- मराठा आंदोलन से जुड़े लोगों के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल शुरू
- मनोज जरांगे खेमे से जुड़े लोगों पर आयकर विभाग की नजर
- अजय बारसकर के आरोपों के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे-पाटील से जुड़े लोगों के वित्तीय लेन-देन अब जांच के दायरे में आ गए हैं. सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं, रिश्तेदारों और कारोबारी सहयोगियों के आर्थिक रिकॉर्ड की छानबीन कर रहा है. जांच में आयकर रिटर्न, संपत्ति, बड़े वित्तीय लेन-देन और सरकारी ठेकों से जुड़े मामलों को शामिल किया गया है. बताया जा रहा है कि कुछ कंपनियों को मिले सरकारी काम, जमीनों की खरीद-बिक्री और फंड के स्रोतों की भी पड़ताल की जा रही है.
वित्तीय लेन-देन की हो रही जांच
सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग ने मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े कुछ व्यक्तियों और उनके परिजनों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की है. जानकारी के मुताबिक, आयकर रिटर्न, संपत्ति विवरण, बड़े आर्थिक लेन-देन और विभिन्न व्यावसायिक संबंधों की जांच की जा रही है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि संबंधित व्यक्तियों के फंड के स्रोत क्या हैं और उनकी वित्तीय गतिविधियां नियमों के अनुरूप हैं या नहीं.
सरकारी ठेकों की भी पड़ताल
सूत्रों का कहना है कि जांच का दायरा केवल व्यक्तिगत वित्तीय लेन-देन तक सीमित नहीं है. आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों या उनके रिश्तेदारों से संबंधित कंपनियों को मिले सरकारी ठेकों की भी पड़ताल की जा रही है. इसमें ठेकों की निविदा प्रक्रिया, अनुबंधों में हुई वृद्धि और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की समीक्षा शामिल है. जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि संबंधित परियोजनाओं में सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं.
764.7 करोड़ रुपये के काम मिलने के आरोपों की जांच
सूत्रों के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर की एक कंपनी को लगभग 764.7 करोड़ रुपये के सरकारी कार्य मिलने से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है. बताया जा रहा है कि इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है. हालांकि अभी तक जांच एजेंसियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है.
अजय बारसकर के आरोपों के बाद बढ़ा ध्यान
इस पूरे मामले ने उस समय अधिक ध्यान खींचा जब मनोज जरांगे-पाटील के पूर्व सहयोगी अजय बारसकर ने सार्वजनिक रूप से कुछ आरोप लगाए. बारसकर का आरोप था कि मराठा आंदोलन के नाम पर बड़ी मात्रा में संपत्ति जुटाई गई है. इसके बाद आंदोलन से जुड़े कुछ वित्तीय लेन-देन चर्चा में आए और जांच एजेंसियों का ध्यान इस ओर गया. हालांकि आरोपों की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है.
राजनीतिक लाभ के सबूत नहीं
सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में सरकारी ठेकों के बदले किसी राजनीतिक लाभ या कथित "क्विड प्रो क्वो" के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य उपलब्ध सूचनाओं और वित्तीय रिकॉर्ड का सत्यापन करना है. किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी.
जमीन और संपत्तियों पर भी निगाह
जानकारी के मुताबिक, कुछ व्यक्तियों की जमीन, अचल संपत्ति और फंड के स्रोतों को लेकर भी जांच शुरू की गई है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संपत्तियां किन स्रोतों से अर्जित की गईं और क्या उनसे जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन विधिसम्मत हैं.
कौन हैं अजय बारसकर?
अजय बारसकर मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता और कीर्तनकार रहे हैं. एक समय उन्हें मनोज जरांगे-पाटील के करीबी सहयोगियों में गिना जाता था और वे सरकार के साथ हुई बैठकों में भी शामिल रहे थे. बाद में दोनों के बीच मतभेद सामने आए और बारसकर ने जरांगे-पाटील की कार्यशैली, आंदोलन की रणनीतियों तथा कुछ बैठकों को लेकर सार्वजनिक रूप से कई सवाल उठाए.
आयकर विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. सूत्रों के मुताबिक, जांच विभिन्न वित्तीय पहलुओं पर केंद्रित है और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है.
इनपुट : ऋतिक गणकवर
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