- कौन हैं ACP विवेक भगत? इंजीनियर से पुलिस अफसर बने; अब AI वीडियो विवाद के बीच चर्चा में
- विवेक भगत की पूरी कहानी: गैंगवार केस से लेकर विवादों तक
- 2022 गणतंत्र दिवस परेड का नेतृत्व करने वाले अधिकारी पर अब जांच की आंच
दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत का नाम इन दिनों लगातार चर्चा में है. संसद मार्ग और जंतर-मंतर क्षेत्र में हुए प्रदर्शनों के बाद उन पर लगे आरोपों और उससे जुड़े घटनाक्रम ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है. हालांकि विवादों से इतर उनका पुलिस सेवा का रिकॉर्ड भी काफी चर्चित रहा है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई से लेकर UPSC में सफलता, दिल्ली पुलिस में चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने, गैंगवार और जघन्य अपराधों की जांच करने तथा जंतर-मंतर हिंसा में गंभीर रूप से घायल होने तक उनकी सेवा यात्रा कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरी है. NDTV ने एसीपी विवेक भगत के बारे में पता किया तो उनसे जुड़ी कई अहम जानकारियां निकल कर सामने आईं. आइए जानते हैं कौन हैं ACP विवेक भगत और क्यों चर्चा के केंद्र में हैं.
इंजीनियरिंग छोड़ पुलिस सेवा को चुना
विवेक भगत ने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद भी उनका लक्ष्य प्रशासनिक और पुलिस सेवा में जाने का था. इसी उद्देश्य से उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी की. वर्ष 2017 में UPSC परीक्षा देने के बाद उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 967 हासिल की और 2018 बैच के DANIPS अधिकारी बने. इसके बाद उनकी नियुक्ति दिल्ली पुलिस में हुई और उन्होंने विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां निभाईं. वर्तमान में वह कनॉट प्लेस सब-डिवीजन के ACP के रूप में कार्यरत रहे हैं, जहां राजधानी के सबसे संवेदनशील और वीआईपी इलाकों में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी उनके पास रही.

एसीपी विवेक भगत
सेवा रिकॉर्ड में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां
विवेक भगत के सेवा रिकॉर्ड में कई उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज हैं. वर्ष 2022 की गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने दिल्ली पुलिस की टुकड़ी का नेतृत्व किया था. उनके कार्यों के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त की ओर से Commendation Disc और Commendation Roll प्रदान किया गया. इसके अलावा भारत सरकार के रक्षा सचिव की ओर से भी उन्हें Commendation Roll से सम्मानित किया जा चुका है. पुलिस विभाग में उनके सहयोगी अधिकारियों के अनुसार यह सम्मान उनके प्रोफेशनल कार्य, नेतृत्व क्षमता और चुनौतीपूर्ण मामलों में सक्रिय भूमिका के कारण मिला.

परेड का नेतृत्व करते हुए विवेक भगत
गैंगवार और संगठित अपराध के मामलों की जांच
ACP अलीपुर और ACP बवाना के रूप में कार्यकाल के दौरान विवेक भगत ने कई गंभीर आपराधिक मामलों की जांच का नेतृत्व किया. उनकी टीम ने जितेंद्र गोगी गैंग, टिल्लू ताजपुरिया गैंग और नीरज बवाना गैंग से जुड़े मामलों पर काम किया. दिल्ली और आसपास के इलाकों में गैंगवार, हत्या, लूट और डकैती के कई संवेदनशील मामलों की जांच उनके कार्यकाल के दौरान हुई. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इन मामलों में कई महत्वपूर्ण सुराग और आरोपियों तक पहुंचने में उनकी टीम की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई.

विवेक भगत ने कई केस सुलझाए
24 घंटे में पकड़ा गया बच्ची का हत्यारा
विवेक भगत के करियर का एक चर्चित मामला बवाना क्षेत्र से जुड़ा रहा. होली 2024 के आसपास एक 4 से 5 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या का मामला सामने आया था. जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी को पश्चिम बंगाल के हावड़ा से 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया था. पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया था कि बच्ची के शव को बवाना की एक बंद पड़ी फैक्ट्री में रखी मेज की दराज में छिपाया गया था. पुलिस विभाग के भीतर इस मामले को तेजी से सुलझाने को बड़ी सफलता माना गया था.
जंतर-मंतर हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए थे
विवेक भगत पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आए जब जून 2026 में जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस क्षेत्र में हुए CJP प्रदर्शन के दौरान हिंसक स्थिति बन गई थी. प्रदर्शन के दौरान भीड़ और पुलिस के बीच टकराव हुआ. इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद ACP विवेक भगत को भीड़ ने घेर लिया और उनके साथ मारपीट की गई. घटना में उनके दांत टूट गए थे और शरीर पर कई गंभीर चोटें आई थीं. हालात इतने बिगड़ गए थे कि एक मौके पर DCP विनीत कुमार ने हस्तक्षेप कर उन्हें भीड़ से बाहर निकाला. इसके बाद उन्हें उपचार के लिए लंबे समय तक अवकाश पर रहना पड़ा. स्वास्थ्य लाभ के बाद उन्होंने फिर से ACP कनॉट प्लेस सर्किल की जिम्मेदारी संभाली और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर लौट आए.
अक्टूबर 2026 में फिर विवादों में आया नाम
विवेक भगत का नाम एक बार फिर अक्टूबर 2026 में सुर्खियों में आया. 2 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन हुआ था. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी. इसी दौरान कुछ महिलाओं, जिन्होंने खुद को पत्रकार बताया, ने पुलिसकर्मियों पर कथित यौन दुर्व्यवहार और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए.
कुल तीन महिलाओं ने तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं. इसके बाद संबंधित संगठनों ने FIR की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई.

AI वीडियो विवाद भी आया सामने
इसी दौरान एक और मामला सामने आया, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया. पुलिस जांच में दावा किया गया कि हरियाणा के नूंह निवासी नदीम अहमद ने कथित तौर पर AI तकनीक का उपयोग कर विवेक भगत का एक आपत्तिजनक फर्जी वीडियो तैयार किया.
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वीडियो के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क, साजिश या फंडिंग एंगल तो नहीं था. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो बनाने और प्रसारित करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति या संगठन ने आर्थिक सहायता तो नहीं दी.

Additional DCP की जिम्मेदारी और नया विवाद
इसी बीच दिल्ली सरकार ने 2017 और 2018 बैच के DANIPS अधिकारियों को Additional DCP के Current Duty Charge (CDC) देने का आदेश जारी किया. इस सूची में विवेक भगत का नाम भी शामिल था.
इसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि यह स्थायी पदोन्नति नहीं बल्कि अस्थायी प्रशासनिक जिम्मेदारी थी. सरकार के अनुसार इस प्रक्रिया का प्रस्ताव 25 अगस्त को ही शुरू हो चुका था, जो अक्टूबर के विवाद से पहले का था.
खुद जिम्मेदारी लेने से किया इंकार
विवाद बढ़ने के बाद घटनाक्रम में नया मोड़ आया. विवेक भगत ने स्वयं कहा कि जब तक उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह Additional DCP CDC की जिम्मेदारी नहीं संभालना चाहते. इसके बाद उनका CDC रोके जाने का निर्णय सामने आया.
रोहिणी में परिवार के साथ रहते हैं विवेक भगत
विवेक भगत वर्तमान में दिल्ली के रोहिणी इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं. कनॉट प्लेस सर्किल और जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी के रूप में उनका नाम लंबे समय से पुलिस व्यवस्था का हिस्सा रहा है.
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