- राजस्थान के नोहर नगर पालिका में बीजेपी का सियासी दांव
- बीजेपी के 2 पार्षदों के बावजूद भी यहां बोर्ड बनाने में रहा सफल
- कुल 40 सीटों में कांग्रेस के पास थी 20 सीटें, फिर बोर्ड नहीं बना सकी पार्टी
बहुमत के करीब की तो बात छोड़िए 40 वार्डों में महज 2 सीटों आने के बाद भी बीजेपी ने नोहर नगर पालिका में अपना बोर्ड बना पाने में सफल रहा. राजस्थान के 309 निकाय के चुनाव में हनुमानगढ़ जिले की नोहर नगर पालिका चुनाव में बीजेपी ने राजनीतिक दांव चलकर विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया. नोहर नगर पालिका में दो पार्षद होने के बाद भी बीजेपी के बोर्ड बनना बता रहा है की नोहर की सियासत में पूर्व मंत्री मंत्री मेहरूनिशा टाक और पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया का सियासी कौशल कांग्रेस के चाचान परिवार की राजनीति पर भारी पड़ा है.
मात्र 2 पार्षद, फिर भी बीजेपी का बोर्ड
दरअसल नोहर नगरपालिका का नतीजा राजस्थान के निकाय चुनाव का सबसे दिलचस्प राजनीतिक समीकरण बन गया है. 40 वार्डों में कांग्रेस के 20 पार्षद जीते, बीजेपी के खाते में सिर्फ 2 सीटें आईं और 18 निर्दलीय जीतकर आए. सामान्य गणित में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत के करीब थी लेकिन अध्यक्ष चुनाव तक पहुंचते-पहुंचते तस्वीर बदल गई. बीजेपी की हाजन खातून टाक ने 18 निर्दलीयों को अपने साथ जोड़कर आंकड़ा 20 तक पहुंचा दिया. कांग्रेस के सुमित चाचाण के पास अपने 20 पार्षद थे. मतदान हुआ तो दोनों को 20-20 वोट मिले. बहुमत का 21वां वोट किसी को नहीं मिला और आखिरकार लॉटरी में हाजन खातून टाक के नाम की पर्ची निकल गई. इस तरह दो पार्षदों वाली बीजेपी ने नोहर में बोर्ड बना लिया.
लॉटरी से मिली बीजेपी को जीत
चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के पास 20 पार्षद थे. उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती 18 निर्दलीयों में से समर्थन जुटाने की थी. दूसरी तरफ बीजेपी के पास सिर्फ दो पार्षद थे इसलिए उसे पूरा खेल निर्दलीयों के सहारे ही बनाना था. अध्यक्ष चुनाव से पहले दोनों खेमों ने अपने-अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी की. आखिर बीजेपी समर्थित खेमे ने सभी 18 निर्दलीयों को साथ लेकर कांग्रेस के बराबर 20 का आंकड़ा खड़ा कर दिया. मतदान में यही संख्या कायम रही. यानी नोहर में किसी बड़े पाला बदल की जरूरत नहीं पड़ी बल्कि मुकाबला बराबरी तक पहुंचाकर बीजेपी ने चुनाव को लॉटरी के मोड़ पर ला दिया.
चाचाण और टाक परिवारों का द्वंद
नोहर की स्थानीय राजनीति में चाचाण और टाक परिवारों के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है. इस बार चेयरमैन पद के दावेदार कांग्रेस के सुमित चाचाण विधायक अमित चाचाण के भाई थे. दूसरी तरफ बीजेपी की हाजन खातून मेहरूनिशा टाक की सास चुनावी मैदान में थी. उनके पक्ष में पूर्व राज्य मंत्री मेहरुन्निसा टाक का राजनीतिक प्रभाव और बीजेपी के पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया की सक्रियता भी महत्वपूर्ण रही. चुनाव परिणाम के बाद हाजन खातून टाक का मटोरिया भवन पहुंचना बीजेपी के स्थानीय नेताओं के बीच राजनीतिक समन्वय को दिखाता है.
एक भी निर्दलीय को नहीं साध सकी कांग्रेस
लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस के पास अपने 20 पार्षद थे लेकिन वह 18 निर्दलीयों में से किसी को अपने पक्ष में नहीं ला सकी. दूसरी तरफ बीजेपी ने अपने कमजोर संख्या बल की भरपाई निर्दलीयों के पूरे समर्थन से कर ली. यह आंकड़ा अपने आप में नोहर के चुनाव की पूरी तस्वीर बताता है.
इस जीत के मायने समझिए
स्थानीय राजनीतिक नजरिए से देखें तो हाजन खातून टाक की जीत सिर्फ लॉटरी का परिणाम नहीं थी. लॉटरी अंतिम फैसला थी लेकिन उससे पहले 18 निर्दलीयों को एक साथ खड़ा करना सबसे बड़ा राजनीतिक काम था. पूर्व राज्य मंत्री मेहरुन्निसा टाक और पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया की सक्रियता ने बीजेपी समर्थित खेमे को एकजुट रखने में भूमिका निभाई. चुनाव परिणाम के बाद मटोरिया भवन पर जीत के जश्न की तस्वीरें इस परिणाम के महत्व को दर्शाती हैं. नोहर में तीसरी बार अध्यक्ष पद का फैसला लॉटरी से हुआ है इससे पहले 2005 और 2018 में भी बराबरी के बाद लॉटरी से अध्यक्ष चुना गया था.
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