आज से दस साल बाद 2036 में XXXVI यानी 36वें ओलिंपिक गेम्स आयोजित किये जाएंगे. इसे लेकर अचानक दुनिया भर में हलचल तेज़ हो गई है. ओलिंपिक के आयोजन के लिए मेज़बान शहर को चुनने की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है. भारत समेत दुनिया के 7 दावेदार शहर और देश इसे लेकर फ़िलहाल गंभीर नज़र आ रहे हैं. ओलिंपिक का मेज़बान चुनने की प्रक्रिया तकरीबन डेढ़ दशक पहले शुरू हो जाती है. ओलिंपिक की दावेदारी पेश कर रहे शहरों का चुनाव इस कदर किया जाता है ताकि गेम्स का आयोजन परफेक्शन से हो और ओलिंपिक मूवमेंट का फ़ायदा दुनिया भर को पहुंच सके.
कब शुरू हुई और कब पूरी होगी मेज़बानी की प्रक्रिया?
2036 ओलिंपिक की मेज़बानी की प्रक्रिया अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक कमेटी IOC के लुसान (स्विट्ज़रैंड) में हुए 134वें सेशन में जून 2019 से शुरू हुई, जहां नीलामी की प्रक्रिया को शुरू करने को मान्यता दी गई. इसमें ‘समर और विंटर ओलिंपिक्स' के लिए ‘होस्ट कमिशन' बनाए गए जो IOC के एक्ज़ेक्यूटिव बोर्ड या कार्यकारी समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा.
भारत फ़्यूचर होस्ट समर कमिशन 2036 के सामने समर ओलिंपिक्स की दावेदारी पेश करेगा जिस समिति में 9 सदस्य शामिल हैं. इसकी अध्यक्ष कोलिंडा ग्रबर कितारोविच हैं. कोलिंडा 2015-20 में क्रोएशिया की राष्ट्रपति भी रह चुकी हैं.
क्या है मेज़बानी हासिल करने की टाइमलाइन
31 अक्टूबर 2026: इसी महीने यानी अक्टूबर 2026 के आख़िर तक IOC उन सभी देशों के नामों का एलान कर देगा जो मेज़बानी के लिए गंभीर रूप से इच्छुक दिख रहे हैं. इस बारे में IOC के मुताबिक 7 देशों से डायलाग जारी है.
नवंबर 2026: अब से एक साल बाद नवंबर 2026 तक सभी मेज़बान टीमों को होस्ट कमिशन के सामने एक विज़ुअल प्रेज़ेन्टेशन देना होगा. अहमदाबाद, म्यूनिख़, सियोल और नॉर्थ जेओल्ला प्रोविंस, बुडापेस्ट, केपटाउन, जोहानिसबर्ग और डरबन; दोहा और इस्तांबुल जैसे 7 शहर और उनका ग्रुप अपने शहर को बेस्ट मेज़बान साबित करने की कोशिश करेगा.
मार्च 2027: IOC का होस्ट कमिशन डायलॉग और विज़ुअल प्रेज़ेन्टेशन के आधार पर फ़ीज़िबिलिटी एसेसमेंट कर रणनीतिक डायलॉग शुरू करेगा. इसका मतलब है कि IOC का होस्ट कमिशन इस बात का आकलन करेगा कि दावेदारों में मेज़बानी की काबिलियत है या नहीं. दावेदार वक्त पर कामयबा तरीके से गेम्स का आयोजन कर सकते हैं या नहीं?
दिसंबर 2028: इस वक्त तक IOC के होस्ट कमिशन और दावेदारों के बीच टारगेटेड बातचीत होगी और एक तरह से दावेदारों के बीच भी शॉर्टलिस्टिंग कर दी जाएगी. 2029 के मध्य में: 2036 ओलिंपिक के आयोजन से क़रीब 7 साल पहले (2030 कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले) IOC मेज़बान हर और देश के नाम का एलान कर देगा.
7 शहरों का इम्तिहान!
यानी अगले तीन साल भारत समेत सभी देश (भारत-अहमदाबाद के अलावा जर्मनी-म्यूनिख़, द.कोरिया- सियोल और नॉर्थ जेओल्ला प्रोविंस, हंगरी-बुडापेस्ट, द.अफ़्रीका- केपटाउन, जोहानिसबर्ग और डरबन; कतर-दोहा और तुर्किये- इस्तांबुल ) अपनी दावेदारी को मज़बूती से पेश करने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाएंगे.
इनमें से सिर्फ़ जर्मनी (1936 और 1972) में और द. कोरिया (1988) में ओलिंपिक गेम्स के आयोजन किये जा चुके हैं.
भारतीय खिलाड़ियों में अलग उत्साह
पूर्व कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन और पूर्व ओलिंपियन ट्रैप शूटर मानशेर सिंह कहते हैं, "अगर भारत को 2036 ओलिंपिक गेम्स की मेज़बानी मिलती है तो यहां खेलों में बड़ा बदलाव ज़रूर आएगा. अगर आप एशिया में देखें तो अबतक तीन देश- जापान, द.कोरिया और चीन ने ओलिंपिक खेलों की मज़बानी की है. यही तीन देश एशिया में टॉप तीन पोज़िशन में बने रहते हैं. भारत में अगर आयोजन हुआ तो भारत के मेडल्स के नंबर भी बढ़ेंगे. खेलों को खर्चा ज़्यादा होगा. इससे भारत को और दुनिया भर में ओलिंपिक मूवमेंट को फ़ायदा होगा."
एशियन गेम्स 2026 में 3 सिल्वर जीतने वाले और वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल विजेता तीरंदाज़ धीरज कुमार कहते हैं, " मैं कल विजयवाड़ा के एक स्कूल में गया था. वहां एशियाड के बाद से ही उत्साह बढ़ गया है. उन्होंने अपने स्कूल का ग्राउंड बड़ा कर लिया है. अगर भारत में ओलिंपिक गेम्स का आयोजन होता है तो पूरे देश को बड़ा फ़ायदा होगा. मैं भी कोशिश करूंगा कि 2036 के ओलिंपिक में हिस्सा ले सकूं. भारतीय खेलों ा लेवल भी ऊपर हो जाएगा."
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