- अजमेर की रोहिणी गुर्जर ने 15 साल बाद पढ़ाई शुरू कर राजस्थान लोक सेवा आयोग की आरएएस भर्ती परीक्षा में सफलता पाई
- पति के निधन के बाद ससुराल और गांव के लोगों से कोई सहयोग नहीं मिला, उन्हें डायन तक कहा गया था
- परीक्षा से पहले उनकी बड़ी बेटी की मृत्यु हो गई, बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई जारी रखी
यह सक्सेस स्टोरी राजस्थान के अजमेर की रोहिणी गुर्जर की है, जो दुखों का पहाड़ चीरकर राजस्थान लोक सेवा आयोग की आरएएस भर्ती-2024 परीक्षा में राजस्थान अकाउंट्स सर्विस अधिकारी बनीं हैं. वो कहती हैं कि ''पति के निधन के बाद गांव में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था. 15 साल बाद पढ़ाई शुरू की. परीक्षा से करीब 22 दिन पहले बड़ी बेटी की मौत हो गई. सबकुछ खो देने के बाद लगा अब क्या करूं. फिर छोटी बेटी का चेहरा देख हिम्मत की और पढ़ाई जारी रखी. आरएएस की परीक्षा दी. सितंबर 2026 में अफसर बनने में सफल रही हूं. उम्मीद है आगे समाज में कुछ सकारात्मक बदलाव ला पाऊंगी."
पति की मौत ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखा और आखिरकार सफलता
हासिल कर ली.

15 साल बाद फिर उठाई किताबें, पति और बेटी को खोने के बाद भी नहीं टूटी रोहिणी
गांव की पहली लड़की थीं, जिसने बीए किया
एनडीटीवी से खास बातचीत में रोहिणी गुर्जर बताती हैं कि उन्होंने 2006 में बीए किया था. वह अपने गांव घूघरा की पहली लड़की थीं, जिसने बीए तक पढ़ाई की थी. उनके समाज और गांव में लड़कियों को ज्यादा नहीं पढ़ाया जाता था. उनके पिता फौज में थे, इसलिए परिवार उनके साथ बाहर रहा और उन्हें पढ़ने का अवसर मिला. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और एक निजी स्कूल में पढ़ाने लगीं.
-
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
शादी के बाद पढ़ाई छूटी, फिर जिंदगी ने ली कठिन करवट
उन्होंने बताया कि करीब 22 साल की उम्र में, वर्ष 2011 में, उनकी शादी पास के गांव नारेली में हुई. शादी के करीब डेढ़ साल बाद, 2013 में उनकी पहली बेटी का जन्म हुआ. ससुराल का माहौल बहुत अधिक सहयोगी नहीं था. परिवार काफी रूढ़िवादी था. ग्रामीण परिवेश में आमतौर पर बहुओं को अपनी इच्छा के अनुसार आगे बढ़ने की उतनी आजादी नहीं मिलती. शादी के बाद वह घर संभालने लगीं. वर्ष 2021 में उनके पति को दिसंबर में हार्ट अटैक आया. करीब एक-दो महीने इलाज चला, लेकिन 18 फरवरी 2021 को उनका निधन हो गया.
पति की मौत के बाद ससुराल से नहीं मिला सपोर्ट
रोहिणी बताती हैं कि पति की मौत के बाद ससुराल में उन्हें कोई विशेष सहयोग नहीं मिला. उनकी दो बेटियां थीं और परिवार में यह सोच थी कि बेटा नहीं है तो वंश कैसे आगे बढ़ेगा. इस बात को लेकर उन्हें लगातार ताने सुनने पड़ते थे. इतना ही नहीं, पति की मौत का जिम्मेदार भी उन्हें ही ठहराया जाता था. गांव के लोग उन्हें डायन तक कहते थे. लोग कहते थे कि वह अपने पति को खा गईं.
15 साल बाद दोबारा शुरू की पढ़ाई
धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभाला. उनकी दादी सास 95 वर्ष की थीं और पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन उन्होंने रोहिणी का भरपूर साथ दिया. उन्होंने रोहिणी को पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया और कहा, "बेटा, तू पढ़." पति की मौत के करीब छह महीने बाद, नवंबर-दिसंबर 2021 में रोहिणी ने करीब 15 साल बाद दोबारा पढ़ाई शुरू की. उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. परिवार का पूरा परिवेश ग्रामीण था, इसलिए उन्हें तैयारी की भी विशेष समझ नहीं थी. उनके शब्दों में, वह अंधेरे में तीर चला रही थीं. इस दौरान उनके भाई नरेंद्र गुर्जर और दादी सास पुष्पा देवी लगातार उनका हौसला बढ़ाते रहे.

