- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने हाई कोर्ट में दो सिख जजों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है
- तरलोचन सिंह ने CJI सूर्यकांत और कानून मंत्री को पत्र लिखकर नियुक्ति प्रक्रिया में पक्षपात की शिकायत की है
- आरोप है कि दिल्ली और पंजाब एंड हरियाणा में HC की जज नियुक्तियों में सिख जजों को जानबूझकर अवसर नहीं दिया गया है
हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति करते हुए दो सिख जजों को नजरअंदाज करने का आरोप लगा है. यह आरोप राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह ने लगाया है. यही नहीं उनकी ओर से इस मामले में चीफ जस्टिस सूर्यकांत और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को पत्र भी लिखा गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि जजों की नियुक्ति में कुछ चुनिंदा लोगों को ही मौका दिया गया. उन्होंने कहा कि आखिर दिल्ली हाई कोर्ट और पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति में सिख जजों को नजरअंदाज क्यों किया गया. वहीं इस पर सरकारी सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि इन जजों की फाइल अभी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को वापस नहीं गई है.
सूत्रों का कहना है कि इन लोगों की फाइलों पर फिलहाल विचार चल रहा है. चीफ जस्टिस और कानून मंत्री को भेजे पत्र में अर्जुन राम मेघवाल ने लिखा कि मैं माफी चाहता हूं, लेकिन यह ध्यान दिलाना जरूरी है कि कॉलेजियम ने वकील मेजर नवदीप सिंह और को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की थी. इसके अलावा ज्युडिशियल ऑफिसर गुरिंदरपाल सिंह को भी दिल्ली हाई कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश हुई थी. लेकिन दोनों को ही मौका नहीं मिला है. तरलोचन सिंह ने इन लोगों की नियुक्ति न होने को अल्पसंख्यक समुदाय के हितों से जोड़ दिया है.
तरलोचन सिंह ने कहा, 'यह हैरानी की बात है कि जब सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने लंबी प्रक्रिया के बाद उनके नामों को मंजूरी दी थी. फिर केंद्र सरकार ने पिक एंड चूज की पॉलिसी क्यों अपनाई. दोनों मामलों में ऐसा है कि जज अल्पसंख्यक समुदाय के हैं.' उन्होंने कहा कि मैं इस मामले को सांप्रदायिक रंग नहीं देना चाहता, लेकिन मेरी इच्छा है कि इन मामलों में न्याय मिले. उन्होंने कहा कि कानून मंत्री ने इन दोनों जजों के नामों को रोके जाने की वजह भी नहीं बताई है.
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