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This Article is From Apr 25, 2023

"फांसी की सजा सही थी, लेकिन...": पूर्व MP आनंद मोहन की रिहाई पर ऐसे छलका IAS कृष्णैया की पत्नी का दर्द

आनंद मोहन सिंह 2007 में एक निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने बाद में इस सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था. वह 15 साल से जेल में हैं.

दलित आईएएस अफसर जी. कृष्णया की पत्नी ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की मांग की है.
नई दिल्ली:

बिहार में एक दलित आईएएस अफसर जी. कृष्णया की पीट-पीट कर हत्या के मामले में आरोपी गैंगस्टर से राजनेता बने आनंद मोहन सिंह को कथित अच्छे बर्ताव के कारण रिहा किया जा रहा है. वह फिलहाल अपने बेटे और आरजेडी विधायक चेतन आनंद की शादी के लिए पैरोल पर हैं. मृतक आईएएस अधिकारी की पत्नी ने बिहार सरकार के इस फैसले पर निराशा जाहिर की है. दलित नौकरशाह जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने NDTV से कहा, " 15 साल की जेल के बाद राजपूत बाहुबली की रिहाई के लिए बिहार सरकार ने जेल नियमों में बदलाव किया है. आनंद मोहन सिंह को फांसी पर लटका दिया जाता तो अच्छा होता." उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से निर्णय वापस लेने का अनुरोध किया है.

सोमवार को सरकार ने किया ऐलान
दरअसल. बिहार के कानून विभाग ने सोमवार को मुजफ्फरपुर में 1994 में आईएएस अधिकारी जी. कृष्णया की पीट-पीट कर हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बाहुबली नेता आनंद मोहन सिंह समेत छूट पर रिहा होने वाले कैदियों की सूची जारी की. सूची में आनंद मोहन का नाम 11वें पायदान पर है. हत्या के मामले में 15 साल जेल की सजा काट चुके पूर्व सांसद को अच्छे व्यवहार के आधार पर रिहा किया जाना है. इसके साथ ही औपचारिकताएं पूरी करने के लिए वह 25 अप्रैल को जेल लौट आएंगे और अंत में 26 अप्रैल को बाहर आएंगे. 

'अच्छा फैसला नहीं है'
उमा कृष्णैया ने कहा, "अच्छा फैसला नहीं है. हम पहले आजीवन कारावास के फैसले से खुश नहीं थे, लेकिन अब उन्हें रिहा किया जा रहा है. वो फिर से राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं. हम बिहार सरकार के इस कदम से सहमत नहीं हैं. यह एक तरह से अपराधियों को प्रोत्साहित करने वाला कदम है. इससे समाज में यह संदेश जाता है कि आप अपराध कर सकते हैं और जेल जा सकते हैं, लेकिन फिर मुक्त हो जाते हैं. उसके बाद फिर से राजनीति में शामिल हो जाते हैं."

आनंद मोहन की भड़काई भीड़ ने की थी हत्या
गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णय्या की हत्या कथित रूप से आनंद मोहन सिंह द्वारा भड़काई गई भीड़ ने की थी. आनंद मोहन की पार्टी के एक अन्य गैंगस्टर-राजनेता छोटन शुक्ला के शव के साथ विरोध कर रही भीड़ ने कृष्णैया पर हमला किया था. भीड़ ने आईएएस अधिकारी को आधिकारिक कार से बाहर खींच लिया था और पीट-पीट कर मार डाला गया था.

बिहार सरकार का फैसला 'स्वार्थपूर्ण कदम' 
उमा कृष्णैया ने बिहार सरकार के इस फैसले को 'स्वार्थपूर्ण कदम' बताया है. उन्होंने सुझाव दिया कि यह फैसला अपराधियों को प्रोत्साहित करेगा. भविष्य की कार्रवाई के बारे में उन्होंने कहा कि वह जी कृष्णैया के बैचमेट्स और आईएएस एसोसिएशन से सलाह लेंगी, जो इस पर चर्चा कर रहे हैं और एक सप्ताह के भीतर फैसला करेंगे. 

निचली अदालत ने सुनाई थी मौत की सजा
आनंद मोहन सिंह 2007 में एक निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने बाद में इस सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था. वह 15 साल से जेल में हैं. आनंद मोहन सिंह के बेटे लालू यादव की पार्टी आरजेडी से विधायक हैं. आनंद सिंह मोहन नीतीश कुमार की अगुवाई वाली बिहार सरकार द्वारा जेल नियमों में बदलाव के बाद रिहा किए जाने वाले 27 कैदियों में शामिल हैं. 

'राजनीति में वापस लौटूंगा'
वहीं, रिहाई की खबर पर आनंद मोहन सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह सक्रिय राजनीति के क्षेत्र में वापस आने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, "बीजेपी में कई लोग हैं जिन्होंने यह भी कहा है कि मेरे साथ अन्याय हो रहा है और मुझे रिहा किया जाना चाहिए. आप किसी को भी कुछ भी कहने से नहीं रोक सकते."

बीजेपी ने नीतीश सरकार के इस फैसले की निंदा की है. इस मामले पर हंगामे के बीच जेडीयू ने बीजेपी को जवाब भी दिया है. सत्तारूढ़ जेडीयू  ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि आनंद मोहन सिंह ने अपनी जेल की अवधि पूरी कर ली है. नीतीश कुमार सरकार "आम" और "खास" लोगों के बीच अंतर नहीं करती है.

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