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मुंबई कूच नहीं करेंगे मनोज जरांगे, सरकार को 3 महीने के अल्टीमेटम के साथ 20वें दिन तोड़ा अनशन

मनोज जरांगे का अनशन 20वें दिन खत्म हो गया है. उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार को आखिरी मौका दिया जाना चाहिए.

मुंबई कूच नहीं करेंगे मनोज जरांगे, सरकार को 3 महीने के अल्टीमेटम के साथ 20वें दिन तोड़ा अनशन
मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटील.
NDTV
  • मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर 20 दिनों से चल रहा अनशन आज समाप्त किया.
  • राज्य सरकार के मंत्री और विधायक प्रतिनिधिमंडल ने पाटोदा में जरांगे से मुलाकात कर मांगों पर सकारात्मक चर्चा की.
  • जरांगे ने 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, मुख्यमंत्री के लिखित आश्वासन और प्रमाणपत्र वितरण की मांग की.
मुंबई:

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल ने आखिरकार अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया है.  राज्य सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने बीड के पाटोदा में उनसे मुलाकात की और मांगों पर सकारात्मक चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया. अनशन समाप्त होने के तुरंत बाद उनकी बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें एंबुलेंस के जरिए छत्रपति संभाजीनगर के गैलेक्सी अस्पताल ले जाया गया है. सरकार की ओर से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, दादा भुसे, विधायक प्रसाद लाड और विधायक सुरेश धस ने जरांगे पाटिल से मुलाकात कर चर्चा की.

जरांगे की प्रमुख मांगें: 

58 लाख कुनबी रिकॉर्ड किसी भी कीमत पर कम नहीं होने चाहिए. इस पर मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर के साथ लिखित आश्वासन दिया जाए. इसके अलावा, हैदराबाद गजट के अनुसार सभी मराठा समाज को प्रमाणपत्र दिए जाएं.

सरकार का आश्वासन: 

सरकार ने शब्द दिया है कि 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स कम नहीं की जाएंगी. प्रमाणपत्र वितरण के लिए जो कैंप लगाए जा रहे हैं, उनमें आवश्यक सुधार किए जाएंगे. अनशन के 20वें दिन माहौल काफी तनावपूर्ण था. जरांगे पाटिल की तबीयत बिगड़ने के कारण वे एक समय बेसुध भी हो गए थे. इसी बीच, सरकार की ओर से बातचीत का संदेश आया. पाटोदा में जहां जरांगे रुके हुए थे, वहां उनके समर्थक रात भर जागकर सरकारी प्रतिनिधिमंडल का इंतजार करते रहे. सुबह होते ही सरकार के दूतों ने वहां पहुंचकर मोर्चा संभाला.

मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जरांगे को मनाते हुए कहा, "सरकार आपकी मांगों को लेकर एक कदम आगे आई है, अब आपको भी एक कदम आगे आकर अपना उपोषण रोक देना चाहिए." उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार की उपसमिति इस तरह से ठोस काम करेगी कि भविष्य में जरांगे को दोबारा सड़कों पर संघर्ष करने की नौबत नहीं आएगी.

जरांगे पाटिल की प्रमुख मांगें

चर्चा के दौरान मनोज जरांगे अपनी मांगों पर अडिग रहे. उन्होंने सरकार के सामने मुख्य रूप से तीन शर्तें रखीं:

  1. 58 लाख रिकॉर्ड्स की सुरक्षा: मराठवाड़ा में मिले 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स किसी भी कीमत पर कम या रद्द नहीं होने चाहिए.
  2. मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर: इस आश्वासन पर सिर्फ मौखिक बात न हो, बल्कि मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर वाला लिखित आश्वासन दिया जाए.
  3. हैदराबाद गजट का क्रियान्वयन: हैदराबाद गजट के अनुसार सभी मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी किए जाएं.

सरकार का आश्वासन और 90 दिनों का अल्टीमेटम

सरकार ने जरांगे की बातों को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स में कोई कटौती नहीं की जाएगी.  इसके अलावा, कुनबी प्रमाणपत्र बांटने के लिए जो विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं, उनमें भी आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएंगे.

विधायक प्रसाद लाड ने जानकारी दी कि राज्य के शीर्ष नेतृत्व के अनुरोध और वादे के बाद यह अनशन खत्म हुआ है. उन्होंने कहा कि अगले 90 दिनों के भीतर मनोज जरांगे पाटिल को दिया गया शब्द हर हाल में पूरा किया जाएगा.

इस पर जरांगे ने भी नरमी दिखाते हुए कहा, "मैं सरकार को आखिरी मौका दे रहा हूं. सातारा और कोल्हापुर गजट को लागू करने के लिए मैं अपनी ओर से सरकार को 3 महीने का अतिरिक्त समय देता हूं."

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जरांगे ने कहा: "3 करोड़ मराठों को आरक्षण दिलाकर रहूंगा"

अनशन तोड़ने के बाद मनोज जरांगे ने एक संक्षिप्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, कहा, "मेरी सबसे बड़ी चिंता वे 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड थे. इनमें से एक भी रिकॉर्ड मैं कम नहीं होने दूंगा. इन्हीं रिकॉर्ड्स के आधार पर मैं 3 करोड़ मराठों को आरक्षण के दायरे में लाकर दिखाऊंगा."

प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद, अत्यधिक कमजोरी और स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्हें मेडिकल टीम की निगरानी में एंबुलेंस द्वारा छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के गैलेक्सी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज शुरू कर दिया गया है.

डॉक्टर ने बताया कैसी है जरांगे की तबीयत?

डॉ. सोलंके ने कहा, 'उनका रक्तचाप और रक्त शर्करा का स्तर काफी गिर गया था तथा वह निर्जलीकरण से पीड़ित थे. हालांकि, फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर है और चिकित्सकों की एक टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है.'

जरांगे (44) ने मंगलवार को जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव से मुंबई के लिए 400 किलोमीटर से अधिक लंबी यात्रा शुरू की थी. वह कारों के काफिले के साथ रवाना हुए थे. पाटोदा में सुबह संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जरांगे ने कहा कि उन्हें पेट और पैरों में तेज जलन महसूस हो रही है.

Inputs - मोहसिन शेख, अजिंक्य पाटिल

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