- राजस्थान सरकार ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को मेडिकल आधार पर जमानत दिए जाने का विरोध किया है
- आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की याचिका दायर की है जिस पर सुनवाई जारी है
- सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से आसाराम के स्वास्थ्य के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है
राजस्थान सरकार ने नाबालिग से रेप के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को मेडिकल आधार पर जमानत दिए जाने का विरोध किया है. आसाराम ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की गुहार लगाई है. इस याचिका पर आज सु्प्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आसाराम की जमानत की अर्जी का विरोध करते हुए उनके स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी. तुषार मेहता ने बताया कि आसाराम ने करीब तीन महीने पहले अयोध्या और काशी विश्वनाथ की यात्रा की थी. उन्होंने अदालत से कहा कि अयोध्या और काशी की यात्रा में आसाराम पैदल चले थे, इसलिए वो फिलहाल स्वस्थ हैं.
आसाराम की अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह जमानत देने के बारे में कोई फैसला राज्य सरकार की रिपोर्ट के आधार पर देगी. अदालत ने कहा कि यदि राज्य यह बताए कि स्वास्थ्य के आधार पर जमानत की आवश्यकता नहीं है तो वह जमानत नहीं देगी. अदालत ने साथ ही कहा कि यदि स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो तो किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए सीमित अवधि की अंतरिम जमानत पर विचार किया जा सकता है.
21 जुलाई को अगली सुनवाई
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि फिलहाल आसाराम का स्वास्थ्य ठीक है. उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि तीन महीने पहले आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ गए थे तथा पैदल चले थे. हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस संबंध में विस्तृत निर्देश लेकर जवाब दाखिल करेगी. अदालत ने आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर राजस्थान सरकार से स्वास्थ्य रिपोर्ट मांगी है. अब इस बारे में अगली सुनवाई अगले सप्ताह 21 जुलाई को होगी.
2013 के मामले में आजीवन कारावास की सजा
यह मामला 2013 में जोधपुर में एक नाबालिग साधिका से दुष्कर्म के मामले में आसाराम की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील से जुड़ा है. राजस्थान हाई कोर्ट ने उनकी सजा बरकरार रखी थी, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है. आसाराम ने जून 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट के मई 2026 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने आसाराम के खिलाफ नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में आईपीसी की धारा 376D (सामूहिक दुष्कर्म)और पॉक्सो अधिनियम की कुछ धाराओं के तहत हुई सजा को रद्द कर दिया था, लेकिन आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत उनकी दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था.
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