Debt Mutual Funds Explained in Hindi: म्यूचुअल फंड्स का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के दिमाग में शेयर बाजार यानी स्टॉक्स का ख्याल आता है, लेकिन हर निवेशक हाई रिस्क उठाकर शेयरों में पैसा नहीं लगाना चाहता. ऐसे में अगर आप अपने पोर्टफोलियो में स्थिरता चाहते हैं और मध्यम से कम जोखिम में बेहतर रिटर्न पाना चाहते हैं, तो डेट फंड्स (Debt Mutual Funds) आपके लिए एक बेहतरीन जरिया हो सकते हैं.
डेट फंड क्या होते हैं?
डेट फंड म्यूचुअल फंड की ऐसी कैटेगरी हैं, जो मुख्य रूप से निश्चित आय वाले साधनों (Fixed Income Securities) जैसे कि सरकारी प्रतिभूतियों (Government Bonds), ट्रेजरी बिल्स (T Bills), कॉरपोरेट बॉन्ड्स और कमर्शियल पेपर्स में पैसा लगाते हैं. आसान भाषा में कहें तो, जब सरकार या कोई बड़ी कंपनी अपना काम चलाने के लिए बाजार से कर्ज (Debt) उठाती है, तो डेट फंड मैनेजर उस रकम को खरीदकर ब्याज के रूप में कमाई करते हैं. यही ब्याज निवेशकों के रिटर्न का मुख्य जरिया बनता है.
डेट फंड्स के प्रकार
निवेशकों की विभिन्न जरूरतों और टर्म के हिसाब से डेट फंड कई तरह के होते हैं.
- ओवरनाइट और लिक्विड फंड : 1 दिन से लेकर 91 दिनों की बेहद कम अवधि के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले फंड.
- अल्ट्रा शॉर्ट और शॉर्ट ड्यूरेशन फंड: 3 महीने से लेकर 1 से 3 साल तक की अवधि के लिए उपयुक्त.
- गिल्ट फंड: केवल सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करते हैं, जहां क्रेडिट रिस्क शून्य होता है.
- कॉरपोरेट बॉन्ड फंड: 80% से अधिक पैसा टॉप रेटेड यानी AAA कॉरपोरेट बॉन्ड्स में जमा करते हैं.
डेट फंड्स के फायदे बनाम बैंक एफडी
| खूबी | डेट म्यूचुअल फंड |
| |
| रिटर्न | बाजार आधारित | पहले से निश्चित और तय दर | |
| लचीलापन | SIP या एकमुश्त दोनों विकल्प | आमतौर पर एकमुश्त जमा | |
| लिक्वीडिटी | ज्यादातर फंड्स में बिना पेनल्टी के निकासी | समय से पहले तोड़ने पर पेनल्टी या चार्ज | |
| पोर्टफोलियो विविधता | विभिन्न सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड्स में निवेश | केवल एक बैंक पर निर्भरता |
डेट फंड्स में मौजूद 2 सबसे बड़े जोखिम
अक्सर लोग डेट फंड को 100% सुरक्षित मान लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इनमें भी दो तरह के जोखिम होते हैं.
- क्रेडिट रिस्क : यदि फंड ने जिस कंपनी के बॉन्ड में पैसा लगाया है, वह कंपनी वित्तीय संकट में आ जाए या ब्याज या मूलधन चुकाने में डिफ़ॉल्ट कर दे.
- ब्याज दर जोखिम : देश में जब रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरें बढ़ाता है, तो पुराने बॉन्ड्स की कीमतें गिर जाती हैं, जिससे लंबी अवधि वाले डेट फंड्स के एनएवी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
डेट फंड्स में ऐसे करें निवेश
डेट फंड्स में निवेश करना किसी भी सामान्य म्यूचुअल फंड की तरह ही आसान है. आप किसी भी मान्यता प्राप्त निवेश ऐप या ब्रोकर के जरिए एकमुश्त या SIP के माध्यम से शुरुआत कर सकते हैं.
निवेश करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- खर्च अनुपात : फंड प्रबंधन शुल्क जितना कम होगा, आपका नेट रिटर्न उतना ही बेहतर होगा.
- क्रेडिट रेटिंग देखें: पोर्टफोलियो में AAA या AA+ रेटिंग वाले बॉन्ड्स की मौजूदगी जांचें.
- लक्ष्य की अवधि : अपने वित्तीय लक्ष्य की समय अवधि के मुताबिक सही मैच्योरिटी वाले फंड का चयन करें.
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