- मनोज जरांगे का अनशन खत्म करने के लिए खुद सीएम फडणवीस ने संभाला था मोर्चा
- मंत्री उदय सावंत भी पेरिस से लगातार अनशन खत्म कराने की कोशिश में जुटे थे
- उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से जरांगे की करीब 7 बार चर्चा हुई थी
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल के अनशन खत्म करने के पीछे करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बातचीत और पर्दे के पीछे हुई राजनीतिक कवायद अहम रही. खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया में उद्योग मंत्री उदय सामंत महाराष्ट्र से करीब 7 हजार किलोमीटर दूर पेरिस में मौजूद थे. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सम्मेलन में हिस्सा लेने पेरिस गए उदय सामंत महाराष्ट्र में चल रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए थे. अनशन और प्रस्तावित मुंबई मार्च को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई थी. ऐसे में सामंत ने पेरिस से ही महाराष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व और जरांगे पाटिल के करीबियों के साथ लगातार बातचीत की.
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से लगातार बातचीत
बातचीत के दौरान उदय सामंत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से करीब सात बार बातचीत की. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ भी उनकी लगभग सात बार चर्चा हुई. इसके बाद एक अहम कॉन्फ्रेंस कॉल हुई, जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, बीजेपी नेता प्रसाद लाड और उदय सामंत शामिल हुए. इस बातचीत में जरांगे पाटिल की लंबित मांगों, आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति और मौजूदा स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभालने पर चर्चा हुई.

अनशन खत्म करते हुए मनोज जरांगे
जरांगे के करीबियों से भी सीधा संपर्क
सरकार की ओर से जरांगे पाटिल के करीबी सहयोगियों से भी सीधे संपर्क किया गया. बातचीत के दौरान लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिलाया गया. सरकार के लिए चुनौती यह थी कि एक तरफ जरांगे पाटिल के आंदोलन को लेकर बातचीत का रास्ता खुला रखा जाए और दूसरी तरफ प्रस्तावित मुंबई मार्च से स्थिति और न बिगड़े. गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया गया.
पेरिस से चलता रहा ‘मुंबई कनेक्शन'
पूरे घटनाक्रम में उदय सामंत की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि वे महाराष्ट्र में मौजूद नहीं थे. पेरिस में रहते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और जरांगे पाटिल के करीबियों के बीच संवाद बनाए रखा. करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बातचीत में कई दौर की चर्चा हुई. पहले सरकार के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत, फिर संयुक्त कॉन्फ्रेंस कॉल और उसके बाद जरांगे पाटिल के करीबियों तक सरकार का संदेश पहुंचाने की प्रक्रिया चली. इसी संवाद के दौरान लंबित मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक फैसलों का आश्वासन दिया गया.
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आखिरकार अनशन हुआ खत्म
लगातार बातचीत और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद मनोज जरांगे पाटिल ने अपना अनशन खत्म करने का फैसला किया. सरकार के लिए तत्काल चुनौती टल गई और प्रस्तावित मुंबई मार्च को लेकर भी तनाव कम करने की दिशा में रास्ता बना. उदय सामंत इससे पहले भी जरांगे पाटिल के मुंबई मार्च से जुड़े घटनाक्रम में हस्तक्षेप कर चुके थे. इस बार भी उनके प्रयासों के जरिए सरकार और जरांगे पाटिल के खेमे के बीच संवाद कायम रहा.
अब आगे की चुनौती?
जरांगे पाटिल का अनशन खत्म होना तत्काल टकराव को विराम देता है, लेकिन आंदोलन से जुड़ी लंबित मांगों पर आगे क्या निर्णय होता है, यह अब महत्वपूर्ण होगा. पेरिस से करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बातचीत ने तत्काल स्थिति को संभालने में भूमिका निभाई. अब इन बातचीत के दौरान दिए गए आश्वासन कितनी जल्दी और किस रूप में फैसलों में बदलते हैं, इस पर आगे की नजर रहेगी.
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