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ये है शेयर बाजार में कम पैसों से लाखों बनाने की 'मशीन', जानिए Option Trading की हर बारीकी

शेयर बाजार में कम पूंजी के साथ ट्रेडिंग और हेजिंग करने के लिए ऑप्शन ट्रेडिंग (Option Trading) एक बेहद लोकप्रिय जरिया है. जानिए कॉल और पुट ऑप्शन क्या होते हैं, स्ट्राइक प्राइस, प्रीमियम और आईटीएम (ITM), एटीएम (ATM) व ओटीएम (OTM) का पूरा गणित बिल्कुल आसान हिंदी में.

ये है शेयर बाजार में कम पैसों से लाखों बनाने की 'मशीन', जानिए Option Trading की हर बारीकी
ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है? कॉल और पुट ऑप्शन, स्ट्राइक प्राइस और बेसिक स्ट्रेटजीज समझें
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What is Option Trading in Hindi: शेयर बाजार में ट्रेडिंग और निवेश के कई तरीके मौजूद हैं, जिनमें ऑप्शन ट्रेडिंग (Options Trading) सबसे अधिक लोकप्रिय और तेज जरिया माना जाता है. यह एक प्रकार का डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट (Derivative Contract) है, जो निवेशकों को कम पूंजी में बड़े मार्केट मूव्स का फायदा उठाने और अपने पोर्टफोलियो को हेज (Risk Management) करने की सुविधा देता है.

यदि आप ऑप्शन ट्रेडिंग की शुरुआत करना चाहते हैं, तो इसके मूल सिद्धांतों, तकनीकी शब्दावली और रणनीतियों को समझना बेहद जरूरी है. नए ट्रेडर्स की इन्ही जरूरतों को देखते हुए एनडीटीवी ऑप्शन ट्रेडिंग की हर बारी पर भरपूर जानकारी लेकर आया है. 

ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है? 

ऑप्शन ट्रेडिंग में ट्रेडर किसी शेयर और इंडेक्स को सीधे न खरीद और बेचकर उसके प्रिमियम को खरीदता है और बेचता है. ऑप्शन एक ऐसा वित्तीय अनुबंध (Contract) है, जो खरीदार (Buyer) को किसी संपत्ति जैसे शेयर या इंडेक्स को सीधे न खरीद कर उसके प्रिमियम को भविष्य की एक तय कीमत (Strike Price) और तय तारीख (Expiry Date) पर खरीदने या बेचने का अधिकार (Right) देता है. हालांकि, इसमें कोई बाध्यता नहीं होती है. इस अधिकार को प्राप्त करने के बदले खरीदार विक्रेता को एक निश्चित शुल्क चुकाना पड़ता है, जिसे प्रीमियम कहा जाता है.

ऑप्शन मार्केट के कंपोनेंट्स 

  • ऑप्शन बायर : जो प्रीमियम का भुगतान करके किसी संपत्ति को खरीदने या बेचने का अधिकार प्राप्त करता है.
  • ऑप्शन सेलर या राइटर: जो प्रीमियम स्वीकार करता है और बायर की ओर से ऑप्शन एक्सरसाइज करने पर डिलीवरी देने या लेने के लिए बाध्य होता है.
  • कॉल ऑप्शन या CE: यह खरीदार को तय कीमत पर संपत्ति खरीदने का अधिकार देता है. जब बाजार ऊपर जाने की उम्मीद होती है, तब कॉल ऑप्शन खरीदा जाता है.
  • पुट ऑप्शन या PE: यह खरीदार को तय कीमत पर संपत्ति बेचने का अधिकार देता है. जब बाजार नीचे जाने की उम्मीद होती है, तब पुट ऑप्शन खरीदा जाता है.

 ऑप्शन ट्रेडिंग से जुड़े मुख्य शब्द 

  • प्रीमियम: ऑप्शन का वह भाव जो बायर की ओर से सेलर को अधिकार पाने के लिए दिया जाता है. 
  • स्ट्राइक प्राइस: वह तय मूल्य जिस पर कॉन्ट्रैक्ट Exercise किया जाएगा. 
  • एक्सपायरी डेट : कॉन्ट्रैक्ट की अंतिम वैधता तिथि, जिसके बाद कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो जाता है. 

ऑप्शन की स्थिति 

ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स को उनके वर्तमान बाजार मूल्य और स्ट्राइक प्राइस के संबंध के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है.

1. इन द मनी (ITM): जब ऑप्शन शेयर या एंडेक्स के वर्तमान कीमत से नीचे के स्ट्राइक प्राइज का खरीजा जाता है, तो इसे इन द मनी कहा जाता है. यह आमतौर पर महंगा होगा है, लेकिन ये शेयर और इंडेक्स के पॉजिटिव दिशा में जाने पर इसमें तेजी से वृद्धि होती है, लेकिन इसके उलट चाल होने पर इसके आउट द मनी होने बड़ी बड़ा नुकसान होता है. 

2. एट द मनी ( ATM): जब संपत्ति का वर्तमान मूल्य और स्ट्राइक प्राइस बिल्कुल बराबर हो, तो इसे ऐट द मनी यानी ATM कहते हैं. इस  तरह के स्ट्राइक प्राइस में भी आउट द मनी की तुलना में प्रिमियम ज्यादा लगता है. शेयर या इंडेक्स के पॉजिटिव दिशा में जाने पर जल्द ही बड़ा मुनाफा होता है. हालांकि, उल्टी दिशा में जाने पर नुकसान भी बड़ा होता है. 

3. आउट ऑफ़ दमनी (OTM): जिस ऑप्शन का स्ट्राइक प्राइस वर्तमान कीमत से ऊपर होती है, उसे आउट द मनी कॉस कहते हैं. ऐसी स्थिति में शेयर या इंडेक्स में बहुत तेज बढ़ोतरी होने पर बंपर मुनाफा होता है और उल्टी दिशा में चाल आने पर कम नुकसान होता है, क्योंकि इसके लिए बहुत कम प्रीमियम देना पड़ता है. हालांकि, यह कीमत के स्थिर रहने पर भी घटते-घटते शून्य हो जाता है.  

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प्रमुख ऑप्शन ट्रेडिंग रणनीतियां 

शुरुआती और अनुभवी ट्रेडर्स बाजार की चाल (Bullish, Bearish या Volatile) के आधार पर अलग-अलग रणनीतियों का उपयोग करते हैं:

  • Long Call & Short Call: तेजी (Bullish) या मंदी (Bearish) के दौरान केवल कॉल ऑप्शन खरीदना या बेचना.
  • Long Put & Short Put: मंदी की आशंका में पुट खरीदना या तेजी की उम्मीद में पुट बेचना.
  • Straddle Strategy: जब बाजार में किसी बड़ी खबर की वजह से भारी उतार-चढ़ाव की उम्मीद हो, तो एक ही स्ट्राइक प्राइस का Call और Put दोनों एक साथ बाय या सेल करना.

सेबी की रिसर्च के मुताबिक 10 में से 9 छोटे ट्रेडर्स ऑप्शन ट्रेडिंग में अपना पैसा गंवा देते हैं. इसलिए ऑप्शन ट्रेडिंग में दिखता तो है कि यहां प्रिमियम एक दिन में ही 1000 प्रतिशत या 2000 प्रतिशत बढ़ जाते हैं, लेकिन हकीकत में इससे मुनाफा वसूलना बहुत ही मुश्किल होता है. 

नोटः यह ऑप्शन में ड्रेड करने की सलाह नहीं, बल्कि एक एस सामान्य जानकारी है. ट्रेड करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें. 

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