पहली बार मेंस में रह गईं 10 नंबर से पीछे
रोहिणी ने पहली बार 2021 में परीक्षा दी. उनका प्रीलिम्स क्लियर हो गया, लेकिन मेंस में वह 10 अंकों से पीछे रह गईं और चयन नहीं हो सका. इसके बाद उन्होंने 2023 में दोबारा परीक्षा दी और जयपुर में रहकर तैयारी शुरू कर दी. लेकिन जीवन के उतार-चढ़ाव अभी खत्म नहीं हुए थे. 2023 की मेंस परीक्षा पहले 20-21 जनवरी को होनी थी. परीक्षा से करीब 10-12 दिन पहले, 14 जनवरी 2024 को उनकी दादी सास का निधन हो गया. वह उनके लिए सबसे बड़ा सहारा थीं. उनके जाने से रोहिणी को गहरा झटका लगा.
बेटी की मौत ने तोड़ दिया, फिर भी नहीं मानी हार
किस्मत ने साथ दिया और जनवरी में प्रस्तावित परीक्षा की तारीख आगे बढ़कर 21 जुलाई 2024 हो गई. इससे उन्हें तैयारी के लिए करीब छह महीने का अतिरिक्त समय मिल गया. दादी सास के निधन के बाद बेटियों की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. ससुराल में कोई संभालने वाला नहीं था. उन्होंने फिर से तैयारी शुरू की, लेकिन संघर्ष अभी बाकी था.
26 जून को वह अजमेर में अपनी बेटियों के पास आई थीं. 28 जून को अचानक उनकी बड़ी बेटी की तबीयत खराब हो गई. उसे उल्टियां हुईं, जिसके बाद रोहिणी उसे अस्पताल लेकर गईं. 29 जून को उनकी 10 वर्षीय बेटी ने उनकी गोद में दम तोड़ दिया. रोहिणी कहती हैं कि उस समय उन पर क्या बीती, इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. उन्हें लगा कि जिंदगी की सारी उम्मीदें खत्म हो गई हैं. उन्होंने जितनी परीक्षाएं दी थीं और जितनी मेहनत की थी, सब बेकार लगने लगा था. 29 जून को बेटी का निधन हुआ था और 20-21 जुलाई को उनकी मेंस परीक्षा थी. उन्होंने तय कर लिया था कि वह परीक्षा नहीं देंगी. बेटी को गए महज 20 दिन हुए थे, ऐसे में परीक्षा देने के बारे में सोचना भी मुश्किल था.
हादसे में घायल हुईं, फिर भी परीक्षा देने पहुंचीं
बेटी के निधन के बाद गांव में होने वाली रस्में करीब 12 दिन तक चलीं. इसके बाद उनका भाई उन्हें मायके ले गया. इस दौरान उनकी तबीयत भी खराब रहने लगी. अस्पताल से लौटते समय उनका और उनकी भाभी का सड़क हादसा हो गया. एक वाहन ने उनकी गाड़ी को सामने से टक्कर मार दी. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. उनके चेहरे पर काफी सूजन थी और आंखों में भी चोट लगी थी. डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दिनों तक आंखें न खोलने की सलाह दी. वह करीब पांच दिन अस्पताल में भर्ती रहीं. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उनके भाई और परिवार के लोगों ने उन्हें समझाया कि वह सिर्फ परीक्षा देने चली जाएं. इसके बाद उन्होंने अपनी छोटी बेटी भूमि खटाना का चेहरा देखा और फैसला किया कि वह परीक्षा जरूर देंगी.
रोहिणी कहती हैं, "मैं कुछ बनूंगी तभी इसका भविष्य बेहतर होगा."
इसके बाद जो हुआ, वह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था. उनका चयन हो गया. आज रोहिणी और उनकी छोटी बेटी भूमि खटाना ही उनका परिवार हैं. उनके पूरे सफर में भाई नरेंद्र गुर्जर का बहुत बड़ा योगदान रहा. वहीं, दादी सास पुष्पा देवी ने उस समय उनका संबल बनने का काम किया, जब उन्हें आगे बढ़ने की कोई उम्मीद दिखाई नहीं देती थी. रोहिणी कहती हैं कि अब वह लड़कियों के लिए कुछ करना चाहती हैं. वह चाहती हैं कि समाज की रूढ़िवादी सोच खत्म हो और बेटियों को पढ़ने-लिखने तथा आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले. उनके मुताबिक, पूरे संघर्ष भरे सफर के दौरान यही एक विचार उन्हें बार-बार आगे बढ़ने और पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करता रहा.
यह भी पढ़ें- Success Story: दोनों हाथ खोने वाले राजवीर गुर्जर बने तहसीलदार, RAS परीक्षा में कैसे लिखा?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं