झालावाड़ में खेती के क्षेत्र में एक नई और प्रेरणादायक पहल सामने आई है. मिश्रोली गांव के किसान मुकेश पाटीदार ने पारंपरिक खेती से हटकर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर जिले में नई मिसाल पेश की है. खास बात यह है कि उन्होंने इस विदेशी फल की खेती किसी कृषि संस्थान से नहीं, बल्कि यूट्यूब पर वीडियो देखकर सीखी. अब उनके खेत में लगाए गए करीब 400 पौधे फल देने लगे हैं, और आने वाले 20 से 25 वर्षों तक उत्पादन मिलने की उम्मीद है.
वीडियो देखकर जानकारी जुटाई
किसान मुकेश पाटीदार ने बताया कि उनके बेटे राहुल पाटीदार ने ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़े वीडियो देखकर इसकी जानकारी जुटाई, और उन्हें इस फसल को अपनाने की सलाह दी. इसके बाद अक्टूबर 2025 में संतरे के बगीचे की खाली जमीन पर लगभग 400 पौधे लगाए गए. पौधों को सीमेंट के खंभों के सहारे विकसित किया गया, और अब इनमें फल आना शुरू हो गया है.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
ड्रैगन फ्रूट में पानी कम लगता है
उन्होंने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पानी की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है. खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई गई है तथा प्रत्येक पौधे के बीच 8 से 10 फीट की दूरी रखी गई है. शुरुआती वर्षों में पौधों के बीच खाली स्थान पर अन्य नकदी फसलें भी उगाई जा रही हैं, जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है.

झालावाड़ का किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर हो रहा मालामाल. (NDTV)
विदेशों में भी भारी मांग
किसान के अनुसार फिलहाल एक पौधे से लगभग एक किलो फल मिल रहा है, लेकिन पौधों के पूरी तरह परिपक्व होने के बाद प्रति पौधा 8 से 10 किलो तक उत्पादन होने की संभावना है. बाजार में ड्रैगन फ्रूट की कीमत लगभग 200 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है. इसकी मांग कोटा, जयपुर और इंदौर जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी है, जिससे यह किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन सकता है.
किसानों के लिए प्रेरणा
मुकेश पाटीदार का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट की सबसे बड़ी चुनौती फफूंद जनित रोग हैं. इससे बचाव के लिए समय-समय पर कॉपरयुक्त दवाओं का छिड़काव किया जाता है. नई तकनीक और आधुनिक सोच के साथ की गई यह पहल अब जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है और बागवानी की दिशा में नए अवसर खोल रही है.
यह भी पढ़ें: प्रेमानंद महाराज से 'चायवालाज' के फाउंडर ने लिया था आशीर्वाद, 'तत्सुखे सुखित्वं' पुस्तक भेट की थी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं