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प्रेमानंद महाराज से 'चायवालाज' के फाउंडर ने ल‍िया था आशीर्वाद, 'तत्‍सुखे सुख‍ित्‍वं' पुस्‍तक भेट की थी

मात्र 30 साल की उम्र में दुन‍िया छोड़कर जाने वाले रोह‍ित शर्मा पूरी तरह से अध्‍यात्‍म के मार्ग पर चल द‍िए थे. वे प्रेमानंद महाराज से बहुत प्रभावित थे.

प्रेमानंद महाराज से 'चायवालाज' के फाउंडर ने ल‍िया था आशीर्वाद,  'तत्‍सुखे सुख‍ित्‍वं' पुस्‍तक भेट की थी
चायवालाज के फाउंडर रोहित शर्मा प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद लिया था.
सोशल मीडिया.

'चायवालाज' के फाउंडर रोह‍ित शर्मा की लाश शनिवार को दौसा में उनके घर पर फंदे पर लटकते हुए म‍िली. वे बिजनेस छोड़कर अध्यात्म की राह पर चल दिए थे.  रोहित शर्मा IIT बाबा के संपर्क में भी थे. संत-महात्‍माओं से भी म‍िलते जुलते थे. उनके इंस्‍टाग्राम पर पोस्‍ट से पता चला क‍ि जनवरी में उन्होंने वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से भी आशीर्वाद ल‍िया था.

प्रेमानंद महाराज को पुस्तक दी थी 

रोहित ने प्रेमानंंद महराज को अपनी पुस्‍तक भेट की थी. इसका वीड‍ियो उन्होंने इंस्‍टाग्राम पर पोस्‍ट क‍िया था. इंस्‍टाग्राम पर वीड‍ियो डालते हुए कैप्‍शन लिखा, "परम पूज्य प्रेमानंद जी के करुणामय करकमलों से 'तत्सुखे सुखित्वं' को कल दिव्य आशीर्वाद प्राप्त हुआ. प्रेम और आनंद के सागर में स्नात होकर यह पुस्तक और अधिक प्रेममयी बन गयी है, निश्चय ही यह प्रत्येक हृदय में प्रेम की दिव्य लौ प्रज्वलित करेंगी." 

प्रेमानंद महाराज का वीडियो किया था पोस्ट 

रोह‍ित शर्मा ने प्रेमानंद महाराज का दूसरा पोस्‍ट क‍िया था, ज‍िसमें प्रेमानंद महाराज नॉनवेज नहीं खाने की सलाह दे रहे हैं.  रोह‍ित शर्मा ने इस वीड‍ियो को सोशल मीड‍िया पर पोस्‍ट क‍िया था. रोह‍ित शर्मा ने ल‍िखा, "नॉनवेज खाने वालों के लिए पूज्य महाराज जी के यह शब्द आप सभी को सुनना चाहिए. वृन्दावन यात्रा के दौरान वृंदावन में विराज रहे भारत के बड़े ही दिव्य संत परम पूज्य श्री प्रेमानंद जी के आशीर्वचन सुनने और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिला." रोह‍ित ने आईआईटी बाबा के साथ सद्गुरु रितेश्वर महाराज से भी आशीर्वाद ल‍िया था. 

फंदे पर लटकते हुए मिली थी लाश 

'चायवालाज' के नाम से मसहूर रोह‍ित शर्मा राजस्‍थान के दौसा के रहने वाले थे. रव‍िवार को उनकी लाश घर में ही फंदे पर लटकते हुए म‍िली थी. उन्होंने मात्र 17 साल की उम्र में स्‍टार्टअप शुरू क‍िया था. जयपुर के मानसरोवर में पहला टी कैफे खोला. उनकी नई सोच और काम करने का तरीका लोगों को पसंद आया था.  धीरे-धीरे उन्होंने कारोबार का विस्तार किया, और जयपुर सहित 7 शहरों में 'चायवालाज' के आउटलेट शुरू किए थे.

सभी आउटलेट बंद कर दिए थे 

चार साल पहले उन्हें ग्लोबल इंडिया बिजनेस फोरम की ओर से एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. व्यवसाय के साथ-साथ वे समाज सेवा के कार्यों में भी सक्रिय रहते थे, और युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते थे.  करीब छह महीने पहले रोहित शर्मा ने अपने सभी आउटलेट 'चायवालाज' बंद कर दिए थे. इसके बाद उन्होंने कारोबार से दूरी बनाकर अध्यात्म की राह चुन ली थी.

आत्महत्या का कारण अब भी रहस्य

पुलिस के अनुसार, आत्महत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है. मामले की जांच की जा रही है. रोहित के पिता हितेंद्र मोहन शर्मा मेडिकल स्टोर चलाते हैं,  जबकि उनकी पत्नी एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं. उनके परिवार में 7 वर्ष का एक बेटा भी है.  डिप्टी एसपी धर्मेंद्र शर्मा का कहना मृतक के पास कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी. 

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