महाराष्ट्र से एक बड़ी खबर सामने आई है. मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर सरकार की नाक में दम करने वाले मनोज जरांगे पाटील ने अपना अनशन 20वें दिन समाप्त कर लिया है. जरांगे का अनशन समाप्त होने से सरकार ने राहत की सांस ली है. अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा करते हुए जरांगे ने कहा कि सरकार को आखिरी मौका दिया जाएगा. सातारा और कोल्हापुर गजट के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा. सरकार ने आश्वासन दिया है कि 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड कम नहीं किए जाएंगे. अनशन समाप्त करने के साथ मनोज जरांगे का प्रस्तावित मुंबई कूच भी फिलहाल रुक गया है.
बुधवार को तबीयत बिगड़ने के कारण बीड में रुकी जरांगे की यात्रा
मालूम हो कि 16 सितंबर को मनोज जरांगे ने अपना मुंबई दौरा बीड जिले के पाटोदा में रोक दिया था, जहां वह अनशन के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का इलाज करा रहे हैं. लगातार भूख हड़ताल और प्रदर्शन के कारण जरांगे की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है. इस बीच अब जरांगे ने 20वें दिन अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा की है.
सरकार ने आंदोलन वापस लेने की अपील की थी
दूसरी ओर महाराष्ट्र के वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जरांगे से आंदोलन वापस लेने की अपील करते हुए कहा था कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है. बीड जिले के सरकारी सर्जन डॉ. सतीश कुमार सोलंके ने बताया कि अनशन के 19वें दिन बुधवार तड़के पाटोदा पहुंचने वाले जरांगे को सरकारी ग्रामीण अस्पताल से सटे एक मकान में चिकित्सकीय सहायता दी जा रही है.
डॉक्टर ने बताया कैसी है जरांगे की तबीयत?
डॉ. सोलंके ने कहा, 'उनका रक्तचाप और रक्त शर्करा का स्तर काफी गिर गया था तथा वह निर्जलीकरण से पीड़ित थे. हालांकि, फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर है और चिकित्सकों की एक टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है.'
जरांगे (44) ने मंगलवार को जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव से मुंबई के लिए 400 किलोमीटर से अधिक लंबी यात्रा शुरू की थी. वह कारों के काफिले के साथ रवाना हुए थे. पाटोदा में सुबह संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जरांगे ने कहा कि उन्हें पेट और पैरों में तेज जलन महसूस हो रही है.
तबीयत के कारण जरांगे ने दौरा रद्द करने की कही थी बात
बिगड़ती तबीयत के बीच मनोज जरांगे ने कहा था, 'अगर मैं इलाज कराता हूं तो सरकार पूरी तरह से बेफिक्र हो जाती है और अगर इलाज रोक दूं तो वे तनाव में आ जाते हैं. मुंबई का यह दौरा मेरी सेहत पर असर डाल रहा है. स्वस्थ रहने पर तो मैं यात्रा जारी रख सकता हूं, लेकिन अनशन जारी रहने के बीच इतनी लंबी यात्रा सही नहीं है. अगर कोई विकल्प नहीं बचा तो यह दौरा रद्द भी किया जा सकता है.'
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