मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (फाइल फोटो)
- सचिन का मानना है कि खिलाड़ियों को प्रतिबद्ध सपोर्ट स्टाफ की ज़रूरत है
- विदेशी कोचों को लंबे वक्त तक अनुबंध पर लिया जाना चाहिए : सचिन
- जो खिलाड़ी मेडल लाने से चूक गए उन पर ध्यान देने की जरूरत : सचिन
मुंबई:
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर भले ही मैदान में धमाका न कर रहे हों, लेकिन खेलों के लिए उनका बल्ला चल रहा है. उनका मानना है कि कुछ खिलड़ियों को विदेश में ट्रेनिंग के लिए भेजने के बजाय बेहतरीन विदेशी कोचों और उनके स्टाफ को अपने देश बुलाना चाहिए, ताकि वो भारतीय कोच और सहायक स्टाफ को प्रशिक्षित करें.
शनिवार को अखिल भारतीय खेल परिषद (एआईसीएस) की बैठक में शिरकत करने के दौरान सचिन ने कहा कि विदेशी कोचों को लंबे वक्त तक अनुबंध पर लिया जाना चाहिए, ताकि वे जब वापस लौटें तो हमारे पास कोचों, सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों का एक बड़ा पूल मौजूद हो.
सचिन का मानना है कि खिलाड़ियों को प्रतिबद्ध सपोर्ट स्टाफ की ज़रूरत है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल हर खिलाड़ी के पीछे बहुत प्रतिबद्ध सपोर्ट स्टाफ की टीम होती है.
सचिन ने यह भी कहा कि ओलिंपिक में मेडल जीतने वालों को जरूर सम्मानित किया जाना चाहिए, लेकिन उन खिलाड़ियों के योगदान को भी सम्मानित करना चाहिए. जिन्होंने मुकाबले में अपना सब कुछ झोंक दिया. सचिन ने कहा, 'हमें उन खिलाड़ियों को कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जिन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया लेकिन मेडल नहीं जीत सके.'
सचिन की राय से इत्तेफाक़ रखते हुए भाईचुंग भूटिया ने कहा कि हमें ज़िला स्तर पर काम करने की, मैदान बनाने की ज़रूरत है. इस बैठक में सचिन और भूटिया के अलावा एआईसीएस के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा, कुंजुरानी देवी, तीरंदाज लिंबा राम और भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष एन. रामचंद्रन भी मौजूद थे.
एआईसीएस ने सरकार से खेल बजट को 125000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की गुज़ारिश की, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए देश के एथलीटों की अच्छी तैयारी सुनिश्चित की जा सके.
शनिवार को अखिल भारतीय खेल परिषद (एआईसीएस) की बैठक में शिरकत करने के दौरान सचिन ने कहा कि विदेशी कोचों को लंबे वक्त तक अनुबंध पर लिया जाना चाहिए, ताकि वे जब वापस लौटें तो हमारे पास कोचों, सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों का एक बड़ा पूल मौजूद हो.
सचिन का मानना है कि खिलाड़ियों को प्रतिबद्ध सपोर्ट स्टाफ की ज़रूरत है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल हर खिलाड़ी के पीछे बहुत प्रतिबद्ध सपोर्ट स्टाफ की टीम होती है.
सचिन ने यह भी कहा कि ओलिंपिक में मेडल जीतने वालों को जरूर सम्मानित किया जाना चाहिए, लेकिन उन खिलाड़ियों के योगदान को भी सम्मानित करना चाहिए. जिन्होंने मुकाबले में अपना सब कुछ झोंक दिया. सचिन ने कहा, 'हमें उन खिलाड़ियों को कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जिन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया लेकिन मेडल नहीं जीत सके.'
सचिन की राय से इत्तेफाक़ रखते हुए भाईचुंग भूटिया ने कहा कि हमें ज़िला स्तर पर काम करने की, मैदान बनाने की ज़रूरत है. इस बैठक में सचिन और भूटिया के अलावा एआईसीएस के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा, कुंजुरानी देवी, तीरंदाज लिंबा राम और भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष एन. रामचंद्रन भी मौजूद थे.
एआईसीएस ने सरकार से खेल बजट को 125000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की गुज़ारिश की, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए देश के एथलीटों की अच्छी तैयारी सुनिश्चित की जा सके.
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