- राजस्थान के 10 नगर निगमों में से 9 पर बीजेपी ने कब्जा किया है, केवल बीकानेर में कांग्रेस का महापौर है
- प्रदेश में 204 निकायों के बोर्ड बीजेपी के नेतृत्व में हैं जबकि कांग्रेस के बोर्ड 96 हैं
- चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग और अंदरूनी विवाद दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए चुनौती बनी
जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के महापौर पद के निर्वाचन पूरे होने के साथ ही राजस्थान में सभी 10 निगमों की तस्वीर साफ हो गई है. राजस्थान में सभी 10 नगर निगमों में से 9 पर बीजेपी का महापौर बना है. केवल एक निगम बीकानेर में कांग्रेस अपना महापौर बना पाई है. वहीं, नगर परिषद और पालिका समेत निकायों की बात करें तो बीजेपी का प्रदेश में 204 निकायों में बोर्ड बना है. वहीं कांग्रेस ने 96 निकायों में अपना बोर्ड बनाया है.
पार्षदों के चुनाव का परिणाम आते ही कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियां बोर्ड बनाने की जुगत में जुट गई थी. 14 सितंबर को चुनाव परिणाम आने के साथ ही प्रदेश में बोर्ड बनाने के लिए घमासान देखने को मिला. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने अपने अपने पार्षदों को बाड़ेबंदी में रखा. कई जगह पर विपक्ष ने पार्षदों को अगवा करने, हॉर्सट्रेडिंग के आरोप भी लगाए गए.
क्रॉस वोटिंग का डर सही साबित हुआ
दोनों ही पार्टियों को भीतरघात का डर सता रहा था. दोनों को क्रॉस वोटिंग का डर था और चुनाव में यह डर सही साबित हुआ. कई निकायों में क्रॉस वोटिंग ने समीकरण बदले. दोनों ही पार्टियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा. शुक्रवार को हुए कोटा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के पास 39 पार्षद थे, लेकिन उन्हें 35 मत ही मिले. इसका विरोध करने के लिए कांग्रेस ने आज उपमहापौर चुनाव का बहिष्कार भी किया.
ऐसी ही तस्वीर पाली नगर निगम मेयर चुनाव भी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका बनकर सामने आई, 65 वार्डों में 29 पार्षद जीतने के बाद भी कांग्रेस अपना मेयर नहीं बना पाई. कांग्रेस उम्मीदवार सुमित्रा जैन को मात्र 3 वोट ही मिले, जबकि बागी उम्मीदवार राजबाला हिंगड़ 29 वोट हासिल कर गईं. इसी आपसी लड़ाई में बीजेपी की नमिता बुबकिया 33 वोट लेकर मेयर बन गईं.
मुंडवा नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव ने चौंकाया
वहीं, नागौर नगरीय जिले की मुंडवा नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव ने सबको चौंका दिया. दरअसल, मूंडवा नगर पालिका में कुल 25 वार्ड हैं. बीजेपी ने 10, कांग्रेस ने 3, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने सात और पांच निर्दलीय पार्षदों ने यहां जीत दर्ज की. बीजेपी ने अध्यक्ष पद के लिए गीता देवी को प्रत्याशी बनाया था. बीजेपी के पास 10 निर्वाचित पार्षद होने के बावजूद गीता देवी को एक भी वोट नहीं मिला. यानी बीजेपी के 10 पार्षदों में से भी किसी ने पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं किया.
बीजेपी ने पूरे प्रदेश में पिछले चुनावों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निकाय चुनाव में रोड शो के जरिए वोट साधे. बीजेपी ने पूरी प्लानिंग के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन अंदरखाने क्रॉस वोटिंग की तस्वीरें बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों के लिए बड़ा सबक है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन ने भी शुक्रवार को राजस्थान दौरे के दौरान पार्टी के नेताओं से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने भी पार्टी नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि वे अहंकार में ना रहे.
नितिन नबीन की पार्टी नेताओं को नसीहत
नितिन नबीन ने साफ कहा कि यदि किसी भी सांसद या विधायक की सिफारिश के आधार पर किसी को टिकट मिलता है, और यदि वह पार्टी के खिलाफ हो जाता है तो इसकी जिम्मेदारी सिफारिश करने वाले नेता की ही मानी जाएगी.
वहीं, कांग्रेस इस हार और क्रॉस वोटिंग का आत्ममंथन करती हुई नजर नहीं आ रही है. कांग्रेस में आत्ममंथन की जगह गुटबाजी और बयानबाजी हावी है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इशारों-इशारों में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर निशाना साधते हुए ही कहा कि अगर हम भी रो शो करते तो शायद बेहतर परिणाम आ सकते थे. कांग्रेस को वोट ना मिलकर निर्दलीयों को मिले हैं, इस पर भी पार्टी को विचार करना चाहिए.
कांग्रेस में सियासी बयानबाजी तेज
चुनावी बिसात बिछने से पहले ही कांग्रेस में सियासी बयानबाजी हावी हो गई थी, पायलट और गहलोत के बीच की गुटबाजी के साथ ही अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा के बीच के कोल्ड वार ने निकाय चुनाव में कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया. वहीं बीजेपी पंचायतीराज चुनाव के लिए कमर कस चुकी है. राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन सभी नेताओं को निर्देश देकर गए हैं. वहीं, कांग्रेस आरोप-प्रत्यारोप के दौर में उलझी.है. पंचायतीराज के नतीजे तो वक्त ही बताएगा लेकिन फिलहाल निकाय चुनाव से दोनों पार्टियां क्या सबक ले रही है, यह अहम है.
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