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राजस्थान निकाय चुनाव: टिकट की जंग खत्म, निकायों में किसका कितना दम? बागियों पर नजर

राजस्थान में 309 निकायों के 10,245 वार्डों के लिए नामांकन का आज आखिरी दिन था, जो समाप्त हो गया है. चुनाव में 1.44 करोड़ मतदाता और 33 फीसदी महिला आरक्षण मुख्य फैक्टर हैं.

राजस्थान निकाय चुनाव 2026: टिकट की जंग खत्म, निकायों में किसका कितना दम; बागियों पर नजर
IANS
  • राजस्थान में कुल 309 निकायों में 2 चरणों में चुनाव होने हैं.
  • निकाय चुनाव में करीब 1.44 करोड़ मतदाता हैं.
  • बीजेपी और कांग्रेस के लिए बागी उम्मीदवारों को रोकना चुनौतीपूर्ण है.

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 के लिए नामांकन प्रक्रिया सोमवार 31 अगस्त को पूरी हो गई. इसके साथ ही 309 नगरीय निकायों में होने वाले चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है. अब अगली नजर नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी और चुनाव चिन्ह आवंटन पर है. इसके बाद हर वार्ड में मुकाबले की अंतिम तस्वीर सामने आएगी. राज्य में इस बार 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाओं समेत कुल 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में चुनाव होना है.

निकाय चुनाव में अहम हैं यूथ

नगर निकाय चुनाव में करीब 1.44 करोड़ मतदाता इन चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. आयु वर्ग के हिसाब से देखें तो युवा मतदाताओं की संख्या भी काफी बड़ी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 18 से 25 वर्ष- 21,30,043 मतदाता और 26 से 35 वर्ष- 36,60,211 मतदाता शामिल हैं. यानी 18 से 35 वर्ष की उम्र के करीब 57.90 लाख मतदाता हैं. यह कुल मतदाताओं का बड़ा हिस्सा है. यही वजह है कि इस बार स्थानीय चुनाव में युवा मतदाता राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. 

राजस्थान निकाय चुनाव 2026

Photo Credit: IANS

नगर निगम चुनाव में युवा मतदाताओं की भूमिका और भी अहम हो सकती है. निकाय चुनाव में पार्षद बनने के लिए न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है. यानी 21 साल की उम्र पूरी कर चुका युवा अन्य कानूनी योग्यताएं पूरी करने पर सीधे पार्षद का चुनाव लड़ सकता है. यही वजह है कि इस बार निकाय चुनावों में युवा चेहरों पर दांव खेला गया है.

बागियों को रोकने की सबसे बड़ी चुनौती

बीजेपी और कांग्रेस दोनों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतरने वाले बागियों को रोकने की है. टिकट वितरण के दौरान कई वार्डों में दावेदारों के बीच खींचतान सामने आई. कई जगह टिकट नहीं मिलने वाले दावेदारों ने पहले ही निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं. ऐसे में 3 सितंबर तक नाम वापसी का समय दोनों प्रमुख दलों के लिए बेहद अहम रहने वाला है.

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खासकर जयपुर जैसे बड़े नगर निगमों में टिकट वितरण को लेकर अंतिम समय तक चली कवायद के बाद अब पार्टी नेतृत्व की नजर उन दावेदारों पर रहेगी, जिन्होंने टिकट नहीं मिलने के बाद पर्चा दाखिल किया है. नामांकन के अंतिम दिन तक बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने कई जगह सार्वजनिक तौर पर पूरी सूची जारी करने के बजाय उम्मीदवारों को सीधे सिंबल देने की रणनीति अपनाई. इसके पीछे टिकट को लेकर संभावित बगावत को नियंत्रित करने की रणनीति मानी जा रही है.

BAP-RLP की महत्वपूर्ण भूमिका

बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई वाले वार्डों में छोटे दलों और निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. आरएलपी, भारत आदिवासी पार्टी, एआईएमआईएम, एसडीपीआई, आम आदमी पार्टी और दूसरे दल अलग-अलग इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. खास तौर पर आदिवासी इलाकों, मुस्लिम बहुल शहरी क्षेत्रों और उन वार्डों पर छोटे दलों की नजर है जहां बीजेपी-कांग्रेस के बीच मुकाबला करीबी माना जा रहा है. 

नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है. 10,245 वार्डों में आरक्षण की प्रक्रिया के बाद करीब 3,356 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं. यानी इस चुनाव में इन सीटों पर महिलाएं सीधे पार्षद पद के चुनाव मैदान में हैं. यह आरक्षण केवल सामान्य श्रेणी तक सीमित नहीं है. आरक्षित वर्गों में भी महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है. यानी इस चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व शहरी राजनीति में एक बड़ा फैक्टर रहने वाला है. 309 निकायों के प्रमुख पदों के आरक्षण में भी महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है. कुल 101 निकाय प्रमुख पद महिलाओं के लिए आरक्षित बताए गए हैं. वहीं 10 नगर निगमों में से छह महापौर पद महिलाओं के लिए आरक्षित है. 

इस बार चार बड़े नगर निगमों में महापौर का पद अनारक्षित है. जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर निगमों में किसी भी वर्ग का पुरुष या महिला उम्मीदवार महापौर पद की दौड़ में शामिल हो सकता है. बाकी छह नगर निगमों में आरक्षण की अलग-अलग श्रेणियां लागू हैं. यही कारण है कि जयपुर सहित इन बड़े निगमों के चुनाव पर पूरे प्रदेश की नजर है. 

नामांकन के बाद आगे प्रक्रिया

  • 1 सितंबर- नामांकन पत्रों की जांच

  • 3 सितंबर- नाम वापसी की अंतिम तारीख
  • 4 सितंबर- चुनाव चिन्हों का आवंटन
  • 9 सितंबर- पहले चरण का मतदान
  • 11 सितंबर- दूसरे चरण का मतदान
  • 14 सितंबर- मतगणना
  • 21 सितंबर- महापौर, सभापति और अध्यक्ष का चुनाव
  • 22 सितंबर- उपाध्यक्ष, उपसभापति और उपाध्यक्ष का चुनाव

नामांकन दाखिल होने के बाद अब राजनीतिक दलों की रणनीति का अगला चरण शुरू होगा. कौन नाम वापस लेता है, कौन पार्टी के साथ रहता है और कौन बागी होकर चुनाव लड़ता है इसका फैसला 3 सितंबर तक होगा. इसके बाद 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटित होते ही हर वार्ड में मुकाबला पूरी तरह साफ हो जाएगा. राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में अब टिकट का संघर्ष खत्म हो चुका है. अब सीधी लड़ाई वोट की है. जो उम्मीदवार जनता को लुभाने में कामयाब रहेगा वही जीत दर्ज करेगा.

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