक बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं. पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण ने इंस्टाग्राम पर इस आम आदत को लेकर एक बहुत जरूरी बात शेयर की है, जो सीधे तौर पर हमारी सेहत से जुड़ी है. उन्होंने बताया है कि जिस पानी को हम कचरा समझकर फेंक देते हैं, असल में वही चावल का सबसे ज्यादा पौष्टिक हिस्सा होता है. आइए बहुत ही आसान भाषा में जानते हैं कि चावल पकाने की सही तरीका क्या है और इस छोटी सी गलती से शरीर को क्या नुकसान पहुंचता है.
आचार्य बालकृष्ण ने क्या बताया है?
आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक, जब हम चावल को बहुत सारे पानी में उबालते हैं और पकने के बाद उस सारे पानी को छानकर फेंक देते हैं, तो चावल के अंदर मौजूद तमाम जरूरी पोषक तत्व भी उस पानी के साथ बह जाते हैं. चावल में प्राकृतिक रूप से स्टार्च, मिनरल्स, विटामिन्स और थोड़े बहुत प्लांट प्रोटीन पाए जाते हैं. जब चावल उबलता है, तो पानी गर्म होने की वजह से ये सारे पोषक तत्व पानी में घुल जाते हैं. ऐसे में जब आप मांड को बाहर निकाल देते हैं, तो आप चावल की आधी ताकत और पौष्टिकता बेसिन में बहा रहे होते हैं.
नोट- चावल को हमेशा उतनी ही मात्रा में पानी डालकर पकाएं ताकि वह सारा पानी सोख ले. इसे 'एब्जॉर्प्शन मेथड' कहते हैं, जिससे चावल के सारे गुण उसी के अंदर सुरक्षित रहते हैं.
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चावल पकाने का सही और आसान तरीका क्या है?
- सबसे पहले चावल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, लेकिन बहुत ज्यादा मलकर धोने से बचें ताकि ऊपर की लेयर खराब न हो.
- चावल पकाने के लिए पानी का सही माप रखें. आमतौर पर एक कटोरी चावल के लिए दो से सवा दो कटोरी पानी बिल्कुल सही रहता है.
- चावल को खुले बर्तन या कुकर में इस तरह पकाएं कि वह सारा पानी अपने अंदर सोख ले. इसमें अलग से मांड निकालने की जरूरत न पड़े.
- इस तरीके से पकाया गया चावल स्वादिष्ट भी बनता है और उसका एक भी पोषक तत्व बर्बाद नहीं होता है.
चावल का पानी फेंकने से क्या कम हो जाता है?
आम बोलचाल की भाषा में समझें तो चावल सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं है, बल्कि इससे हमें एनर्जी भी मिलती है. चावल के मांड में भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और एनर्जी देने वाले तत्व होते हैं. जब आप मांड को फेंक देते हैं, तो चावल का टेक्सचर तो खिला-खिला हो जाता है, लेकिन उसकी न्यूट्रीशनल वैल्यू कम हो जाती है. जिन घरों में छोटे बच्चे या बुजुर्ग हैं, उनके लिए यह मांड किसी टॉनिक से कम नहीं होता. पुराने समय में लोग मांड में थोड़ा सा नमक या घी मिलाकर बच्चों को पिलाते थे, जिससे शरीर में ताकत बनी रहती थी और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस रहता था.
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