- सरकार ने FCRA बिल पर आपत्तियों को दूर करने के लिए गृह मंत्री ने ईसाई संगठनों और राजनीतिक दलों से चर्चा की है.
- बिल के प्रावधान पिछली तारीख से लागू नहीं होंगे, इस आश्वासन के बाद ईसाई संगठनों की शंकाएं कम हुई हैं.
- धारा चौदह बी के अनुसार FCRA पंजीकरण खत्म या खारिज होने पर संगठन का लाइसेंस समाप्त माना जाएगा.
भारत के गैर सरकारी संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे को लेकर नियमों को कड़ा करने वाले FCRA संशोधन बिल पर सरकार ने आपत्तियों को काफी हद तक दूर कर लिया है. इसकी कमान खुद गृह मंत्री अमित शाह ने संभाली है, जिन्होंने बिल के प्रावधानों को लेकर आशंकित ईसाई संगठनों के साथ ही राजनीतिक दलों से भी बातचीत कर उनकी शंकाओं का निराकरण किया. संसद भवन में आज गृह मंत्री अमित शाह मिज़ोरम के सीएम ललदुहोमा से मुलाक़ात की. मुख्यमंत्री ललदुहोमा ने बैठक के बाद कहा कि बातचीत बेहद सकारात्मक रही. उनके अनुसार यह आश्वासन दिया गया कि कानून के प्रावधान retrospective effect यानी पिछली तारीख से लागू नहीं होंगे.
यह वही बिल जो 2010 में आई थीः सूत्र
आला सरकारी सूत्रों के अनुसार बिल में पिछली तारीख से लागू करने का कोई प्रावधान है ही नहीं. यह बिल तकरीबन वही है जो यूपीए सरकार 2010 में लेकर आई थी. उन्होंने कहा कि इस बिल पर जानबूझकर ईसाई संगठनों में ग़लत धारणाएं फैलाई जा रही हैं. वास्तविकता यह है कि पिछले साल देश में सत्रह हज़ार करोड़ रुपए का विदेशी चंदा आया इसमें से केवल तीन हज़ार करोड़ रुपया ही ईसाई संस्थाओं को गया. यानी बिल के प्रावधानों से ईसाई संगठनों के हितों को चोट नहीं पहुँचती है.
गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल के बारे में कई ईसाई संगठनों से भी चर्चा की है. ईसाई संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात में शाह ने उन्हें आश्वस्त किया है.
बिल की इन तीन धाराओं को लेकर विवाद
इस विधेयक में सबसे बड़ा विवाद धारा 14B, 16A और 16B को लेकर है. धारा 14B के अनुसार यदि कोई संगठन अपने FCRA पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं करता, आवेदन खारिज हो जाता है, या पंजीकरण की अवधि समाप्त हो जाती है, तो उसका सर्टिफिकेट समाप्त माना जाएगा.
बिल में प्रावधान- लाइसेंस रद्द होने पर सरकारी संपत्ति हो जाएगी
धारा 16A और 16 B में संपत्तियों का सरकारी प्राधिकरण में निहित करने का प्रावधान है. FCRA लाइसेंस रद्द होने या समाप्त होने की स्थिति में, विदेशी योगदान से बनाई गई सभी संपत्तियां (जैसे स्कूल, अस्पताल, और सामुदायिक केंद्र) एक नामित प्राधिकरण के अधीन आ जाएंगी. यदि संगठन निर्धारित समय के भीतर नया लाइसेंस प्राप्त नहीं कर पाता, तो ये संपत्तियां स्थायी रूप से सरकार या उसके विभागों के पास चली जाएंगी.
चिंता- पुरानी संपत्तियों को सरकार कब्जे में ले सकती है
ईसाई संगठनों को चिंता है कि इन धाराओं का उपयोग कर पहले बनाई गईं कई संपत्तियों को निशाना बनाया जा सकता है. उन्हें डर है कि जिन संस्थाओं का FCRA पंजीकरण वर्षों पहले समाप्त हो चुका था और जो अब केवल घरेलू धन से चल रही हैं, उनकी पुरानी संपत्तियों को भी सरकार अपने कब्जे में ले सकती है.
जबकि सरकार के आला सूत्रों ने इन्हें ख़ारिज किया है. सरकार का स्पष्ट कहना है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य अतीत के निवेशों या पहले समाप्त हो चुके पंजीकरणों को गलत तरीके से निशाना बनाना नहीं है. यह नियम पिछली तारीख़ से लागू नहीं होगा.
सरकार का दावा- लाइसेंस रद्द होने पर संपत्तियों की देखभाल के लिए होगी अंतरिम व्यवस्था
सरकार का यह भी कहना है कि अगर किसी संस्था का FCRA लाइसेंस समाप्त होता है, तो उसकी संपत्तियों की देखभाल के लिए एक अंतरिम व्यवस्था रहेगी ताकि किसी भी व्यवधान की स्थिति में संपत्तियों का दुरुपयोग न हो. जब मूल संस्था को नया लाइसेंस मिल जाएगा, तो संपत्ति उन्हें वापस सौंप दी जाएगी. सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस विधेयक का उद्देश्य ईसाई समुदाय या किसी ख़ास वर्ग को निशाना बनाना नहीं बल्कि विदेशी चंदे का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है.
यह बिल पिछले सत्र में 25 मार्च को लोक सभा में रखा गया था. सरकार अगले सप्ताह इसे चर्चा और पारित कराने के लिए लाएगी. स्वयं गृह मंत्री अमित शाह इस पर होने वाली चर्चा का जवाब देंगे. माना जा रहा है कि अपने जवाब में वे इस बिल को लेकर व्यक्त की जा रही सभी आशंकाओं का जवाब भी देंगे.
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