राजस्थान में आगामी निकाय चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा. राज्यभर में कुल 309 शहरी स्थानीय निकाय प्रमुख पदों में से 102 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जो सभी श्रेणियों में 33 फीसदी आरक्षण के मानदंड के अनुसार हैं. लेकिन महिला नेतृत्व की यह कवायद सिर्फ निकाय चुनावों तक सीमित नहीं दिखती. बीजेपी पंचायत और निकाय चुनावों के जरिए महिला नेतृत्व तैयार करने की रणनीति पर काम कर रही है. 2028 में विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2029 में लोकसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में महिला नेतृत्व को तैयार करने की यह कवायद आने वाले चुनावों की तैयारी के तौर पर भी देखी जा रही है.
10 में से 6 नगर निगमों में महिला मेयर
अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, पाली, कोटा और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में महिला मेयर बनेंगी. निकाय चुनावों में 10 नगर निगमों में से 6 सीटों की लॉटरी महिलाओं के नाम हुई है. बीजेपी इसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम और जमीनी स्तर पर महिला नेतृत्व तैयार करने की अपनी रणनीति से जोड़ रही है.

झाबर सिंह खर्रा
'वूमन आउट ऑफ द बॉक्स करती हैं'
राजसमंद से बीजेपी विधायक दीप्ति माहेश्वरी का कहना है कि महिला होने के नाते हम जानते हैं. महिला प्रतिनिधित्व बीजेपी की प्राथमिकता रही है. उन्होंने अपने विधायक के तौर पर अनुभव साझा करते हुए महिलाओं के अलग नजरिए की बात कही. उन्होंने आगे कहा कि जब हम हॉस्पिटल के दौरे पर जाते हैं तो हम देखते हैं और निरीक्षण करते हैं कि वीमेन वार्ड में किस तरह की हाइजीन है, क्योंकि महिला होने के नाते हम जानते हैं उसके क्या नतीजे हो सकते हैं. महिलाओं को महिलाओं की सामंजस्य से एम्पथी रहती है, वो ऐसे चीज़ों को देखती हैं जो शायद पुरुष नहीं देख पाए. मैं बच्चों के लिए एक अकादमिक फेयर करती हूं. Women Out of the Box होती हैं तो कुछ Out Of The Box करती हैं.
कामां से बीजेपी विधायक नौक्षम चौधरी ने भरतपुर में महिला नेतृत्व को लेकर हो रहे बदलाव को महत्वपूर्ण बताया. उनका कहना है कि महिलाओं को राजनीति में आगे आने का अवसर मिलना एक बड़ा संदेश है. नौक्षम चौधरी ने कहा कि अभी आपने देखा लाटरी आई है. भरतपुर से मैं हूं और डीग में पहली बार महिला जिला प्रमुख बनेगी. जनरल केटेगरी से तो ये एक बड़ा मैसेज देने को है. हमारे सोशल सिस्टम को महिलाओं को आगे आने का अवसर मिल रहा है. ये तो 50 प्रतिशत से ज़्यादा है. महिलाओं का परचम लहराएगा. महिलाओं को राजनीति में आना चाहिए, महिलाएं अच्छा सन्देश दे सकती हैं. 2028 का इंतजार है. यह एक सेमीफइनल है. मुख्यमंत्री के ज़िले में एक महिला प्रमुख बानगी, ये एक बड़ा सन्देश है. मैं जब बाहर निकलती हूं. मैं अकेली महिला होती हूं, लेकिन अब एक और महिला मेरे साथ होगी.
विधानसभा और संगठन में महिलाओं की भागीदारी कितनी?
आंकड़े बताते हैं कि विधानसभा और पार्टी संगठन में महिलाओं को अब तक बहुत ज्यादा प्राथमिकता नहीं मिली है. 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 28 महिलाओं को टिकट दिया, जो उसके कुल टिकटों का 14.1 फीसदी हिस्सा था. वहीं बीजेपी ने 20 महिलाओं को टिकट दिया, जो उसके कुल टिकटों का 10 फीसदी था. 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में 18 महिला विधायक हैं, जिनमें बीजेपी और कांग्रेस के अलावा 2 निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं. राजस्थान की बीजेपी स्टेट वर्किंग कमेटी में कुल 154 सदस्यों में 20 महिला नेता शामिल हैं. यानी इसमें महिलाओं की भागीदारी करीब 13 फीसदी है.

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बीजेपी की ओर से सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गेहलोत ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि हमको मातृ शक्ति के पुजारी बनने की आवश्यकता है, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं चाहती. वो सर्वेसर्वा सोनिया गांधी ही कांग्रेस में रहे और कांग्रेस में और कोई नहीं आए. वो कांग्रेस की राजमाता के पुजारी हैं.
वहीं कांग्रेस के बायतू विधायक हरीश चौधरी ने बीजेपी पर महिलाओं को लेकर हमला बोला. हरीश चौधरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने महिलाओं का अपमान किया है. महिलाओं का भविष्य किससे बनेगा. शिक्षा से बनेगा रोज़गार से बनेगा. महिलाओं का भविष्य राजस्थान सरकार कुचल चुकी है.
309 में से 102 पद महिलाओं के लिए आरक्षित
पूरे राज्य में कुल 309 शहरी स्थानीय निकाय प्रमुख पदों में से 102 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. यह सभी श्रेणियों में 33 फीसदी आरक्षण के नियम के अनुसार है.
- सामान्य / अनारक्षित: 188 पदों में से 62 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं.
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 60 पदों में से 21 पद OBC महिलाओं के लिए आरक्षित हैं.
- अनुसूचित जाति (SC): 50 पदों में से 16 पद SC महिलाओं के लिए आरक्षित हैं.
- अनुसूचित जनजाति (ST): 11 पदों में से 3 पद ST महिलाओं के लिए आरक्षित हैं.
राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनावों के जरिए महिला नेतृत्व को मौका जरूर मिलेगा. लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि चुनाव खत्म होने के बाद महिलाएं राजनीतिक नेताओं के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को कितनी सफलतापूर्वक निभाती हैं.
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