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कौन मारेगा सत्ते पे सत्ता? 2036 ओलिंपिक के 7 मजबूत दावेदारों में से एक भारत ने फौरन साफ किया अपना इरादा

2036 ओलिंपिक और पैरालिंपिक खेलों की मेजबानी की दौड़ में भारत ने अहम कदम बढ़ा दिया है। IOC द्वारा मेजबानी चयन प्रक्रिया शुरू करने के बाद भारतीय ओलिंपिक संघ ने 'राइजिंग टुगेदर' विजन पेश किया है.

कौन मारेगा सत्ते पे सत्ता?  2036 ओलिंपिक के 7 मजबूत दावेदारों में से एक भारत ने फौरन साफ किया अपना इरादा
अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति IOC ने ओलिंपिक और पैरालिंपिक गेम्स

अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति IOC ने जैसे ही ओलिंपिक और पैरालिंपिक गेम्स को लेकर जैसे ही 2036 में होनेवाले गेम्स की मेज़बानी की प्रक्रिया को लेकर एलान किया भारतीय ओलिंपिक संघ IOA ने अपना पक्ष रखने में ज़रा भी देरी नहीं की. दअसल इसे लेकर भारत सरकार लंबे समय से अपना इरादा साफ़ कर चुकी है और इसे लेकर अहमदाबाद में ज़ोर-शोर से तैयारी भी चल रही है. इसलिए IOA ने अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के फ़ैसले का स्वागत करते हुए अपना विज़न पेश कर दिया. इसे दो अहम शब्दों – ‘राइज़िंग टुगेदर या साथ मिलकर आगे बढ़ने' का नाम भी दिया गया है. 

रेस में हैं 7 देश, पांच देशों के लिए पहला मौका

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति-IOC ने 2036 ओलंपिक- पैरालंपिक खेलों की मेज़बानी के चयन प्रक्रिया के लिए जो एलान किया उसमें 7 देशों के नाम सामने आ रहे हैं. भारक के अलावा इनमें जर्मनी, द.कोरिया, कतर, हंगरी, द.अफ़्रीका और तुर्किये के नाम शामिल हैं. 

इन 7 देशों में सिर्फ़ दो देश जर्मनी (1936 और 1972) और द. कोरिया (1988) में ओलिंपिक गेम्स के आयोजन किये जा चुकै हैं. भारत समेत बाक़ी के पांच देश पहली बार मेज़बानी के लिए दावेदारी पेश करते दिखेंगे.    

अहमदाबाद में चल रही ज़ोरों से तैयारी

भारत की ओर से अहमदाबाद शहर के लिए दावेदारी पेश की जाएगी जिसे लेकर तकरीबन दो साल से IOC से अच्छे स्तर पर बातचीत और तैयारी भी चल रही है. इसी नीति के तहत भारत ने 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी भी हासिल की है. 

इसी वजह से अहमदाबाद में पिछले कुछ सालों से दुनिया भर के एक से बढ़कर एक अंतर्राष्ट्रीय गेम्स के आयोजन किये जाते रहे हैं. इनमें क्रिकेट वर्ल्ड कप, आईपीए, नेशनल गेम्स से लेकर कॉमनवेल्थ वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप, BRICS ट्रेडिशनल एंड इंडीजिनस डिमॉन्सट्रेशन गेम्स, अदाणी अहमदाबाद मैराथन से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 जैसे बड़े और अहम टूर्नामेंटों के नाम दर्ज हैं. 

भारत की मेज़बानी से ओलिंपिक मूवमेंट को भी फायदा

भारत लगातार खेलों पर अपना फ़ोकस बढ़ाता नज़र आ रहा है. ‘राइज़िंग टुगेदर' के स्लोगन के साथ भारत ना सिर्फ़ खेलों के ज़रिये खुद में बड़ा परिवर्तन देख रहा है बल्कि ओलिंपिक मूवमेंट को दुनिया भर में मज़बूती से फैलाने का इरादा भी रख रहा है. 2036 के ओलिंपिक की मेज़बानी के सहारे भारत इन दोनों पहलुओं को लेकर अपना इरादा भी साफ़ कर रहा है. भारतीय ओलिंपिक संघ ने साफ़ किया है कि इसके सहारे भारत में खेलों की संस्कृति में जेनेरेशनल फ़ायदा होनेवालाहै. करोड़ों भारतीय इस मूवमेंट के सहारे खेलों को देखेंगे और सक्रिय तरीके से इसमें हिस्सा भी ले सकेंगे. इसके ज़रिये बच्चो की पढ़ाई और युवाओं को रोज़गार मिलने की बात भी कही जा रही है. 

दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक भारत के करोडों युवा इस मूवमेंट से ज़ुड़कर ओलिंपिक मूवमेंट में अपनी हिस्सेदारी निभाते नज़र आएंगे. 

ओलिंपिक मूवमेंट पर सरकार और भारतीय ओलिंपिक संघ का विजन 

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा कहती हैं, "हम 2036 के ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों के लिए भारत के विजन और आकांक्षाओं को IOC द्वारा मान्यता दिए जाने से गहराई से सम्मानित हैं, और खेलों के भविष्य के संस्करणों के लिए संभावित मेजबानों के एक असाधारण समूह का हिस्सा बनकर गर्व महसूस कर रहे हैं.” 

पीटी उषा भारतीय विज़न के बारे में बताते हुए ये भी कहती हैं, “हमारे लिए, 'राइजिंग टुगेदर' केवल एक नारा नहीं है - यह एक युवा, गतिशील और उभरते भारत के आत्मविश्वास को दर्शाने वाले खेलों का निर्माण करते हुए, भारत की ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और विविधता को एक साझा ओलंपिक सपने के पीछे एकजुट करने की एक सशक्त प्रतिबद्धता है, साथ ही ओलंपिक और पैरालंपिक आंदोलनों की नई पीढ़ियों, नए समुदायों और नए क्षितिज तक पहुंचने की महत्वाकांक्षा में योगदान देना है. 

पीटी उषा ये भी बताती हैं कि कैसे ज़बरदस्त तरीके से पूरे ओलिंपिक मूवमेंट को भारतीय मेज़बानी का फ़ायदा पहुंच सकता है. वे कहती हैं, “यदि हम एक साथ आगे बढ़ते हैं - अपने एथलीटों, अपने लोगों, अपने शहरों और ओलंपिक और पैरालंपिक आंदोलनों के साथ - तो संभावनाएं असीमित हैं. और जब भारत आगे बढ़ेगा, तो हम चाहते हैं कि दुनिया भी हमारे साथ आगे बढ़े. हम IOC के साथ अपनी चर्चा जारी रखने और अक्टूबर के अंत में पहली बार फ्यूचर होस्ट कमीशन के सामने अपनी महत्वाकांक्षा प्रस्तुत करने के लिए उत्सुक हैं."

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहते हैं, "2036 के लिए भारत की महत्वाकांक्षा एक सरल विचार में निहित है कि खेल हमारे राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में मदद कर सकता है. 

पीटी उषा की तरह ही खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी कहते हैं, “ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी लाखों युवा भारतीयों को खेल में भाग लेने के लिए प्रेरित करेगी, स्वस्थ और अधिक सक्रिय समुदायों को मजबूत करेगी, और शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास में हमारे युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेगी. भारत में खेलों को लाकर, हम एक ऐसे खेल परिवर्तन को तेज कर सकते हैं जो हमारे समाज के हर हिस्से तक पहुंचे - और ऐसा करते हुए, दुनिया के सबसे गतिशील देशों में से एक में ओलंपिक आंदोलन के लिए एक शक्तिशाली नया अध्याय खोल सकते हैं."

 पूर्व कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन और पूर्व ओलिंपियन ट्रैप शूटर मानशेर सिंह कहते हैं, "अगर भारत को 2036 ओलिंपिक गेम्स की मेज़बानी मिलती है तो यहां खेलों में बड़ा बदलाव ज़रूर आएगा. अगर आप एशिया में देखें तो अबतक तीन देश- जापान, द.कोरिया और चीन ने ओलिंपिक खेलों की मज़बानी की है. यही तीन देश एशिया में टॉप तीन पोज़िशन में बने रहते हैं. भारत में अगर आयोजन हुआ तो भारत के मेडल्स के नंबर भी बढ़ेंगे. खेलों को खर्चा ज़्यादा होगा. इससे भारत को और दुनिया भर में ओलिंपिक मूवमेंट को फ़ायदा होगा."

एशियन गेम्स 2026 में 3 सिल्वर जीतने वाले और वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल विजेता तीरंदाज़ धीरज कुमार कहते हैं, " मैं कल विजयवाड़ा के एक स्कूल में गया था. वहां एशियाड के बाद से ही उत्साह बढ़ गया है. उन्होंने अपने स्कूल का ग्राउंड बड़ा कर लिया है. अगर भारत में ओलिंपिक गेम्स का आयोजन होता है तो पूरे देश को बड़ा फ़ायदा होगा. मैं भी कोशिश करूंगा कि 2036 के ओलिंपिक में हिस्सा ले सकूं. भारतीय खेलों का लेवल भी ऊपर हो जाएगा."

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