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'लड़ना है तो बाहर आ जा', BAP विधायक ने बीजेपी सांसद को धमकाया, राजकुमार रोत और मन्नालाल में हुई तू-तू, मैं-मैं

राजस्थान के डूंगरपुर में जिला विकास समिति की बैठक के दौरान भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत और भाजपा सांसद मन्नालाल रावत के बीच तीखी बहस और धमकी का मामला सामने आया. विवाद आदिवासी मुद्दों पर उठा और राजनीतिक टकराव आदिवासी वोट बैंक की जंग का संकेत देता है.

'लड़ना है तो बाहर आ जा', BAP विधायक ने बीजेपी सांसद को धमकाया, राजकुमार रोत और मन्नालाल में हुई तू-तू, मैं-मैं
  • राजस्थान के डूंगरपुर में बैठक के दौरान भाजपा सांसद मन्नालाल रावत और BAP सांसद राजकुमार रोत के बीच विवाद हुुआ.
  • विवाद आदिवासी मुद्दों को लेकर हुआ, जहां भाजपा सांसद ने बैठक एजेंडा का हवाला देते हुए रोकथाम की कोशिश की.
  • BAP सांसद ने आदिवासी मुद्दे उठाने का अधिकार जताया, जबकि भाजपा सांसद ने उन्हें अनर्गल और धमकी देने वाला बताया.

BAP MLA threatens BJP MP: राजस्थान की राजनीति में एक बड़ी हलचल देखने को मिली. डूंगरपुर में जिला विकास समन्वय और मॉनिटरिंग समिति की बैठक के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद मन्नालाल रावत और भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई. विवाद इतना बढ़ गया कि सुरक्षा कर्मियों को बीच-बचाव करना पड़ा. यह टकराव अब आदिवासी राजनीति के बदलते समीकरणों का प्रतीक माना जा रहा है.

बैठक में क्यों हुआ विवाद?

दरअसल, डूंगरपुर में जिला प्रशासन के साथ राजनीतिक प्रतिनिधियों की बैठक चल रही थी. इसी दौरान BAP सांसद राजकुमार रोत ने आदिवासी मुद्दों को उठाना शुरू किया. इस पर भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने कहा कि बैठक एजेंडा के अनुसार ही चलेगी. देखते ही देखते बहस तेज हो गई और मामला धमकी तक पहुंच गया. BAP विधायक उमेश डामोर ने भी कहा कि “लड़ना है तो बाहर आ जा,” जिससे विवाद और भड़क गया.

दोनों पक्षों के आरोप

बैठक के बाद राजकुमार रोत ने आरोप लगाया कि वह समिति के अध्यक्ष हैं और आदिवासी मुद्दे उठाना उनका अधिकार है. लेकिन भाजपा सांसद ने हर मुद्दे पर रोकने और टोकने का काम किया. दूसरी ओर, मन्नालाल रावत ने कहा कि BAP के नेताओं ने बैठक में अनर्गल बातें कीं, धमकी दी और दिशा की गाइडलाइन्स का उल्लंघन किया.

आदिवासी वोट बैंक की जंग

इस विवाद की जड़ आदिवासी वोट बैंक है. दक्षिण राजस्थान के आदिवासी इलाकों में भाजपा लंबे समय से वनवासी कल्याण परिषद के जरिए काम कर रही है. इससे भाजपा को राजनीतिक फायदा मिला. लेकिन BAP के उभरने से समीकरण बदल गए हैं.

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BAP का बढ़ता प्रभाव

भारतीय आदिवासी पार्टी पिछले पांच वर्षों में आदिवासी समाज की मजबूत आवाज बनकर उभरी है. 2018 में जब यह पार्टी BTP के नाम से जानी जाती थी, तब इसका वोट शेयर 0.72% था. 2023 में यह बढ़कर 2.33% हो गया. 2023 के विधानसभा चुनाव में BAP ने 27 सीटों पर चुनाव लड़ा और 3 सीटें जीतीं. 2024 के लोकसभा चुनाव में बांसवाड़ा सीट पर जीत हासिल कर एक सांसद चुना गया.

भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनौती

BAP का बढ़ता जनसमर्थन भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. खासकर आदिवासी युवाओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत हो रही है. यही वजह है कि राजनीतिक मंचों पर टकराव अब आम हो गया है.

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'भारतीय आदिवासी पार्टी अभी बच्चा है'

उदयपुर चुनाव के दौरान मन्नालाल रावत ने कहा था कि “भारतीय आदिवासी पार्टी अभी बच्चा है, इसे बाप बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.” लेकिन अब लगता है कि BAP सच में ‘बाप' बनने की राह पर है.

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