अमेरिका ने भारत समेत 20 देशों से आयात होने वाली कुछ खास दवाओं और उनसे जुड़ी सामग्रियों पर 100% प्रस्तावित टैरिफ से राहत दी है. इस छूट में रेयर डिजीज, बांझपन के इलाज, सेल और जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (ADC) और कुछ अन्य स्पेशलिटी फार्मास्युटिकल उत्पाद शामिल हैं. अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने इसके लिए फेडरल रजिस्टर में नियम प्रकाशित किए हैं.
ये राहत ऐसे समय मिली है जब अमेरिका 29 सितंबर से कुछ पेटेंटेड फार्मास्युटिकल उत्पादों और उनसे जुड़ी सामग्रियों पर 100% टैरिफ लागू करने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, अमेरिकी नियमों के मुताबिक जेनेरिक दवाएं और उनसे जुड़ी सामग्री इस सेक्शन 232 फार्मा टैरिफ के दायरे से बाहर हैं.
ये राहत इसलिए भी मौजूं है क्योंकि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका के दौरे पर हैं.
किन दवाओं को मिली जीरो टैरिफ की राहत?
अमेरिकी व्यवस्था के तहत जीरो एड वैलोरम टैरिफ के लिए कुछ खास श्रेणियों को शामिल किया गया है. इनमें रेयर डिजीज के लिए ऑर्फन दवाएं, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा-डिराइव्ड थेरेपी, फर्टिलिटी ड्रग्स, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी, एडीसी और कुछ पशु स्वास्थ्य से जुड़ी फार्मास्युटिकल दवाएं शामिल हैं.
भारत के साथ यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, वियतनाम और बांग्लादेश समेत अन्य देशों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है.
यानी ये पूरे भारतीय फार्मा सेक्टर पर टैरिफ हटना नहीं है, बल्कि कुछ खास उत्पादों को मिली उत्पाद-विशिष्ट राहत है.
अब सवाल- क्या बाकी सामान पर भी घटेगा 'ट्रंप टैक्स'?
यही सवाल अब ज्यादा अहम हो गया है. खासकर इसलिए क्योंकि केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 5 सितंबर तक अमेरिका के दौरे पर हैं. उनके कार्यक्रम में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के साथ अमेरिकी समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी शामिल है.
गोयल 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को मिलवॉकी, विस्कॉन्सिन में जी20 ट्रेड मिनिस्टर्स बैठक में हिस्सा लेंगे. इसके अलावा वो अमेरिका में उद्योग जगत, निवेशकों और स्टार्टअप समुदाय से भी मुलाकात करेंगे. भारत-अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी बीटीए पर बातचीत भी इस दौरे का अहम हिस्सा है.
विशेषज्ञ बोले- फार्मा राहत को ज्यादा बड़ा संकेत न मानें
Nexdigm के सीनियर डायरेक्टर प्रभात रंजन के मुताबिक, चुनिंदा भारतीय स्पेशलिटी फार्मास्युटिकल उत्पादों को मिली छूट सकारात्मक है, लेकिन इसे भारतीय निर्यात पर अमेरिकी शुल्कों की व्यापक वापसी नहीं माना जाना चाहिए.
उनके मुताबिक, ये लक्षित और उत्पाद-विशिष्ट राहत है. इससे ये संकेत मिलता है कि आगे की टैरिफ बातचीत में भी अलग-अलग सेक्टर और उत्पादों के आधार पर फैसले हो सकते हैं.
अब इन सेक्टर्स पर है नजर
विशेषज्ञों के मुताबिक, आगे बातचीत में उन क्षेत्रों पर फोकस हो सकता है जहां भारत का अमेरिका को निर्यात ज्यादा है और टैरिफ प्रतिस्पर्धा को सीधे प्रभावित करता है. इनमें टेक्सटाइल और परिधान, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा और जूते, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
जानकार बताते हैं कि भारत के लिए बड़ी चुनौती सिर्फ मौजूदा टैरिफ कम कराना नहीं, बल्कि कारोबारियों के लिए ज्यादा स्थिर और अनुमान योग्य बाजार पहुंच तैयार करना है. मौजूदा फार्मा छूट इस दिशा में एक उदाहरण जरूर है, लेकिन बाकी सेक्टरों के लिए क्या रास्ता निकलता है, ये भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के नतीजों पर निर्भर करेगा.
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