- नए लेबर कोड के तहत अब एक वर्ष की सेवा पूरी करने पर कर्मचारी को ग्रेच्युटी प्राप्त करने का अधिकार होता है.
- धोखाधड़ी, चोरी या आपराधिक गतिविधि में दोषी पाए जाने पर पूरी ग्रेच्युटी राशि जब्त की जा सकती है.
- ग्रेच्युटी रोकने से पहले कंपनी को कर्मचारी को लिखित नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य होता है.
Gratuity New Rules: केंद्र सरकार ने नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत देते हुए नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी के नियमों को काफी आसान और कर्मचारियों के हक में बनाया है. अब किसी भी संस्थान में लगातार केवल 1 साल तक काम करने वाले कर्मचारी भी ग्रेच्युटी पाने के योग्य हो जाएंगे.
दरअसल, लंबे समय तक ईमानदारी से सेवा देने के बदले कंपनी की तरफ से मिलने वाली यह राशि कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद खास मानी जाती है. सरकार के इस कदम से अब कम समय के लिए जॉब करने वाले युवाओं और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को भी सीधा फायदा मिलेगा.
हालांकि, यह भी ध्यान देना जरूरी है कि अगर किसी कर्मचारी से कोई बड़ा नुकसान या गंभीर अनुशासनहीनता होती है, तो कंपनी के पास नियमानुसार उसकी ग्रेच्युटी रोकने या रद्द करने का पूरा अधिकार होता है.
ये हैं वो गलतियां, जिनसे अटक सकती है ग्रेच्युटी की रकम?
ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम (Payment of Gratuity Act) के तहत कोई भी नियोक्ता (Company) बिना किसी ठोस और कानूनी कारण के कर्मचारी का पैसा नहीं रोक सकता. हालांकि, नीचे बताई गई स्थितियों में कंपनी ग्रेच्युटी की राशि को जब्त या रोकने का अधिकार रखती है.
दुर्व्यवहार या अनैतिक आचरण करने पर
यदि कार्यस्थल पर कर्मचारी हिंसा, गाली गलौज, धमकी, यौन उत्पीड़न (Harassment) या कंपनी की नीतियों के गंभीर उल्लंघन में दोषी पाया जाता है, तो उसकी ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है.
लापरवाही से कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान होने पर
अगर किसी कर्मचारी की जानबूझकर की गई गलती या बड़ी लापरवाही से कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान होता है, तो कंपनी नुकसान की भरपाई के लिए ग्रेच्युटी की राशि में से कटौती कर सकती है.
धोखाधड़ी, चोरी या आपराधिक गतिविधि में लिप्ट होने पर
कर्मचारी पर अगर चोरी, रिश्वतखोरी, जालसाजी या वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप सिद्ध हो जाता है, तो कंपनी पूरी ग्रेच्युटी राशि जब्त कर सकती है.
ग्रेच्युटी एक्ट के तहत पंजीकृत न होने पर कंपनी देने के लिए बाध्य नहीं
किसी संस्थान में कर्मचारियों की संख्या न्यूनतम सीमा से कम है और वह ग्रेच्युटी एक्ट के तहत नहीं आती, तो वहां ग्रेच्युटी देना कंपनी के अपने विवेक पर निर्भर करता है.
कारण बताओ नोटिस के बिना नहीं रोकी जा सकती ग्रेच्युटी
अगर कोई कंपनी किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी रोकने का फैसला करती है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा. इसके तहत कंपनी को सबसे पहले कर्मचारी को लिखित नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का मौका देना होगा. आरोप सिद्ध होने के बाद ही कर्मचारी की ग्रेच्युटी रोकने की कार्रवाई की जा सकती है. कंपनी केवल उतने ही पैसों की कटौती कर सकती है, जितना वास्तविक आर्थिक नुकसान हुआ है, शेष राशि का भुगतान कर्मचारी को करना होगा.
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