Semiconductor Industry: मौजूदा वक्त में डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन, लैपटॉप, वाशिंग मशीन से लेकर मिसाइल डिफेंस सिस्टम तक, कोई भी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सेमीकंडक्टर के बिना काम नहीं कर सकता. इसलिए सेमीकंडक्टर को किसी भी मशीन का दिमाग (Brain) कहा जाता है.
इस बीच, भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण हब बनाने की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में घोषणा की है कि भारत सरकार अगले दो महीनों के भीतर सेमीकंडक्टर और ऑटो कंपोनेंट विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए नियम और नियामकीय बदलाव लागू करेगी. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सेमीकंडक्टर क्या है, यह कैसे काम करता है और भारत के लिए यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है.
सेमीकंडक्टर क्या है और यह क्या काम करता है?
सेमीकंडक्टर एक ऐसी सामग्री है जिसकी विद्युत चालकता (Electrical Conductivity) कॉपर जैसे सुचालकों (Conductors) और रबर जैसे कुचालकों (Insulators) के बीच की होती है. आसान शब्दों में कहें, तो यह बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करने वाला एक ट्रैफिक कंट्रोलर है.
- यह जरूरत के हिसाब से बिजली के करंट को चालू या बंद (Switching) करता है.
- कंप्यूटर और स्मार्टफोन में डेटा को प्रोसेस और स्टोर करता है.
- कमजोर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों को मजबूत बनाता है.
- स्मार्टफोन, लैपटॉप, एटीएम, मेडिकल मशीन, ऑटोमोबाइल और मिसाइल प्रणालियों को संचालित करता है.
यह किस मटेरियल से बनता है?
- यह सबसे आम मैटेरियल है, जिसे साधारण रेत (Sand) से निकाला जाता है.
- इसका उपयोग शुरुआती दौर में बहुत अधिक होता था.
- इसका इस्तेमाल हाईस्पीड और लेजर तकनीकों में किया जाता है.
- इन शुद्ध पदार्थों में फास्फोरस या बोरॉन जैसी अशुद्धियां मिलाई जाती हैं, ताकि इनकी बिजली सोखने की क्षमता को बदला जा सके.
वैश्विक व्यापार में 75% हिस्सेदारी के भारत लाएगा नया नियम
टोक्यो में भारत और जापान के उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अपनी भूमिका को मजबूत करने के लिए 8 से 9 देशों और समूहों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है. इसके साथ ही गोयल ने दावा किया कि आगामी एफटीए लागू होने के बाद भारत के व्यापार समझौतों का दायरा वैश्विक व्यापार के लगभग 75% हिस्से तक पहुंच जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले चार वर्षों में 9 मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो 38 विकसित देशों और करीब 60 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं. पीयूष गोयल ने टोक्यो में बताया कि वैश्विक सेमीकंडक्टर और ऑटो कंपोनेंट निर्माता भारत में अपनी निर्माण इकाइयां स्थापित करना चाहते हैं. उनकी मांगों और नीतिगत मुद्दों का समाधान करने के लिए अगले दो महीनों के भीतर नए नियम व प्रावधान लाए जाएंगे ताकि भारत में मैन्युफैक्चरिंग स्थापित करने में कोई रुकावट न आए.
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भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्यों जरूरी है?
भारत के लिए सेमीकंडक्टर केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार बन चुका है. जिसे नीचे प्वाइंटर्स से समझा जा सकता है.
- वर्तमान में भारत अपनी जरूरत के अधिकांश चिप्स ताइवान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से आयात करता है.
- आत्मनिर्भर भारत के लिए देश में सेमीकंडक्टर का निर्माण जरूरी है. घरेलू उत्पादन से देश के अरबों डॉलर बचेंगे.
- किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कुल कीमत का 35 से 40% हिस्सा सेमीकंडक्टर का होता है.
- सेना के आधुनिक हथियारों, मिसाइलों, सैटेलाइट और संचार प्रणालियों में चिप्स का इस्तेमाल होता है. विदेशी चिप्स पर निर्भर रहने से डेटा लीक और जासूसी का खतरा बना रहता है.
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन देश में लाखों हाईटेक नौकरियां पैदा करेगा और भारत को एक ग्लोबल विनिर्माण हब बनाएगा.
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