राजस्थान में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम शुक्रवार सुबह से ही श्रीगंगानगर और जयपुर में अशोक चांडक के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. जानकारी के मुताबिक, श्रीगंगानगर में 4 और जयपुर में एक ठिकाने पर छापा मारा गया है. श्रीगंगानगर में अशोक चांडक से जुड़े 4 ठिकानों पर जांच की जा रही है. इनमें शिवा वाइन, चंद्रकला चैरिटेबल ट्रस्ट का कार्यालय और निकुंज विहार और जवाहर नगर स्थित उनके रिश्तेदारों के घर शामिल हैं. जयपुर के वैशाली नगर इलाके में भी चांडक परिवार से जुड़े ठिकाने पर ईडी की टीम दस्तावेज खंगाल रही है.
यह कार्रवाई महादेव ट्रेडिंग/महादेव एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है. इस केस की जांच ईडी के पटना रीजनल ऑफिस द्वारा की जा रही है, जिसकी टीमें राजस्थान, बिहार और दिल्ली समेत कई राज्यों में एक साथ दबिश दे रही हैं.
बिहार में अवैध बालू खनन का आरोप
ईडी के अनुसार, बिहार के बांका जिले में महादेव एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन किया गया. यह कंपनी श्रीगंगानगर के चांडक परिवार की है. कंपनी अशोक चांडक और उनके बेटे राघव चांडक चलाते हैं. जांच के दौरान ईडी ने IIT पटना से बांका जिले के नदी घाटों का जियोस्पेशियल एनालिसिस करवाया. रिपोर्ट में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2022-23 के बीच कंपनी ने बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया, जिसकी अनुमानित कीमत 131 करोड़ रुपये से अधिक है.
8 ठिकानों पर ईडी का सर्च ऑपरेशन
इस संबंध में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून की धारा 66(2) के तहत जानकारी बिहार स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन को साझा की थी. इसके बाद बिहार के खान एवं भू-विज्ञान विभाग ने 21 अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज कराई, जिसकी जांच जारी है. ईडी फिलहाल देशभर में कुल 8 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चला रही है, जिनमें बिहार के बांका और पटना, दिल्ली एनसीआर, और राजस्थान के श्रीगंगानगर व जयपुर शामिल हैं.
कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुका है चुनाव
अशोक चांडक राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है. उसे 2014 में भाजपा ने अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया था. इसके बाद उसने 2018 में कांग्रेस के टिकट पर श्रीगंगानगर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. उसकी पत्नी करुणा चांडक 2019 से 2023 तक श्रीगंगानगर नगर परिषद की सभापति रहीं, जबकि भाई अजय चांडक भी इसी पद पर रह चुके हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव में करुणा चांडक ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली. चुनाव के बाद अशोक और करुणा चांडक ने कांग्रेस छोड़ दी.
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