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मराठी पर छिड़ी जंग HC पहुंची, ड्राइवरों ने उठाया सवाल- लाइसेंस देने में नहीं पूछी जाती भाषा; दिलचस्प दलीलें

ड्राइवरों का कहना है कि लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करने के लिए एक ऐसा आधार अब बताया जा रहा है, जो संसद से पारित कानून में नहीं है.

मराठी पर छिड़ी जंग HC पहुंची, ड्राइवरों ने उठाया सवाल- लाइसेंस देने में नहीं पूछी जाती भाषा; दिलचस्प दलीलें
  • महाराष्ट्र ने मुंबई समेत सभी शहरों में टैक्सी और ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा जानना अनिवार्य कर दिया है
  • चार ड्राइवरों ने महाराष्ट्र हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इस आदेश को मोटर वीकल एक्ट के खिलाफ बताया है
  • याचिका में कहा गया कि ड्राइवरों पर मराठी भाषा अनिवार्यता संविधान के समानता और रोजगार के अधिकार का उल्लंघन है
नई दिल्ली:

मराठी भाषा पर छिड़ी जंग अब महाराष्ट्र हाई कोर्ट तक पहुंच गई है. राज्य सरकार ने आदेश जारी किया है कि मुंबई समेत महाराष्ट्र के शहरों में टैक्सी और ऑटो चलाने वालों को मराठी आना जरूरी है. जो लोग मराठी भाषा नहीं बोल सकते, उन्हें ड्राइवर के तौर पर नहीं करने दिया जाएगा. अब इस आदेश के खिलाफ 4 ड्राइवरों ने उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल की है. इन लोगों ने दलील दी है कि मोटर वीकल एक्ट में कहीं भी ऐसा नहीं लिखा है कि राज्य सरकार ऐसा कोई नियम तय कर सकती है कि ड्राइवरों को कोई भाषा सीखना जरूरी है. इस आधार पर ड्राइवरों पर कोई एक्शन भी नहीं लिया जा सकता. 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार ड्राइवरों का कहना है कि लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करने के लिए एक ऐसा आधार अब बताया जा रहा है, जो संसद से पारित कानून में नहीं है. ड्राइवरों ने यह याचिका वकील विवेक शुक्ला के माध्यम से दाखिल की है. इस पर चीफ जस्टिस के समक्ष 27 अगस्त को सुनवाई होगी. ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के नियम वाला नोटिफिकेशन 12 अगस्त को जारी हुआ है. ड्राइवरों का कहना है कि मराठी भाषा सीखने का प्रावधान संविधान के तहत दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है. इसके अलावा आर्टिकल 19 के तहत रोजगार और पेशा करने के अधिकार का भी हनन है. संविधान के आर्टिकल 21 के भी यह खिलाफ है.

अदालत में ड्राइवरों ने मोटर वीकल एक्ट 1988 का हवाला देते हुए कहा कि इसमें ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने या फिर बनाए रखने के लिए कहीं भी भाषा के ज्ञान की अनिवार्यता नहीं बताई गई. ड्राइवरों का कहना है कि इस आदेश के चलते करीब 10 लाख चालकों की आजीविका पर संकट पैदा हो गया है. उन्होंने कहा कि ऐसे लाखों प्रवासी ड्राइवर हैं, जिनके सामने परमिट और लाइसेंस रद्द होने का संकट है. यदि यह नियम लागू हुआ तो उनकी आजीविका खतरे में होगी और वे सड़क पर आ जाएंगे. इस जनहित याचिका में मांग की गई है कि सरकार के नोटिफिकेशन पर तत्काल रोक लगाई जाए.

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