- प्रेमानंद महाराज के आश्रम में शिष्यों के पुराने मोबाइल फोन रखकर नए मोबाइल और सिम कार्ड दिए जाते थे
- आश्रम में साधकों के परिवार और दोस्तों से संपर्क पर पाबंदियां थीं, जिससे उनकी बाहरी दुनिया से दूरी बन जाती थी
- रसिक दुलारी की मौत की जांच में पुलिस उसकी मानसिक स्थिति और उसके तनाव या अवसाद की जांच कर रही है
वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की मौत के मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए सवाल सामने आ रहे हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आश्रम में शिष्य या साधक के तौर पर रहने वाले लोगों के मोबाइल फोन और बाहरी संपर्क को लेकर एक तय व्यवस्था थी. सूत्रों का दावा है कि आश्रम में शिष्य या साधक बनने के बाद उनके पुराने मोबाइल फोन रख लिए जाते थे और उन्हें आश्रम की तरफ से नए मोबाइल फोन और सिम कार्ड दिए जाते थे.
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आखिर पुराने मोबाइल फोन अपने पास रखने और नए मोबाइल-सिम देने की जरूरत क्यों पड़ती थी? इन मोबाइल और सिम का इस्तेमाल किस तरह होता था और क्या इनकी कोई निगरानी या रिकॉर्डिंग व्यवस्था थी? पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आश्रम में रहने वाले साधकों के मोबाइल और उनके पुराने संपर्कों से जुड़ी जानकारी कहां और किसके पास रहती थी.
आश्रम के लोग बाहर की दुनिया से कितना अलग रहते थे?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ मोबाइल बदलने की बात ही नहीं है, बल्कि आश्रम में रहने वाले शिष्यों और साधकों के बाहर के लोगों से संपर्क को लेकर भी पाबंदियां थीं. सूत्रों के मुताबिक घरवालों और दोस्तों से बातचीत सीमित थी या कई मामलों में इसकी अनुमति नहीं होती थी. यही वजह है कि पुलिस अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि आश्रम में रहने वाले लोगों का अपने परिवार और पुराने दोस्तों से संपर्क किस स्तर तक था और उन्हें बाहर की दुनिया से कितना अलग रखा जाता था.
रसिक दुलारी की मौत के मामले में यही सवाल सबसे अहम बन गया है. पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या रसिक दुलारी किसी तरह के मानसिक दबाव या अवसाद से गुजर रहा था? अगर ऐसा था, तो क्या उसने कभी अपने परिवार या दोस्तों से इसका जिक्र किया था? क्या उसके पास ऐसे लोगों से खुलकर बात करने का मौका था जो उसे लंबे समय से जानते थे?
क्या रसिक दुलारी डिप्रेशन में थे?
दरअसल, किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति को समझने में उसके परिवार और पुराने दोस्तों की भूमिका काफी अहम हो सकती है. अगर रसिक दुलारी अपने घरवालों या करीबी दोस्तों से लगातार संपर्क में रहता, तो संभव है कि उसके व्यवहार में आए बदलाव, तनाव या परेशानी की जानकारी समय रहते सामने आ जाती. जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि रसिक दुलारी आश्रम में कब आया, उससे पहले उसकी जिंदगी कैसी थी और आश्रम में आने के बाद उसके व्यवहार में क्या बदलाव आया. पुलिस उसके पुराने मोबाइल फोन, नए सिम, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट और दूसरे डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसकी आखिरी दिनों में किन लोगों से बातचीत हुई थी.
आश्रम में नए मोबाइल और सिम देने की व्यवस्था क्यों?
इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आश्रम में नए मोबाइल और सिम देने की व्यवस्था सभी शिष्यों और साधकों के लिए थी या कुछ खास लोगों के लिए. अगर यह व्यवस्था व्यापक स्तर पर लागू थी तो इसके पीछे आश्रम की आधिकारिक नीति क्या थी, यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा. रसिक दुलारी के परिवार और उसके करीबी लोगों से भी पुलिस पूछताछ कर रही है कि क्या उसने कभी आश्रम से जुड़ी कोई परेशानी, मानसिक तनाव या किसी तरह की शिकायत उनके सामने रखी थी. परिवार के लोगों के बयान से पुलिस को उसके आश्रम में आने से पहले और बाद की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है.
क्या परिवार को देते हैं साधक की मानसिक स्थिति की जानकारी?
इस मामले में एक और बड़ा सवाल यह है कि अगर आश्रम में रहने वाले साधकों के बाहरी संपर्क सीमित थे, तो उनकी मानसिक स्थिति की निगरानी किस तरह की जाती थी. क्या किसी साधक के व्यवहार में अचानक बदलाव आने पर परिवार को जानकारी दी जाती थी? क्या कोई काउंसलिंग की व्यवस्था थी? और अगर किसी व्यक्ति को मानसिक परेशानी थी, तो उसे परिवार या विशेषज्ञ से संपर्क कराने की प्रक्रिया क्या थी?
हालांकि इन सभी सवालों के जवाब अभी जांच के बाद ही सामने आएंगे. फिलहाल मथुरा पुलिस की जांच का फोकस रसिक दुलारी की मौत की परिस्थितियों, उसके मानसिक और सामाजिक व्यवहार, आश्रम में उसकी दिनचर्या और उसके मोबाइल तथा डिजिटल संपर्कों पर है.
क्या मौत से पहले बदला हुआ था रसिक दुलारी का व्यवहार?
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मौत से पहले उसकी स्थिति क्या थी और क्या उसके संपर्कों या व्यवहार में कोई ऐसा बदलाव आया था, जिससे उसकी परेशानी का संकेत पहले ही मिल सकता था.मथुरा पुलिस इस मामले में अब तक 85 लोगों के बयान दर्ज चुकी है.
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