- झुंझुनूं जिले की लक्ष्मी शेखावत ने रीढ़ की हड्डी टूटने के बाद भी नेटबॉल में भारतीय टीम की उपकप्तानी संभाली है
- लक्ष्मी ने दुर्घटना के बाद भी खेलों में वापसी कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है
- उनके बड़े भाई स्वराज सिंह शेखावत ने उनकी खेल प्रतिभा को पहचाना और हमेशा उन्हें प्रेरित करते रहे हैं
Success Story Laxmi Shekhawat Rajasthan: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के झाझड़ गांव की राजपूत बेटी लक्ष्मी शेखावत की सफलता की कहानी अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की बेमिसाल मिसाल है. एक भीषण सड़क दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी टूटने के बावजूद लक्ष्मी ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने मैदान पर शानदार वापसी की और अब कामयाबी का नया इतिहास रच दिया है. हांगकांग में 8 से 15 अगस्त 2026 तक आयोजित हो रही 14वीं एशियन नेटबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम की उपकप्तानी की कमान लक्ष्मी शेखावत संभाल रही हैं.

success story rajasthan laxmi shekhawat asian netball championship vice captain India Photo Credit: स्वराज सिंह शेखावत

success story rajasthan laxmi shekhawat asian netball championship vice captain India Photo Credit: स्वराज सिंह शेखावत
भाई का अधूरा सपना अब बहन करेगी पूरा
NDTV से खास बातचीत में लक्ष्मी शेखावत के बड़े भाई स्वराज सिंह शेखावत बताते हैं, "बास्केटबॉल खिलाड़ी के रूप में कभी मेरा भी यह सपना हुआ करता था कि मैं विदेशों में जाकर भारत के लिए खेलूं. मुझे तो मौका नहीं मिल सका, लेकिन मेरा वह अधूरा सपना अब मेरी छोटी बहन लक्ष्मी के रूप में पूरा हो रहा है. यह मेरे जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक है. बहन 5 अगस्त को दिल्ली से हांगकांग के लिए रवाना हुई है."
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लक्षमी शेखावत मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले की नवलगढ़ तहसील के झाझड़ गांव से हैं. Photo Credit: स्वराज सिंह शेखावत
'हिम्मत रख बहन, तुझे देश के लिए खेलना है': भाई ने तराशा लक्ष्मी का हुनर
स्वराज सिंह शेखावत खुद भी एक बेहतरीन बास्केटबॉल खिलाड़ी रहे हैं और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई स्वर्ण पदक जीते हैं. उन्होंने ही अपनी छोटी बहन लक्ष्मी के भीतर छिपी खेल प्रतिभा को पहचाना और उसे निखारा. दुर्घटना के बाद भी उन्होंने लक्ष्मी का हौसला टूटने नहीं दिया. उन्होंने हमेशा उस पर विश्वास जताया और उसे प्रेरित करते हुए कहा करते थे "बहन, हिम्मत रख. अभी तो तुझे भारत के लिए खेलना है." संयोग देखिए कि आज लक्ष्मी भारतीय टीम की उपकप्तान बनकर हांगकांग के मैदान पर देश का मान बढ़ा रही हैं.
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स्कूल से घर लौटते समय एक्सीडेंट में उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर आ गया. Photo Credit: स्वराज सिंह शेखावत
जब हंसती-खेलती जिंदगी में आया तूफान: एक्सीडेंट में टूटी रीढ़ की हड्डी
स्वराज सिंह बताते हैं कि लक्ष्मी का बचपन से ही खेलों के प्रति गहरा रुझान था. वर्ष 2014 तक सब कुछ ठीक चल रहा था. उस समय स्वराज सिंह की पोस्टिंग जयपुर जिले के जोबनेर में थी और लक्ष्मी उनके पास रहकर 11वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी. एक दिन स्कूल से घर लौटते समय उसका भयानक एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उसकी रीढ़ की हड्डी (L1–L2) में गंभीर फ्रैक्चर आ गया.
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ठीक होने के बाद वह पहले से कहीं ज्यादा उत्साह और जीतने के अटूट जुनून के साथ दोबारा मैदान में उतरी. Photo Credit: स्वराज सिंह शेखावत
रीढ़ की हड्डी में डालनी पड़ी रॉड: 6.3 फीट की खिलाड़ी ने ऐसे जीता जिंदगी का मैच
इस भीषण हादसे के बाद लक्ष्मी चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गई थी और उसे लंबे समय तक बेड रेस्ट पर रहना पड़ा. बाद में डॉक्टरों को उसकी रीढ़ की हड्डी में रॉड डालनी पड़ी. सही रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) और परिवार के अटूट सहयोग की बदौलत वह धीरे-धीरे ठीक हुई. 6 फीट 3 इंच की लंबाई वाली लक्ष्मी के लिए रीढ़ की हड्डी का फ्रैक्चर किसी मौत के अहसास से कम नहीं था, लेकिन ठीक होने के बाद वह पहले से कहीं ज्यादा उत्साह और जीतने के अटूट जुनून के साथ दोबारा मैदान में उतरी.
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success story rajasthan laxmi shekhawat asian netball championship vice captain India. Photo Credit: स्वराज सिंह शेखावत
8 महीने की बच्ची की मां हैं लक्ष्मी: पीहर के साथ ससुराल ने भी दिया पूरा साथ
लक्ष्मी शेखावत की इस स्वर्णिम सफलता में केवल उनके मायके का ही नहीं, बल्कि ससुराल पक्ष का भी भरपूर सहयोग रहा. फरवरी 2023 में उनका विवाह डीडवाना निवासी राहुल सिंह से हुआ, जो भारतीय रेलवे में गुजरात में कार्यरत हैं. उनकी 8 महीने की एक बेटी भी है, जिसका नाम राजलक्ष्मी है. वर्तमान में लक्ष्मी शेखावत का परिवार जयपुर में निवास कर रहा है.
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